मुफ्तखोरी की योजनाओं से लड़खड़ाते युवा छत्तीसगढ़ को सशक्त बनाने की आवश्यकता

किशोर कर , ब्यूरोचीफ महासमुंद

(विशेष आलेख)
स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़े राज्य के रूप में दर्ज मध्य प्रदेश से अलग होकर बने राज्य छत्तीसगढ़ के युवावस्था में पहुंचने के बाद क्या सचमुच छत्तीसगढ़ विकास के दौड़ मे युवा जोश के साथ सरपट दौड़ लगाने लायक बन पाया है ? यह सवाल छत्तीसगढ़ के जनमानस पर इन दिनों लगातार उभर कर सामने आ रहा है। भारत के मानचित्र पर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां की बहुतायत आबादी खेती किसानी और कृषि मजदूरी कर अपनी आजीविका चलाती है लेकिन राज्य निर्मित होने के 20 साल बाद क्या यहां के किसान मजदूर और खेती किसानी से जुड़े लोग आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो पाए हैं? यह काफी बड़ा सवाल है दरअसल संसाधनों का विकास जिस तरह होना चाहिये था वह आज भी नहीं हो पाया। सिंचाई के मामले में आज भी 20 साल पहले के जो हालात थे वह नजर आ ही जाते हैं ऐसे में 20 साल के युवा छत्तीसगढ़ मैं किसान कैसे आत्मनिर्भर हो पाएंगे?
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ में अधिकांश समय तक भारतीय जनता पार्टी के रमन सिंह की सरकार रही, 15 वर्षों के कार्यकाल में अधोसंरचना विकास पर काफी ध्यान देने की बात उनके द्वारा लगातार कही जाती रही लेकिन ग्रामीण इलाकों का जायजा लेने से ऐसै अधोसंरचना विकास कहीं पर हुआ हो ऐसा बहुत कम नजर आता है, दरअसल आज भी ऐसे इलाके छत्तीसगढ़ में आसानी से देखे जा सकते हैं जहां पहुंचने के लिए लोगों को पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है सड़कों का जो विकास होना था वह दूर दूर तक आज भी नजर नहीं आता है ग्रामीण इलाकों में पेयजल के लिए लोगों को आज भी और तालाब पर आश्रित होने की नौबत कहीं-कहीं पर नजर आती है हालांकि बिजली के क्षेत्र में काफी आपको निर्भरता सामने आई है लेकिन ग्रामीण विकास के नाम पर जिस तरह के कार्य होने थे वह छत्तीसगढ़ में 20 साल बाद भी नहीं हो पाए हैं ऐसे में युवा छत्तीसगढ़ विकास के दौड़ में कैसे कामयाब हो पाएगा यह सवाल छत्तीसगढ़ वासियों के जनमानस के मस्तिष्क पटल पर उभर कर सामने आ रहा है विश्व के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में इन दिनों वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है लेकिन एक ऐसा सवाल यहां पर भी खड़ा होता है जिसका जवाब शायद सत्ता शासन एवं राजनीति से जुड़े लोगों के पास भी नहीं है दरअसल 20 साल बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में जिस तरह की प्रगति होनी थी वह नहीं हो पाई और आज भी गांव देहात में लोगों को चिकित्सा सेवा के लिए दूर-दूर तक सफर तय करना पड़ता है ग्रामीण इलाकों का यदि हम अवलोकन करें तो अस्पताल तो मिल जाते हैं लेकिन न तो वहां किसी तरह की सुविधा विकसित हो पाती है नहीं डॉक्टरों की पदस्थापना रहती है ऐसे हालातों में छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का यहां के लोगों पर क्या असर होता होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होना था किसी भी सरकार ने तैयार नहीं कर पाया। बजट में भले ही इसके लिए प्रावधान किए गए हो लेकिन जमीनी हकीकत दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। ऐसे हालातों में छत्तीसगढ़ की युवावस्था में पहुंचने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं इसकी पहचान बनकर रह गई हैं इसी तरह यदि हम शिक्षा के क्षेत्र की बात करें तो इस दिशा में जरूर उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन आज भी गांव में बसा छत्तीसगढ़ शिक्षा की मुख्यधारा से दूर-दूर तक जुड़ नहीं पाया है ग्रामीण इलाकों में स्कूल तो खोल दिए गए लेकिन स्कूलों की उचित मॉनिटरिंग और बदहाल व्यवस्था शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। छत्तीसगढ़ में इन दिनों कांग्रेस के भूपेश बघेल की सरकार है किसानों की दशा सुधारने के लिए भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार कदम उठा रहे हैं लेकिन इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी यह भविष्य के गर्त में है। दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य की यह नियति बन गई है कि यहां अभी तक जो भी सरकारें आई वे सभी अपने मुफ्तखोरी वाली घोषणाओं से आम छत्तीसगढिय़ा लोगों को निकम्मेपन की ओर ढकेलती गई। रही बात किसानों की तो वह भी अब सरकारी मुफ्तखोरी वाली योजनाओं की ओर टकटकी लगाए देखना शुरु कर चुके हैं। किसानों का एक बड़ा वर्ग आज भी सरकार के नीतिगत फैसलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और आए दिन गाहे-बगाहे अपनी मांगों को लेकर किसान संगठन आंदोलन का रुख भी अख्तियार कर लेते हैं। ऐसे हालातों के बीच 20 साल के युवा छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास और सशक्त छत्तीसगढ़ पर जोर देने की आवश्यकता देखी जा रही है। तभी छत्तीसगढ़ का आमजनमानस विकास की मुख्य धारा से जुडकर छत्तीसगढ़ी अस्मिता को बचाने में कामयाब हो पाएगा।

