2 अक्टूबर गांधी जयंती पर वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर शर्मा की बात बेबाक, महात्मा गांधी का सपना उनके जन्म के 150 बरस बाद आज भी सपना बना हुआ है


2 अक्टूबर बोले तो गांधी जयंती राष्ट्रपिता , बापू , महात्मा गांधी का हैप्पी बर्थ डे । मुन्ना भाई एमबीबीएस के बाद गाँधी जी सिर्फ 2 अक्टूबर या काम कराने के एवज में दी जाने वाली रिश्वत के वक्त याद आते है कि गुलाबी गांधी ने मेरा काम आसानी से करवाया । वैसे गांधी जी का नाम सामने आते ही स्वच्छता , गांधी टोपी और पंचायती राज के जरिये दुबकी पड़ी राम राज की परिकल्पना भी दिमाग के किसी कोने से अचानक बाहर आ जाती है । पंचायती राज गांधी का स्वप्न था जिसे वे साकार होता देखना चाहते थे । गांधी के इस सपने और ग्रामीण विकास में जनता की भागीदारी के मद्देनजर मेहता समिति द्वारा मध्यप्रदेश के समय पंचायती राज का गठन किया गया था । छत्तीसगढ़ गठन के बाद पंचायती राज में कुछ परिवर्तन भी देखने को मिले, पर दशको गुजरने के बाद भी पंचायतो की बदहाली और भ्रष्टाचार के चलते गांधी का सपना उनके जन्म के 150 बरस बाद आज भी सपना बना हुआ है । पंचायतों की बदहाली के लिये महज पंच, सरपंच, सचिव ही जिम्मेदार नही अपितु त्रिस्तरीय व्यवस्था से जुड़े सभी बराबर जिम्मेदार हैं । पंचायतों के फंड पर नजरे गड़ाए बैठे नेता , अफसर , इंजीनियर से लेकर बाबू तक के लिए पंचायते दुधारू गाय बनी हुई है । कुछ इसे भीड़ जुटाऊ संस्था मानने लगे है । भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोने 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के बाद सरपंच प्रतिनिधि (ग्रामीणों की आम भाषा में एस पी ) के रूप में एक और हिस्सेदार भी सम्मिलित हो गया , जिन्हें जनादेश की नहीं अपितु धनादेश की चिंता ज्यादा रहती है । जनादेश और धनादेश के बीच फंसे पंचायती राज के बीच गांधी टोपी भुलाई नही जा सकती । गांधीजी ने भले ही कभी टोपी नहीं पहनी मगर आज एक-दो को नहीं पूरे देश को उन्होंने टोपी पहना दी और उस पर भी जलवा ये कि टोपी भी कहलाई तो पूरे जोर-शोर से गांधी टोपी । सौ टका सच तो यह भी है कि जिन्हें टोपी पहनाने का शौक होता है वो टोपी नहीं पहना करते। टोपी पहनाने वाले ऐसे सूरमा अच्छे-अच्छों को टोपी पहना दिया करते हैं । आज कल टोपी आप के पास , झाड़ू मोदी के पास और भीड़ मुफ्तखोर बनाती योजनाओं के आस पास दिखाई पड़ती है ।
वैसे देखा जाय तो गांधी का जितना फायदा बीते सात दशको में कांग्रेस नही उठा पाई उससे कई गुना ज्यादा तो मोदी ने गाँधी के चश्मे से उठा लिया है । मोदी ने स्वच्छता के जरिये गांधी की सफाई की परिकल्पना को जीवित रखा है ! ये बात अलग है कि बनारस की सड़कों पर रैली में टनों गुलाब की पंखुड़ियों रौंदने वाले मोदी अमेरिका में एक गिरे हुए गुलाब को उठा स्वच्छता का संदेश दुनिया को देते दिख जाते है , अब राजनीति की दुकानदारी चमकाने कुछ नौटंकी भी तो जरूरी है ।
राजनीति के मंच में जब जब गांधी गांधी की पुकार होती है तब तब गोडसे का जिन्न भी बाहर निकल आता है और फिर जिंदाबाद मुर्दाबाद की भक्ति चालू हो जाती है । यहां भक्त कहना उचित नही होगा चमचा कहना ही ठीक होगा तो चमचे अपनी अपनी चमचागिरीनुसार कोई गांधी , कोई गोडसे जिंदाबाद ,अमर रहे या मुर्दाबाद के नारे लगाते सोसल मीडिया पर गंदगी फैलाते दिख जाएंगे । सत्ता सुख भोग रहीं पापी आत्माएं गांधी नाम के सहारे राजनीति की वैतरिणी पार करने की कोशिश में लगे रहते हैं । इसी कवायद में जिंदाबाद मुर्दाबाद का नारा बुलंद रखने अपने पीछे आवारा चमचों की भीड़ तैनात रखते है । गांधी की जरूरत किसी राजनीतिक दल को नही है वो तो बस अपने फायदे के लिए इसका उपयोग कर रहे है । आज राजनीति हो या समाज गांधी कड़कड़ाते नोट पर ही अच्छे लगते है ।
नशामुक्ति का सपना संजोए गांधी के भारत मे आज शराब बंदी के दावे वादों से सरकार तो बन जाती है फिर यही शराब सरकारों के लिए सबसे बड़ा आय का साधन और मुनाफाखोरी का धंधा बन जाती । गांधी से इतना ही प्रेम होता तो शराब, तम्बाकू , सिगरेट पर पाबंदी कब की लगाई जा चुकी होती ।
देखा जाय तो गांधी सत्ता के लुटेरों के कभी रहे नहीं वो तो जनसामान्य के आप के हमारे रहे है । उन्होंने जनता को भूखा देखा तो भूखे रहे, लोगो को नंगा देखा तो वस्त्र त्याग दिया, आपको गुलाम देखा तो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सत्ता से जा भिड़े और जीवन भर लड़े । अगर आप भी गांधी को अपना मानते हैं तो आप बचाइए गांधी को , उनकी नशामुक्ति के सपने को , रामराज की कल्पना को वरना राजनीति तो अहिंसा के दूत की जयंती के ​बहाने भी गांधी पर गोलियां के समर्थन और विरोध में बोलियां और गालियाँ दाग ही रही हैं ।
और अंत मे :-
चीखें मारते फिरते हैं ,
गूंगे शहर में अंधे लोग।
सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे ,
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे ।। जय_हो
चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015

#जय_हो  1 अक्टूबर 2021 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *