प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन्मदिन विशेष,विश्व के सबसे अधिक जनसमर्थन वाले प्रधानमंत्री, महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि गुजरात के लाल, नरेंद्र मोदी के दर्शन और कर्तव्यपरायणता महात्मा गांधी के निकट

लेखक प्रभात झा

(भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद )

विश्व के सबसे अधिक जनसमर्थन वाले प्रधानमंत्री, महात्मा गांधी और सरदार पटेल की
भूमि गुजरात के लाल, नरेंद्र मोदी के दर्शन और कर्तव्यपरायणता महात्मा गांधी के निकट है।
गांधीजी द्वारा प्रतिपादित मानवता, समानता और समावेशी विकास के सिद्धांतों पर चलकर
उन्होंने भारत के अबतक के सबसे जनप्रिय प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया है। जन सेवा
और राष्ट्र धर्म का उन्होंने अनुपालन कर जो आदर्श स्थापित किया है, एक सुनहरे भारत का
निर्माण तो करेगा ही विश्व के लिए कल्याणकारी होगा। नव भारत और आत्मनिर्भर भारत के
सपनों को लेकर एक श्रेष्ठ और समर्थ भारत के निर्माण को संकल्पित व समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी आज 70 वर्ष के हो गए। 17 सितम्बर 1950 को दामोदरदास मोदी और हीराबा के घर
जन्मे नरेंद्र मोदी का बचपन राष्ट्र सेवा की एक ऐसी विनम्र शुरुआत है, जो यात्रा अध्ययन और
आध्यात्मिकता के जीवंत केंद्र गुजरात के मेहसाणा जिले के वड़नगर की गलियों से शुरू होती है।
17 वर्ष की आयु में सामान्यतः बच्चे अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी के
लिए यह अवस्था पूर्णत: अलग थी। उस आयु में उन्होंने एक असाधारण निर्णय लिया। उन्होंने
घर छोड़ने और देश भर में भ्रमण करने का निर्णय कर लिया। स्वामी विवेकानंद की भांति
उन्होंने भारत के विशाल भू-भाग में यात्राएं कीं और देश के विभिन्न भागों की विभिन्न
संस्कृतियों को अनुभव किया। यह उनके लिए आध्यात्मिक जागृति का समय था और देश के
जन-जन की समस्यायों से अवगत होने का भी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक होते हुए
उन्हें संगठन कौशल और जन सेवा तथा राष्ट्र धर्म के महत्व को समझने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 12
वर्षों में गुजरात में हुए अभूतपूर्व एवं समग्र विकास के आधार पर न केवल भारतीय जनता
पार्टी, यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार और नीतिगत पंगुता से त्रस्त पूरे देश ने नरेंद्र मोदी को
प्रधानमंत्री के एकमात्र विकल्प के रूप में स्वीकार्यता दिलाई। 26 मई 2014 को उनके नेतृत्व में
पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला और वे देश के 15वें
प्रधानमंत्री बने। 'सबका साथ, सबका विकास' और 'एक भारत श्रेष्ठ' के मूलमंत्र से उन्होंने देश
का जो अभूतपूर्व सर्वांगीण विकास किया, इससे उन्होंने जन-जन के ह्रदय में अपनी जगह बनाई।
जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से 2019 के आम चुनाव में उन्हें ऐतिहासिक समर्थन मिला और
30 मई 2019 को दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजादी के बाद
हुआ है। ऊर्जावान, समर्पित एवं दृढ़ निश्चयी नरेन्द्र मोदी प्रत्येक भारतीय की आकांक्षाओं और
आशाओं के द्योतक हैं। नव भारत के निर्माण की नींव रखने वाले नरेन्द्र मोदी करोड़ों भारतीयों
की उम्मीदों का चेहरा हैं। 26 मई 2014 से, जबसे उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला है, देश
को विकास उस शिखर पर ले जाने के लिए अग्रसर हैं, जहां हर देशवासी अपनी आशाओं और
आकांक्षाओं को पूरा कर सके। पंडित दीन दयाल उपाध्याय के दर्शन से प्रेरणा लेकर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी देश के अंतिम पायदान पर खड़े एक-एक व्यक्ति के पूर्ण विकास को 24/7 समर्पित हैं।
आज 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 70 वर्ष के हो गए।
एक प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की अंतर्दृष्टि, संवेदना, कर्मठता, राष्ट्रदर्शन व
सामाजिक सरोकार स्वतंत्र भारत के अबतक के इतिहास में अद्वितीय है। उनकी विचारशैली
और उनकी कर्तव्यपरायणता अतुलनीय है। वे केवल जनप्रिय नहीं है, वे जन-जन के प्रिय हैं।
उनका चिंतन राष्ट्र चिंतन है बन गया। मई 2014 से लेकर आज सितंबर 2020 के छह साल
साढ़े तीन महीने के अपने रिकॉर्ड प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में उन्होंने जन सेवा और राष्ट्र धर्म के
जो आदर्श स्थापित किये हैं, भारतीय राष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए अनुकरणीय है। 14 अप्रैल
को उन्होंने कोरोना वायरस को लेकर राष्ट्र को संबोधित करते हुए यजुर्वेद के एक श्लोक का
उल्लेख किया था -'वयं राष्ट्रे जागृत्य', अर्थात हम सभी अपने राष्ट्र को शाश्वत और जागृत रखेंगे।
आज यह पूरे राष्ट्र का,जन-जीवन का संकल्प बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिक
और राष्ट्र के प्रति सेवा धर्म का जो कर्तव्यपथ तैयार किया है, सम्पूर्ण भारत का उनको साथ है।
लेकिन यह राह कम चुनौतयों से भरा नहीं रहा है। व्यक्तिगत जीवन हो या राजनीतिक जीवन,
पूर्व के सभी प्रधानमंत्रियों की तुलना में इनका जीवन अधिक कठिनाईयों भरा रहा है। लेकिन
नरेंद्र मोदी हर परीक्षा में शत-प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होते रहे हैं। आज कोरोना महामारी
में अपेक्षाकृत कम चिकित्सा सुविधा होने के बावजूद नरेंद्र के नेतृत्व में भारत विश्व में कहीं
बेहतर ढंग से इस महामारी से लड़ रहा है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जब पीएम केयर्स
फंड की स्थापना की गई थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआती फंड के तहत 2.25 लाख
रुपये का योगदान दिया। पीएम केयर्स फंड में जमा राशि से भारत आज प्रभावी रूप से विश्व में
सबसे बेहतर तरीके से कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है। पीएम केयर्स फंड का उपयोग कोरोना से
और भविष्य में इस प्रकार की गंभीर चुनौतियों का शीघ्रता और तत्परता से निपटने के लिए
चिकित्सीय ढांचागत सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। भारत का यह सशक्त होता