*मुफ्तखोरी की योजनाओं से लडखडाते युवा छत्तीसगढ़ को सशक्त बनाने की आवश्यकता*

(विशेष आलेख)
स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़े राज्य के रूप में दर्ज मध्य प्रदेश से अलग होकर बने राज्य छत्तीसगढ़ के युवावस्था में पहुंचने के बाद क्या सचमुच छत्तीसगढ़ विकास के दौड़ मे युवा जोश के साथ सरपट दौड़ लगाने लायक बन पाया है ? यह सवाल छत्तीसगढ़ के जनमानस पर इन दिनों लगातार उभर कर सामने आ रहा है। भारत के मानचित्र पर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां की बहुतायत आबादी खेती किसानी और कृषि मजदूरी कर अपनी आजीविका चलाती है लेकिन राज्य निर्मित होने के 20 साल बाद क्या यहां के किसान मजदूर और खेती किसानी से जुड़े लोग आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो पाए हैं? यह काफी बड़ा सवाल है दरअसल संसाधनों का विकास जिस तरह होना चाहिये था वह आज भी नहीं हो पाया। सिंचाई के मामले में आज भी 20 साल पहले के जो हालात थे वह नजर आ ही जाते हैं ऐसे में 20 साल के युवा छत्तीसगढ़ मैं किसान कैसे आत्मनिर्भर हो पाएंगे?
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ में अधिकांश समय तक भारतीय जनता पार्टी के रमन सिंह की सरकार रही, 15 वर्षों के कार्यकाल में अधोसंरचना विकास पर काफी ध्यान देने की बात उनके द्वारा लगातार कही जाती रही लेकिन ग्रामीण इलाकों का जायजा लेने से ऐसै अधोसंरचना विकास कहीं पर हुआ हो ऐसा बहुत कम नजर आता है, दरअसल आज भी ऐसे इलाके छत्तीसगढ़ में आसानी से देखे जा सकते हैं जहां पहुंचने के लिए लोगों को पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है सड़कों का जो विकास होना था वह दूर दूर तक आज भी नजर नहीं आता है ग्रामीण इलाकों में पेयजल के लिए लोगों को आज भी और तालाब पर आश्रित होने की नौबत कहीं-कहीं पर नजर आती है हालांकि बिजली के क्षेत्र में काफी आपको निर्भरता सामने आई है लेकिन ग्रामीण विकास के नाम पर जिस तरह के कार्य होने थे वह छत्तीसगढ़ में 20 साल बाद भी नहीं हो पाए हैं ऐसे में युवा छत्तीसगढ़ विकास के दौड़ में कैसे कामयाब हो पाएगा यह सवाल छत्तीसगढ़ वासियों के जनमानस के मस्तिष्क पटल पर उभर कर सामने आ रहा है विश्व के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में इन दिनों वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है लेकिन एक ऐसा सवाल यहां पर भी खड़ा होता है जिसका जवाब शायद सत्ता शासन एवं राजनीति से जुड़े लोगों के पास भी नहीं है दरअसल 20 साल बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में जिस तरह की प्रगति होनी थी वह नहीं हो पाई और आज भी गांव देहात में लोगों को चिकित्सा सेवा के लिए दूर-दूर तक सफर तय करना पड़ता है ग्रामीण इलाकों का यदि हम अवलोकन करें तो अस्पताल तो मिल जाते हैं लेकिन न तो वहां किसी तरह की सुविधा विकसित हो पाती है नहीं डॉक्टरों की पदस्थापना रहती है ऐसे हालातों में छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का यहां के लोगों पर क्या असर होता होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होना था किसी भी सरकार ने तैयार नहीं कर पाया। बजट में भले ही इसके लिए प्रावधान किए गए हो लेकिन जमीनी हकीकत दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। ऐसे हालातों में छत्तीसगढ़ की युवावस्था में पहुंचने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं इसकी पहचान बनकर रह गई हैं इसी तरह यदि हम शिक्षा के क्षेत्र की बात करें तो इस दिशा में जरूर उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन आज भी गांव में बसा छत्तीसगढ़ शिक्षा की मुख्यधारा से दूर-दूर तक जुड़ नहीं पाया है ग्रामीण इलाकों में स्कूल तो खोल दिए गए लेकिन स्कूलों की उचित मॉनिटरिंग और बदहाल व्यवस्था शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। छत्तीसगढ़ में इन दिनों कांग्रेस के भूपेश बघेल की सरकार है किसानों की दशा सुधारने के लिए भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार कदम उठा रहे हैं लेकिन इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी यह भविष्य के गर्त में है। दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य की यह नियति बन गई है कि यहां अभी तक जो भी सरकारें आई वे सभी अपने मुफ्तखोरी वाली घोषणाओं से आम छत्तीसगढिय़ा लोगों को निकम्मेपन की ओर ढकेलती गई। रही बात किसानों की तो वह भी अब सरकारी मुफ्तखोरी वाली योजनाओं की ओर टकटकी लगाए देखना शुरु कर चुके हैं। किसानों का एक बड़ा वर्ग आज भी सरकार के नीतिगत फैसलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और आए दिन गाहे-बगाहे अपनी मांगों को लेकर किसान संगठन आंदोलन का रुख भी अख्तियार कर लेते हैं। ऐसे हालातों के बीच 20 साल के युवा छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास और सशक्त छत्तीसगढ़ पर जोर देने की आवश्यकता देखी जा रही है। तभी छत्तीसगढ़ का आमजनमानस विकास की मुख्य धारा से जुडकर छत्तीसगढ़ी अस्मिता को बचाने में कामयाब हो पाएगा।

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