महंगाई उच्चतम सीमा पर , आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों को रोकने नए प्रभावी नियंत्रक कानून की आवश्यकताl (लेख संजीव ठाकुर)

भारत में पिछले दो वर्षों में महंगाई चरम पर पहुंच गई हैl भारत की जनसंख्या के मद्देनजर लगभग 135 करोड़ लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं के दाम पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। आपको यह बता दें कि आवश्यक वस्तुओं में चावल, दाल, गेहूं, केरोसिन, गैस, पेट्रोल, डीजल और अन्य रोजमर्रा की चीजें समाहित है ।आवश्यक वस्तुओं के मूल्य केरोसिन,गैस और पेट्रोल ,डीजल को छोड़कर अन्य चीजों कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोई भी अत्यंत प्रभावी नियंत्रक कानून प्रचलन में नहीं है और जो वर्तमान में प्रचलित धाराएं हैं वह बढ़ती कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त ना होकर काफी लचीली है। आवश्यक वस्तु अधिनियम को भी परिमार्जित करने की आवश्यकता प्रतीत होती है। यदि वर्तमान जैसा परिदृश्य लगातार चलता रहा तो महंगाई बेलगाम हो जाएगी और तमाम आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होकर अनियंत्रित हो जाएगीl इसी लिए केंद्र को चाहिए इस संदर्भ में विचार मनन कर अत्यंत ही समीचीन कानूनों में परिवर्तन कर महंगाई और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लाने का प्रयास करें l पिछले दो-तीन वर्षों में भारत में आवश्यक वस्तुओं से लेकर पेट्रोल, डीजल तथा अन्य सामग्रियों में कीमतें लगभग डेढ़ गुना हो गई है। भारत में महंगाई का स्तर अभूतपूर्व तरीके से अचानक उच्चतम सीमा से ऊपर हो गया है। मध्यम वर्ग तथा गरीब तबके का व्यक्ति इस महंगाई की आग में सबसे ज्यादा झुलस रहा है। आमदनी उतनी की उतनी ही है और महंगाई चरम सीमा पर है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ हिंदुस्तान में ही महंगाई का परचम भयानक तौर पर लहरा रहा है। पेट्रोल ,डीजल, गैस के दाम तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड आयल के दाम बढ़ने से बढ़ते हैं, फिर अलग अलग राज्य सरकारें उस पर कर लगाकर दाम बढ़ाने का काम करती है पर मूल रूप से वैश्विक स्तर पर महंगाई करोना के भयानक संक्रमण और रूस यूक्रेन युद्ध की भयानक विभीषिका की परिणति ही है। रूस के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने तो महंगाई में आग ही लगा के रख दी है। रूस अब किसी भी कीमत पर यूरोपीय देशों तथा अन्य पश्चिमी देशों को पेट्रोल डीजल गैस देने की मनः स्थिति में नहीं है, उस पर रूस पर यूरोपीय तथा ने1टो देशों का प्रतिबंध भी महंगाई का बड़ा कारण है। रूस का अमानवीय तरीके से यूक्रेन पर आक्रमण और लगभग एक करोड़ यूक्रेन के नागरिक अन्य देशों में शरणार्थी बनकर रहने के कारण ही यूरोप में महंगाई बहुत बढ़ गई है। भारत के परिपेक्ष में महंगाई अब चरम सीमा पर है आम आदमी का जीना मुश्किल दर मुश्किल होता जा रहा है। पाकिस्तान, बांग्लादेश के अलावा श्रीलंका में तो महंगाई ने सरकार का तख्ता ही पलट दिया है।
पाकिस्तान में भी सत्ता परिवर्तन का कारण महंगाई तथा बेरोजगारी ही रही है। रूस यूक्रेन युद्ध के इतने महीने बाद भी अमानवीय क्रूर विभीषिका थमने का नाम नहीं ले रही है। यूक्रेन के करोड़ों लोग बेघरबार हो गए हैं।
यूक्रेन की अरबों रुपए की संपत्ति युद्ध की भेंट चढ़ चुकी है, यूक्रेन में नागरिकों का कोहराम मचा हुआ है।
ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियों गुतारेस की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से शांति बहाल हेतु शांति वार्ता मानवता के लिए सर्वाधिक सकारात्मक एवं अहम पहल है।
अब रूस, यूक्रेन युद्ध भयानक तथा क्रूरतम रूप ले चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पूरी तरह अपनी सनक में आकर यूक्रेन को बर्बादी के अंतिम छोर पर पहुंचाना चाह रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ अड़ियल रवैया रूस ही दिखा रहा है बल्कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेन्सकी भी