सामर्थ्य, नरेंद्र मोदी की जन और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पणतथा उनके नेतृत्व में जन आस्था का
परिणाम है।
प्रधानमंत्री के रूप में विश्व में त्याग और मानवता के अनुपम उदाहरण हैं नरेंद्र
मोदी। मानवता और राष्ट्र की सेवा में अबतक 103 करोड़ रुपये अपने व्यक्तिगत फंड से दान कर
चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मिले सभी उपहारों की नीलामी कर मिले
89.96 करोड़ रुपये को कन्या केलवनी फंड, 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने से
पहले अपने निजी बचत के 21 लाख रूपये गुजरात सरकार के कर्मचारियों की बेटियों की पढ़ाई
के लिए, 2015 में मिले उपहारों की नीलामी से जुटाए गए 8.35 करोड़ रुपये नमामि गंगे
मिशन को , 2019 में कुंभ मेले में निजी बचत से 21 लाख रुपये स्वच्छता कर्मचारियों के
कल्याण के लिए बनाए गए फंड को, 2019 में ही साउथ कोरिया में सियोल पीस प्राइज़ में
मिली 1.3 करोड़ की राशि को स्वच्छ गंगा मिशन को, हाल ही में अपने कार्यकाल के दौरान
उनको मिली स्मृति चिन्हों की नीलामी में 3.40 करोड़ रुपये एकत्र किए गए राशि को भी
नमामि गंगे मिशन को उन्होंने दिए। वहीं पीएम केयर्स फंड के लिए 2.25 लाख रुपये दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा ' की भावना से समाज और सेवा कर
रहे हैं।

