3 जुलाई को सेंट थॉमस की याद में भारतीय मसीही दिवस के रूप में मनाएगा ,एक दशक तक उत्सव मनाएंगे

संत थॉमस की शिक्षाओं और सिद्धांतो पर चलेगा मसीही समाज
o रायपुर। राज्य में शनिवार को भारतीय मसीही दिवस मनाया गया। प्रभु यीशु मसीह के 12 शिष्यों में से एक संत थॉमस सन ५२ में भारत आए थे। भारत सरकार ने उनपर डाक टिकट भी जारी किया था। उनकी याद में आज संकल्प लिया गया कि हिंदुस्तान में भारतीय मसीही दिवस मनाया जाएगा। समाजजन उनकी याद में एक दशक तक उत्सव करेंगे। डायसिस के प्रवक्ता जॉन राजेश पॉल ने बताया कि मसीहीजन संत थोमा की सेवाओं व यीशु मसीह के जीवन सिद्धांतों को जन जन तक पहुंचाकर अपने जीवन में आत्मसात करेंगे। इसके अलावा भारत और विश्व को वैश्विक मित्र के रूप में निरुपित करेंगे। पड़ोसियों से सदभाव व प्रेम रखने का संदेश देंगे। सामुदायिक सेवा, स्वास्थ्य व साक्षरता शिविर लगाएंगे। भोजन व कपड़ों का वितरण करेंगे। पर्यावरण की रक्षा करेंगे। वर्कशाप व प्रतिभा खोज कार्यक्रम करेंगे। भारतीय नृत्य व संगीत को आगे बढ़ाने कार्यक्रमों में प्रदर्शित करेंगे। राजधानी में कैथोलिक समुदाय ने आर्च बिशप विक्टर हैनरी व फादर सेबेस्टियन की अगुवाई में संत थॉमस का स्मरण किया। छत्तीसगढ़ डायसिस सीएनआई के बिशप रॉबर्ट अली के साथ भी मसीहीजनों ने संत थोमा की सेवाएं के लिए उन्हें धन्यवाद व श्रद्धांजलि दी।
O प्रभु यीशु की मृत्यु फिर पुनरूत्थान के बाद उनका ४० दिन बाद स्वर्गारोहण हो गया था। उनके ग्यारह चेले प्रभु की आज्ञा के अनुसार पूरे विश्व में सुसमाचार प्रचार के लिए निकल पड़े। एक चेले यहूदा इस्करयोती जिनसे प्रभु का पकड़वाया था, उसने ग्लानि में फांसी लगा ली थी। संत थॉमस फिलिस्तीन से भारत पहुंचे। उन्होंने मलाबार – दक्षिणी राज्यों केरल व तमिलनाडु में करीब दो हजार साल पहले मसीहीयत की आधारशिला रखी। उन्होंने सात कलीसिया स्थापित कीं। बाद में वे कट्टरपंथियों का शिकार हो गए।
धर्मगुरुओं ने बताया कि संत थोमा सन 52 (एडी) में भारत आए। उन्होंने करीब 20 साल सेवा दी। सन 72 में वे शहीद हो गए।

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