कांग्रेस की राजनीति में विकास का कद बढ़ने से विरोधी सक्रिय

 

विकास उपध्याय VIKAS UPADHYAY कांग्रेस CONGRESS की राजनीति में उभरता एक ऐसा नाम जिसने बहुत कम समय में कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व में अपना स्थान बना लिया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से पश्चिम विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे विकास उपध्याय ने भाजपा के दिग्गत मंत्री राजेश मूणत को हराकर अपना स्थान बनाया है। हलांकि विकास के साथ संघर्षो की गाथा जुड़ी हुई है। एनएसयूआई में छात्र राजनीति से कांग्रेस में आए विकास उपाध्याय इससे पहले एक विधानसभा चुनाव हार चुके थे। लेकिन पांच साल बाद उस विधानसभा में दिग्गज भाजपा के मंत्री राजेश मूणत को हराकर विकास ने कांग्रेस का परचम लहाराया था।छत्तीसगढ़ सरकार में संसदीय सचिव व रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक विकास उपाध्याय एआईसीसी सेक्रेटरी बनाए गए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राज्यों के प्रभारियों की नई सूची जारी की है। जिसमें छत्तीसगढ़ से विधायक विकास उपाध्याय को असम राज्य का प्रभारी सचिव बनाया गया है।

 

 

 

 

जोगी JOGI सरकार में कांग्रेस के एक अलग गुट में विकास उपाध्याय नजर आते थे. जिसका लाभ उन्हें राज्य मेंCONGRESS कांग्रेस की जोगी खेमे के बाहर होने का मिलता रहा। अपने ही पार्टी में खेमेबाजी और गुटबाजी में विकास उपाध्याय हमेशा किनारे नजर आए लेकिन शैने शैने उसने अपनी ताकत बढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ा। सहयोगत्मक भावना के काऱण विकास हमेशा युवाओ से छात्रो से घिरे रहे जबकि वह कांग्रेस के दिग्ग नेताओ के गुटबाजी का भी शिकार होते रहे।

लॉक डाउन में कोरोना मरीजो और अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ियों की मदद करने के लिए VIKAS UPADHYAY विकास उपाध्याय सबसे आगे रहे यहीं कारण है कि कांग्रेस सरकार में उनका एक अलग ही स्थान रहा है। संसदीय सचिव बना दिए जाने के बाद विकास का कद और भी बढ़ गया। वही कांग्रेस हाई कामन ने जब इस युवा नेता पर असम का जिम्मा सौपा तो उसका कद रातो रात एक दम बढ़ गया। कांग्रेस CONGRESS की राजनीति में विकास उपध्याय का नाम अब अन्य राज्यों में भी आने लगा। बहारहाल विकास उपध्याय के दिन बदलते ही उनके विरोधियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं कांग्रेस के अन्दर ही विकास का विरोध शुरू हो गया है। हलांकि विकास उपध्याय अपने छात्र राजनीत से ही विरोध का सामना करते नजर आ रहे हैं। उनके लिए यह बात नई नही है। माना तो ये भी जाता है कि विकास पहला चुनाव भी नहीं हराते अगर उनके साथ पार्टी के लोग ही भीतरघात नहीं करते। इस बात कीचर्चा हमेशा गरमाई रहती है। कि VIKAS UPADHYAY विकास उपाध्याय पांच साल पहले ही पश्चिम विधानसभा में जीत का झंडा लहरा देते लेकिन कांग्रेस में भीतरघात हुआ और विकास बहुत कम मतो से पारजित हुए थे। विकास उपाध्याय और विरोध,विवाद एक ही सिक्के के दो पहलू है। वहीं विकास उपाध्याय मिलनसार छबि के कारण अक्सर विवादो से बाहर होने में कोई विलंब नहीं करता है। प्रदेश में छात्र राजनिति से कांग्रेस में आए बहुत से नेता है। जिनके तारे कभी गर्दिश में तो कभी बुलंदी में रहे है। लेकिन विकास उपाध्याय उन सब को पीछे छोड़ते हुए कांग्रेसCONGRESS पार्टी हाईकमान की पसंद बनने में कोई कसर नहीं छोड़ता ऐसा पहली बार नहीं  हुआ है। भाजपा शासन में विरोध प्रदर्शन और पुलिस के डंडे खाने में भी विकास उपाध्याय ने कोई कसर नहीं छोड़ी लिहाजा विकास उपाध्याय अपनी लकीर बड़ी करने में लगे रहे। कांग्रेस की राजनीति के जानकारो की माने तो विकास उपाध्याय पार्टी की हिन्दू विरोधी छाबि को भी दूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ते उन्हें समय समय पर भगवा कपड़ो में भी देखा जा सकता है। राम मंदिर निर्माण मामले में कोर्ट के फैसले के साथ ही कांग्रेस भी देश भर में सक्रिय होकर कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा को राम मंदिर का श्रेय लेने से रोक रही थी। ऐसे मौके पर VIKAS UPADHYAY विकास उपाध्याय राम भक्त बनकर सामने आए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  bhupesh baghel के साथ एक विज्ञापन भी जारी किया था। जिसमें राम मंदिर का सपना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का साकार हुआ नारा लिखा था। इसी तरह विकास उपाध्याय सामने आते रहते हैं। VIKAS UPADHYAY विकास उपाध्याय कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व के काफी करीब माने जा सकते हैं। उसके साथ ही उनके विरोधी भी सक्रिय हो गए है। विकास उपाध्याय की सहजता सरलता का आप अनुमान आसानी से लग सकते हैं। जिसके लिए आप उनका ये विडियो देख सकते हैं।

 

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