5 अगस्त को भारतीय जन आस्था के केंद्र और राष्ट्र की सांस्कृतिक नगरी अयोध्या में
भगवान् श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन के अवसर पर पधारे प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने कहा 'राम काज किन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम'। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का
संदेश, हमारी हजारों सालों की परंपरा का संदेश, कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुंचे, कैसे हमारे
ज्ञान, हमारी जीवन-दृष्टि से विश्व परिचित हो, ये हम सबकी, हमारी वर्तमान और भावी
पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्रीराम के नाम की तरह ही अयोध्या में
बनने वाला ये भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा, और वहां
निर्मित होने वाला राममंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के सबसे परिवर्तनकारी नेतृत्व हैं। उनके नेतृत्व
में, भारत ने सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन देखा, जिसमें भारतीय जनता पार्टी का उदय सत्ताधारी
दल के रूप में एक नई राजनीतिक सोच तथा शैली के रूप में हुआ, जिसने कांग्रेस की छह दशकों
की श्रेष्ठता को अप्रासंगिक बना दिया। नरेंद्र मोदी के परिवर्तनकारी एवं प्रभावी नेतृत्व में आधुनिक, डिजिटल, भ्रष्टाचार-मुक्त, जवाबदेह और विश्वसनीय सरकार का आविर्भाव हुआ है
तथा जनता को भी अभूतपूर्व रूप से भागीदार बना दिया है। जहां अप्रासंगिक पुरातन
प्रणालियों और नियमों को समाप्त कर दिया गया है, वहीं सैकड़ों योजनाओं और अभियानों के
माध्यम से एक नए भारत का निर्माण हो रहा है। 'सबके साथ' और 'सबके विश्वास' से 'सबका
विकास' हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न केवल राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, बल्कि एक कविहृदय
साहित्यकार भी हैं। अपने व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने दर्जनभर पुस्तकें लिखी हैं।
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजराती भाषा में 67 कविताएं लिखी थीं। उनकी इन कविताओं के
माध्यम से उनके दर्शन,उनके विचार और उनकी दृष्टि का सहजता के साथ अंदाजा लगाया जा
सकता है। उनका हिन्दी में एक कविता संग्रह है 'साक्षी भाव' जिसमें जगतजननी मां से संवाद
रूप में व्यक्त उनके मनोभावों का संकलन है, जिसमें उनकी अंतर्दृष्टि, संवेदना, कर्मठता,
राष्ट्रदर्शन व सामाजिक सरोकार के स्पष्ट दर्शन होते हैं। उनकी श्रेष्ठतम रचनाओं में शामिल है
'पुष्पांजलि ज्योतिपुंज' जिसमें उन्होंने लिखा है कि संसार में उन्हीं मनुष्यों का जन्म धन्य है, जो
परोपकार और सेवा के लिए अपने जीवन का कुछ भाग अथवा संपूर्ण जीवन समर्पित कर पाते
हैं। इस पुस्तक में उन्होंने व्यक्ति के जन्म से लेकर उसकी समाज के प्रति दायित्व का बोध कराया
है, तथा राष्ट्र सर्वोपरि को जीवन का मूलमंत्र माननेवाले ऐसे ही तपस्वी मनीषियों का पुण्य-
स्मरण भी किया है। 'सोशल हॉर्मोनी' नामक पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज और
सामाजिक समरसता के प्रति भावनाओं के प्रबल प्रवाह को शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया है।
इस पुस्तक में उनकी समाज के प्रति अद्वितीय दृष्टि और दृष्टिकोण की स्पष्टता है। जहां वे 'एग्जाम
वॉरियर्स' नामक अपने पुस्तक में अपने बचपन के कई उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को परीक्षा
के तनाव से निकलने की युक्ति बताते हैं, वहीं 'कनवीनिएंट एक्शन' में जलवायु परिवर्तन की
चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और समाज को सचेत करते हैं और साथ ही
इससे निपटने के लिए वैश्विक अभियान में शामिल होने की प्रेरणा भी देते हैं। अद्भुत हैं हमारे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की के नेतृत्व में
राजनीति और सत्ता से परे जो मानव दृष्टि है, वैश्विक दृष्टि है, उनकी विश्व नेतृत्व की क्षमता का
दर्शन कराता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक दर्शन का मूलमंत्र अंत्योदय है। प्रत्येक निर्णय के
केंद्र में वंचित, गरीब, मजदूर, किसान हैं। जन-जन की चिंता है। 'अन्नदाता सुखी भवः' की
सर्वोच्च प्राथमिकता है। भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी, नीति आधारित प्रशासन की संकल्पना है। शीघ्र

निर्णय का मूल सिद्धांत है। प्रत्येक परिवार को पक्का घर मिले। चौबीस घंटे बिजली मिले। स्वच्छ
पीने का पानी मिले। गांव-गांव सड़क, इंटरनेट हो। सबका पोषण, सबको उत्तम स्वास्थ्य मिले।
सबको शिक्षा मिले। सबको रोजगार मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग्य और निर्णायक नेतृत्व
में कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से किबिथू तक 'एक राष्ट्र, एक कर', 'एक राष्ट्र, एक
राशन कार्ड' और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का सपना साकार हो रहा है। मेक इन इंडिया,
डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, फिट इंडिया, स्वच्छ इंडिया, टीम इंडिया के सामूहिक प्रयत्नों
से न्यू इंडिया का निर्माण हो रहा है। जन सेवा के साथ-साथ 'राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं
व्रतम्, राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च' का संकल्प है। लेकिन उनके लिए मानवता और
विश्व बंधुत्व का स्थान सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

का नेतृत्व मानवता के कल्याण के
लिए है, भारतीय राष्ट्र के कल्याण के लिए है, विश्व के कल्याण के लिए है। नरेंद्र मोदी आप और
अधिक यशस्वी बनें, दीर्घाऊ हों, शताऊ हों !

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