शांतिपूर्ण जन लामबंदी से देंगे किसानों पर दमन का जवाब, सर्वोच्च राजनैतिक स्तर पर हो वार्ता : किसान सभा

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों पर संघी-मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे दमनकारी, अमानवीय व असम्मानजनक हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस दमन का जवाब शांतिपूर्ण जन लामबंदी के जरिये दिया जाएगा। किसान सभा ने कहा है कि किसानों द्वारा दिल्ली की नाकेबंदी तब तक जारी रखी जायेगी, जब तक कि सर्वोच्च राजनैतिक स्तर पर इसका समाधान नहीं निकाला जाता। किसान सभा ने कॉर्पोरेटपरस्त कृषि विरोधी कानून और बिजली कानून तुरंत निरस्त करने की मांग की है।

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न किसान संगठनों और उनके साझे मोर्चे में फूट डालने के लिए तिकड़मबाजी कर रही है, लेकिन किसानों की चट्टानी एकता ने सरकार के इन मंसूबों को ध्वस्त कर दिया है। लाखों किसान टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर जमे हुए हैं, जिन्होंने बुराड़ी जाने के बजाए राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करके दिल्ली की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। किसानों की यह कार्यवाही सरकार द्वारा उन्हें दिल्ली जाने से रोकने के क्रम में उन पर हुए लाठी चार्ज, आंसू गैस के गोले दागने, सड़क खोदने, पानी की बौछार मारने और दिल्ली के छः स्टेडियमों को जेल बनाने के जवाब के रूप में सामने आई है। मोदी सरकार के इस दमनकारी रवैये से किसानों का अब इस सरकार पर कोई भरोसा नहीं रह गया है।

उन्होंने कहा कि अलोकतांत्रिक ढंग से संसद द्वारा पारित इन कानूनों की कोई वैधता आम जनता के लिए नहीं हैं, इसलिए मोदी सरकार इन कृषि विरोधी कानूनों का लाभ गिनाने के बजाए इन्हें निरस्त करें और सर्वोच्च राजनैतिक स्तर पर किसान संगठनों से वार्ता करके इसका हल निकाले और सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का कानून बनाये। उन्होंने गोदी मीडिया द्वारा किसानों के खिलाफ दुष्प्रचार किये जाने और उन्हें राष्ट्र विरोधी, पाकपरस्त, खालिस्तानी आतंकवादी आदि-इत्यादि कहे जाने की भी कड़ी निंदा की है।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार द्वारा बनाये गए कृषिविरोधी कानूनों के खिलाफ दिल्ली में आहूत रैली को रोके जाने पर पिछले पांच दिनों से पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के लाखों किसानों ने दिल्ली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन धरना दे रखा है। इनके पक्ष में पूरे देश के किसान आंदोलित हैं। माकपा सहित सभी वामपंथी पार्टियों और कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों का उनके आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।

किसान सभा नेताओं ने बताया है कि छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के घटक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के बाद प्रदेश में भी एकजुटता आंदोलन के कार्यक्रम की कल घोषणा की जाएगी। उन्होंने सभी किसान पक्षधर और कारपोरेट विरोधी ताकतों से इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की।

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