नगरी डिप्टी रेंजर की शिकायत या साजिश

  1. Yuधमतरी नगरी विशेष संवाददाता अनुराग उपाध्याय
  • छत्तीसगढ़ की Congress सरकार वन अधिकारपट्टे वितरण की तैयारी धान के लफडे़ समाप्त के बाद करने जा रही है लेकिन पट्टे को लेकर धमतरी जिले के सुदूर आदिवासी अंचल नगरी विकासखंड के कुछ गांवों में अपनी राजनैतिक रोटी सेकने के चक्कर में ग्रामीणों ने संबंधित जिले के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक से मिल ” गट्टासिल्ली ” के डिप्टी रेंजर पर कार्यवाही कर जांच की मांग की है तो दूसरी ओर वन विभाग के कर्मचारी इस पूरे मामले पर ” झूठा ” करार देते हुए उन्होंने भी निष्पक्ष जांच की भी मांग ताकि ‘ दूध का दूध और पानी का पानी ” स्पष्ट हो …।
    Congress party की चुनावी घोषणापत्र में ……भूमिहीन कब्जाधारी परिवारों को नियत तिथि -अवधि के भीतर पट्टा प्रदान किया जायेगा और वनों में बसे लोगों को वनाधिकार पट्टा देंगे ,वनोपज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर सामुदायिक अधिकार दिये जायेंगे ,पेसा कानून पूर्णतः लागू होगा ” …..इसी को आधार व तर्ज पर गट्टासिल्ली के आसपास बसे गांव नेगीनाला, आमदी, इंदराखसा, पालारी, इंदराकोट, गप्पागुडरा आदि गांवों के जंगलों में आकर रातों रात kanker जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ” आमाबेड़ा व सेंदुरमेटा ” के लोगो को वन विकास – ग्राम समितियों के नाम आबंटित जमीन – जंगल पर जबरन दो से तीन गांवों के लोगों के कुछ लोगों के दा्रा अपनी राजनैतिक रोटी सेकने बसाया व बिठाया जा रहा है जिससे वहां बसे लोगों ने आक्रोशित हो ‘ उनको ‘ वहां से भगाया और यह मामला सामने आया …कुछ परिवारों के दा्रा हरेभरे वनों को काटकर सरकार से पट्टे की मांग कर रहे हैं पर सच यह है कि इस जंगल की कटाई की राजनीति आमाबेड़ा व सेंदुर मेटा से आकर बसे ” कुछ ” लोगों के दा्रा ही किया जा रहा है जो इसके आड़ में गांव का मुखिया ‘ पटेल – गायता ‘ बन अपनी रोटी सेकना चाहते हैं और इसके पीछे कुछ राजनैतिक लोगों के हाथ होने के संकेत भी मिले हैं पर वन विभाग के आला अधिकारी भी इस ” पट्टे ” की राजनीति की गंध का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इसकी हवा इतनी तेज और खुशबूदार क्यों है ?

क्या है पूरा मामला ……

नगरी विकासखंड के ग्राम – पंचायत आमदी के गप्पागुडरा स्थित वनभूमि में 50 – 60 परिवार कई सालों से रहे हैं और वे खेती कर आजीविका भी चला रहे हैं और इन परिवारों का आरोप है कि 15 oct को गट्टासिल्ली के डिप्टी रेंजर ” कुंदन सलाम ” ने सभी आदिवासीयों को अपशब्द कहते हुए झोपड़ी छोड़ने की चेतावनी दी और मारपीट भी की …
घर में रखी कृषि सामाग्री सहित घर के बर्तन आदि साथ ले गये ….तो इसकी शिकायत नगरी पुलिस थाने में पीडि़त लोगों ने लिखित शिकायत दर्ज कर डिप्टी रेंजर के खिलाफ कार्यवाही व जांच की मांग की पर शिकायत पर कार्यवाही करने होने के कारण फरियादी लोगों ने जिला मुख्यालय पहुंच ” मुखिया ” से मिल पुनः कार्यवाही की बात दुहराई …..।

आखिर सच क्या है …..

वन विभाग का जंगल काटकर पट्टे मांगने का मामले नगरी होते हुए राजधानी तक पहुंच गया है ऐसे संकेत मिले हैं लेकिन Forest के अधिकारी व कर्मचारी भी जो ” जंगलों ” में रहाकर बेशकीमती लकडिय़ों की रक्षा करने के साथ पर्यावरण की भी चिंता कर रहे हैं लेकिन बाहर से आकर जंगलों की कटाई कर वन अधिकार पट्टे की मांग कर ‘ जबरन ‘ झूठी शिकायत कर डिप्टी रेंजर को फंसाया जा रहा है उसके पीछे कि साजिश का भी ‘ पर्दाफाश ‘ होने की आवश्यकता है ताकि अतिक्रमण कर गुडरा के सहारे कब्जा कर पट्टा मांग रहे है उनके दा्रा ना ही वहां खेत बनाया गया है और ना ही मेड बस जबरन अतिक्रमण कर 10 से का़बिज होने का राजनैतिक बहाना बनाकर ‘ किशन लाल कश्यप ‘ पर Fir दर्ज ना होने के कारण ‘ कश्यप ‘ पर मारपीट का आरोप लगाकर शिकायत करना पर सच तो यह है कि संबंधित गांव में वनसमिति सक्रिय हैं और कर्मचारी निरीक्षण में गये थे तो उन्हें बताया गया कि ….आपको झूठे आरोप व शिकायत कर फंसाया जा सकता है आंबटित भूमि के लोगों के दा्रा यह जानकारी ” सूत्रों ” के मुताबिक दी गयी है और यही हुआ पर कुछ और ग्राम में दलालों के माध्यम से पैसो की दुहाई व मांगने पर कुछ राजनीतिक दलों के चेहरे सामने आने के संकेत भी मिले हैं ” !
देखना अब यह है कि इसे लेकर वनविभाग व जांच अधिकारी क्या करते हैं पर ” पट्टे ” को लेकर राजनीतिक दल के अंदर रोटी सेकने का नाम आरंभ हो गया है ।

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