मानसिक रोगियों की पहचान करने अब छात्रो औऱ् शिक्षको को प्रशिक्षण

 

दुर्ग, 22 मार्च 2021। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक रोगियों का जीवन बचाने को छात्रों और शिक्षकों को गेटकीपर प्रशिक्षण दिया गया जिसका आयोजन अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग, अंजोरा में किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को मानसिक अस्वस्थता तथा इससे होनेवाले वाला अवसाद, डर, चिंता, घबराहट, एकाकीपन के बारे में जानकारी दी गयी, यही चीज़ें आगे चलकर अवसाद तथा परिणामस्वरूप आत्महत्या का कारण बनतीं हैं। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ आरके खंडेलवाल ने आत्महत्या के विचार व क्षणिक आवेश में उठाए गए कदम के दुष्परिणाम के विषय पर विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी।

 

प्रशिक्षण में मनोवैज्ञानिक चिकित्सक सुमन कुमार ने छात्रों व शिक्षकों को आत्महत्या करने के कारण, इससे बचने के लिए उपाय, इसके प्रबंधन तथा निदान के संबंध में जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षुओं को समुदाय में ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया, जिनके व्यवहार में परिवर्तन आ रहा हो। विचार, स्वाभाव एवम व्यवहार में आमूल-चूल परिवर्तन को भांपने, तथा उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए जानकारी दी गयी। मानसिक समस्याग्रस्त लोगों के रेफरल के लिए प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया गया। छात्र आत्महत्या रोकथाम के लिए एक गेटकीपर की भूमिका किस प्रकार निभा सकते हैं, इसके लिए विस्तार से प्रशिक्षित किया गया।

 

नोडल अधिकारी डॉ आरके खंडेलवाल के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को मनोरोग निदान के लिए जिला चिकित्सालय-दुर्ग स्थित स्पर्श क्लिनिक के विषय में भी जानकारी दी गयी तथा परामर्श के लिए दूरभाष नंबर उपलब्ध करवाया गया।

 

मनोवैज्ञानिक चिकित्सकसुमन कुमार द्वारा प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में होनेवाले तनाव एवं अवसाद के विषय में जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया, “बच्चो और व्यस्कों में भी डिप्रेशन की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। तनाव युक्त जीवन, अत्यधिक महत्वकांक्षी होना इन्हें और बढ़ाता है। डिप्रेशन की शुरुआत के लिए मुख्यतः चालीस वर्ष को मीन ऐज (Age) माना गया है, किंतु यह हर उम्र में हो सकता है। W.H.O. (डब्लू.एच.ओ.) के अनुसार हर 6 महिला में 1 और 8 पुरुषों में 1 (एक) डिप्रेशन का शिकार है।

 

तनाव एवं अवसाद निपटने के लिए टिप्स

डिप्रेशन से लड़ने के लिए जरूरी है कि आप खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाएं। इसमें मेडिटेशन और व्यायाम आपकी बहुत मदद कर सकते हैं। डिप्रेशन से जल्दी बाहर आने का सबसे अच्छा तरीका होता है खुद को वक्त देना। अपने आपको स्पेशल फील कराना। ऐसे काम करना जिनसे आपको खुशी मिलती है। जैसे, म्यूजिक सुनना, गेम्स खेलना, दोस्तों या फैमिली के साथ वक्त बिताना। इन सब कामों से हमारे अंदर पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है।

अगर किसी भी वजह से आपका स्ट्रेस लेवल बढ़ने लगा है तो खुली जगह में जाएं, कोशिश करें कि यह गार्डन या ग्रीनरी से भरा कोई प्लेस हो। गहरी सांस लें और सांस पर फोकस करें। गहरी सांस लेने से ब्रेन में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है और सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से हमारा ब्रेन तनाव देनेवाले मुद्दे से डायवर्ट होता है। इससे हम शांत महसूस करते हैं।

 

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