जशपुर में डायवर्सन अनापत्ति के लिये नगर निवेश का चक्कर लगाने लोग मजबुर,दूसरी ओर नव गठित भूपेश सरकार का दावा डायवर्सन प्रणाली का किया गया सरलीकरण

नव गठित सरकार कहती है कि डायवर्सन प्रणाली का किया गया सरलीकरण

नगर निवेश के चहेते आर्किटेक से नक्शा बनवाने किया जाता है मजबूर

सम्बन्ध अच्छा हो तो नान अधिकृत आर्किटेक के नक्शे पर भी हो जाता है काम

पत्थलगांव-/ एक तरफ नव गठित सरकार ने कुछ माह पहले फरमान जारी किया था कि भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया को सरल किया गया है किंतु यहा जशपुर जिले के नगर निवेश कार्यालय में लोगो की फाइल महीनों महीनों से घुम रही है और लोग नगर निवेश कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर है, कुछ तो ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने नगर निवेश के द्वारा बार बार कोई ना कोई कमी निकाल देना, कभी साहब का नही मिलना तो कभी बाबु का नही रहना और जब दोनो रहे तो कोई ना कोई कमी निकाल कर दुसरा नक्शा बनवा कर लाओ नही तो फला से बनवा लो कह कर लौटा देने से कुछ ऐसे लोग भी है जो अब नगर निवेश जाना ही छोड़ दिये हैं।

कार्यालय से चलती है दलाली प्रथा

डायवर्सन के लिये जब आवेदक नगर निवेश का चक्कर लगा लगा कर थक जाता है तब वही से शुरू हो जाता है दलाली का काम और बकायदा उन्हें अपने चहेते आर्किटेक के पास दुसरा नक्शा बनवाने भेज दिया जाता है और आवेदक को उनके चहेते आर्किटेक को देना पड़ता मार्केट रेट से दोगुना राशि जिसमे विभाग के दलाल नुमा बैठे बाबुओं की भी दलाली की राशी होती है कि चर्चा यहा पर जोरो से है,यहा ऐसे भी लोग मीले जिनमे सालों से ऊपर हो गया है उन्हें डायवर्सन के लिये चक्कर लगाते। क्योकि वे उनके चहेते आर्किटेक द्वारा बनाये जाने वाली नक्शा फीस की रकम देने व बार बार जशपुर जाने में असमर्थ हो गये।

एक बाबु द्वारा पैसा लेते वीडियो भी हो चुका है वायरल

गत कुछ माह पुर्व नगर निवेश कार्यालय जशपुर में पदस्थ एक बाबु के द्वारा आवेदक से पैसा लेते हुए की वीडियो भी वायरल हुवा था जिससे विभाग की खुब किरकिरी हुई थी, बताया जाता है कि वह बाबु आज भी वही पदस्थ है।

लोगो से मिल रही जानकारी के अनुसार यहा तक तो ठीक है कि जो आर्किटेक जिले के किसी भी नगरीय निकाय में अपना रजिस्ट्रेशन नही कराया है यानी जो अधिकृत नही है उक्त आर्किटेक के द्वारा बनाया गया नक्शा, ब्लू प्रिंट को अस्वीकार किया जाता है तो यह समझ मे आता है, किन्तु जो आर्किटेक जिले के नगरीय निकाय में रजिस्टर्ड है अधिकृत है जिनका नक्शा, ब्लू प्रिंट पर पूर्व में जांच कार्यवाही कर एक नही एक से अधिक अनापत्ति प्रमाण पत्र दी चुकी है तो अब ऐसा क्या हो गया कि नये आवेदक द्वारा ऐसे अधिकृत आर्किटेक से निर्मित नक्शा को भी अब कुछ ना कुछ कमी बता कर उन आवेदकों से अपने चहेते आर्किटेक से पुनः नक्शा बनवाया जाना क्या नगर निवेश प्रशासन जशपुर के भरष्ट रवैये को नही दर्शाता है। बताया जाता है कि आज यही कारण है कि पत्थलगांव क्षेत्र के लोगो सिर्फ नक्शा बनवाने के लिये काफी रकम खर्च कर जिला मुख्यालय आना जाना पड़ता है ।

पत्थलगांव में जमकर हो रही यह चर्चा

“” डायवर्सन कराना है तो इधर उधर से नक्शा मत बनवाओ सीधे नगर निवेश जाओ वो जहा से बोले वहा से नक्शा बनवाओ चाहे पैसा अधिक लग जाये वर्ना नगर निवेश का चक्कर लगाते रह जाओ,,,,

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार नगर निवेश जशपुर में दलाली प्रथा से लेकर बार बार कार्यालय का चक्कर लगाने एवं अन्य खर्च को सुनकर ऐसा लगता है जो व्यक्ति सीधा सज्जन और सिद्धांत वादी होगा वह भूमि डायवर्सन कराना ही भुल जाएगा।अब यहा लोगो के जुबान से नगर निवेश जशपुर का हाल सुनकर यह बोलना पड़ रहा है कि नव गठित सरकार की वह नीति कहा है जहा यह कहा गया था कि डायवर्सन प्रक्रिया को हमारी सरकार सरल करने जा रही है, किन्तु यहा तो कोई सरल प्रक्रिया नही दिखाई देती।

कल जबसे जशपुर के एक तसिलदार महोदय एंटी करप्शन ब्युरो के हत्थे चढ़ गये तब से पत्थलगांव में नगर निवेश जशपुर की चर्चा जम कर चल रही है।एक आदिवासी महिला ने तो अपना नाम ना छापने की शर्त पर यहा तक कहा कि नगर निवेश कार्यालय में मुझसे स्पश्ट कहा गया कि जहा से हम बोल रहे है वहा से नक्शा बनवा लो नही तो चक्कर काटते रह जाओगे जिस कारण मार्केट रेट के बदले मुझे नक्शा का दो गुना रुपये देना पड़ा।

वर्षो से पदस्थ कर्मचारियों की बोलती है तूती
लोगो की माने तो नगर निवेश कार्यालय जशपुर में कुछ कर्मचारी पिछले कई वर्षो से तत्कालीन सत्ता पक्ष के नेताओ से सम्बन्ध होने के कारण जमे हुवे है जिन्हें नियमानुसार समय समय पर स्थानांतरण किया जाता रहना चाहिये जैसा कि कलेक्टर श्री कावरे ने वर्तमान में कुछ विभागों के बाबुओं को ईधर से उधर स्थानांतरित किया है।

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