ना जाने किस घमंड और गुमान पर अड़े हुए हैं, उन्हें अपने देश के एक करोड़ से ज्यादा विस्थापित नागरिक दिखाई नहीं दे रहे हैं एवं हजारों निर्दोष नागरिकों के साथ सैनिकों की मृत्यु तथा शव भी उन्हें युद्ध रोकने के लिए बाध्य नहीं कर पा रहें है। वैसे यह तो तय है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन की आड़ में अमेरिका तथा नाटो देशों के सदस्यों को यह बताना चाह रहे हैं कि रूस अभी भी उतना ही शक्तिशाली है जितना वह उस 1990 में विघटन के पूर्व था। रूस यूक्रेन युद्ध के 50 दिन पूरे हो चुके हैं और यूक्रेन के हौसले अभी भी बुलंद दिखाई दे रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों के अनुसार कीव ,मारियोपोल, बूचा, लोहानस्क,डोनेट्स आदि शहर नर संहार के भयानक केंद्र बन चुके हैं। न्यूज़ एजेंसी के अनुसार यूक्रेन के मूल हथियार जो उसके पास पूर्व में थे सारे नष्ट हो चुके हैं, तमाम हवाई अड्डे नेस्तनाबूद कर दिए गए हैं, अब स्थिति यह है कि फ्रांस, इजराइल, कनाडा,न्यूजीलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, पोलैंड से आए हुए जहाज, टैंक और मशीन गनों के सहारे ही यूक्रेन में वर्तमान का युद्ध लडा जा रहा है। यूक्रेन के लगभग 20 से 25 हजार सैनिक और नागरिक मारे जाने की एजेंसियों द्वारा पुष्टि की गई है। और कीव ,बूचा, मारियोपोल मैं रूसी सैनिकों के साथ उनके कई सेना के अधिकारियों की मौत की भी पुष्टि की गई है। यूक्रेन के सरकारी प्रवक्ता ने बताया रूस के लगभग 15हजार सैनिक इस युद्ध में हलाक हुए हैं। और उनके लड़ाकू जेट ,पैटर्न टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां तथा ड्रोन भारी मात्रा में नष्ट कर दिए गए हैं। रूस युद्ध में अरबों रुपए का नुकसान प्रतिदिन झेल रहा है। यूक्रेन को तो नाटो तथा अमेरिका लगातार आर्थिक तथा सामरिक मदद कर रहा है, जिसके फलस्वरूप यूक्रेन की स्थिति अभी तक मजबूत बनी हुई है।
इस युद्ध में मानवीय संवेदनाओं, मानवता ने यूक्रेन तथा रूस दामन लगभग त्याग दिया है। दोनों देशों के निष्ठुर कमांडरों ने मानवता को मूल नष्ट करने का मानों ठेका ही ले लिया है। यूक्रेन से लगभग एक करोड़ से ज्यादा यूक्रेन के निवासियों ने पोलैंड और यूरोपीय देशों में मजबूर शरणार्थियों की तरह पनाह ले ली है। इस युद्ध में रूस के राष्ट्रपति पुतिन उनके विदेश मंत्री लावरोव तथा रक्षा मंत्री सहित अन्य कमांडर अब मानसिक दबाव में आकर मानसिक असंतुलन की स्थिति में आ गए हैं। पुतिन के मानसिक असंतुलन की स्थिति का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उसने चेचन्या के सबसे खतरनाक कमांडर रमजान को आक्रमण का जिम्मा दिया है इस कमांडर रमजान के बारे में बताया जाता है कि यह पुतिन का सबसे विश्वास पात्र एवं अत्यंत क्रूर सैन्य अधिकारी है जो केवल विरोधी सैनिकों की मृत्यु बनकर उन पर टूट पड़ता है। ऐसे में यूक्रेन एक बड़े नरसंहार केंद्र के रूप में तब्दील हो सकता है और इसकी परिणति वैश्विक अशांति की ओर अग्रसर हो कर विश्व युद्ध की संभावनाओं को और बढ़ा देगी ।
अब धीरे-धीरे पुतिन की योजनाओं से लगने लगा कि उनकी मानसिक स्थिति हिटलर की तरह पूरे विश्व को विश्व युद्ध की आग में झोंकने की हो गई है। उल्लेखनीय है कि इस रूस यूक्रेन युद्ध में रूस के साथ लगभग 24 देश ही है और बाकी सारे देश रूस का लगातार विरोध कर रहे हैं केवल भारती ही ऐसा देश है जो निरपेक्ष बना हुआ है रूस का मौन समर्थन करने के कारण यूरोपीय देश की नाराजगी झेलने को मजबूर हैं। विश्व युद्ध में भारत की स्थिति बड़ी असमंजस वाली बन सकती है, यदि भारत रूस का साथ देता है तो उसे अमेरिका, ब्रिटेन और नाटो देशों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर रूस यूक्रेन युद्ध ने मानवीय संवेदनाओं, मानवता को को जिस तरह समूल नष्ट किया है, वह वैश्विक इतिहास वर्तमान संदर्भ में क्रूरतम माना जाएगा।
संजीव ठाकुर, लेखक, चिंतक, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,

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