स्ट्रेस मैनेजमेंट” के लिए मितानिन ट्रेनरों को सिखाया गया चिकन डांस

 

बेमेतरा, 23 फरवरी 2021। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय “स्ट्रेस मैनेजमेंट” (तनाव प्रबंधन) विषय पर मितानिन ट्रेनरों का संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सोमवार को बेमेतरा जिला मुख्यालय के एक होटल में आयोजित तनाव प्रबंधन कार्यशाला में नवागढ व बेमेतरा ब्लॉक की 54 मितानिन ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य मितानिन ट्रेनरों को तनाव का मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभावों को समझाने और तनाव  से निपटने के लिए पहचान व प्रबंधन पर जानकारी दी गई। बलौदाबाजार जिला अस्पताल से पहुंचे मनोचिकित्सक डॉ. राकेश कुमार प्रेमी ने “स्ट्रेस मैनेजमेंट” पर व्याख्यान की शुरुआत मानसिक तनाव का प्रबंधन कर तनाव से बचने के विभिन्न उपायों के बारे में चर्चा से की। डॉ. प्रेमी ने  तनाव को दूर करने के लिए शाररिक सक्रियता बढाने के लिए खेल-खेल के माध्यम से जानकारियां दी। इसी तरह मोटिवेशनल विडियो स्पीच क्लीप को देखने, सकारात्मक सोच, संगीत, चिकन डांस, गहरी सांस लेना, योगा व प्राणायाम सहित जीवन कौशल विकास पर आधारित जानकारियां दी गई।

बलौदाबाजार की एनसीडी जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुजाता पांडेय ने बताया,  चिकन डांस से ब्रेन को रिलेक्सेशन महसूस होता है। इससे शरीर के अंगों में तरंग व शांत मन अचानक से चहक उठता है। तनाव को लेकर मन में आने वाले नकारात्मक सोच गायब हो जाते हैं। नृत्य को एक विकासवादी उपहार के रूप में देखा जा सकता है जो अपनी संज्ञानात्मक दिशा, भावनात्मक प्रभाव और शारीरिक ऊर्जा के माध्यम से, नृत्य तनाव को रोकने, कम करने और भगाने  का एक साधन है। मस्तिष्क, शरीर और स्वयं को एकीकृत करते हुए, नृत्य को व्यायाम के एक रूप में भी देखा जा सकता है।

डॉ. सुजाता पांडेय ने बताया, तनाव के दो प्रकार अच्छा तनाव (Eustress) व बुरा तनाव (Distress) होते हैं। अच्छा तनाव हमें प्रेरित करता है, ऊर्जा को केंद्रित करता है जो अल्पावधि का होता है। यह रोमांचक लगता है और इससे कार्य बेहतर होते है। जबकि बुरा तनाव चिंता पैदा करने वाला एक नकारात्मक तनाव है जो व्यक्ति की  क्षमताओं को कम करता है जो दीर्घावधि का होता है। और मानसिक और शारीरिक बीमारी को जन्म देता है।

प्रशिक्षक के रुप में स्पर्श क्लीनिक बेमेतरा जिला अस्पताल की मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग ऑफिसर श्रीमति गोपिका जायसवाल ने मितानिन को बताया, मानसिक रोगियों की पहचान कैसे करें एवं साथ ही कार्यक्षेत्र में तनाव को कैसे कम करें। उन्होंने बताया, तनाव प्रबंधन से पहले रोगी की पहचान करना जरुरी पहलू है। तनाव से पीड़ित व्यक्ति में अचानक चिड़चिड़ापन का बढना, जरुरत से ज्यादा बोलना, रहन-सहन में बदलाव, दैनिक दिनचर्या को पूर्ण नहीं करना, मन किसी और तरफ भटकना, परिवार व दोस्तों से अलग-थलग रहना तनाव के प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने बताया मानसिक तनाव के बारे में जैसे ही पता चले इसके प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित मनोरोग चिकित्सक से मरीज का काउंसलिंग कर थोड़ा समझाने की कोशिश करना जरुरी है। मरीज को तनाव से उबारने के लिए फैमली थैरेपी व ग्रुप थैरेपी, म्यूजिक थैरेपी व बातचीत के जरिये समस्या का निराकरण करना है।

कार्यशाला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.के. शर्मा, सिविल सर्जन डॉ. वंदना भेले, जिला एनसीसी नोडल अधिकारी डॉ. दीपक मिरे, डीपीएम अनुपमा तिवारी व सागर शर्मा सहित अन्य स्टाफ भी उपस्थित थे।

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