बहुजन समाज के कर्मठ सिपाही एडवोकेट रामकृष्ण जांगड़े अब हमारे बीच नहीं रहे

रायपुर, 25 मार्च 2021। छत्तीसगढ़ के सपुत बहुजन समाज के महान चिन्तक मान्वयर कांशीराम साहब के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले बहुजन समाज के कर्मठ सिपाही एडवोकेट रामकृष्ण जांगड़े अब हमारे बीच नहीं रहे। देश के सभी सामाजिक नेताओं से सामाजिक उत्थान की बातें करने वाले दिन रात सर्व समाज को समता व बंधुत्व के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने वाले योद्धा नायक की आज रायपुर एम्स से दोपहर 12 बजे मौत की खबर आई। ऐसे महान सपूत को जिसका मार्गदर्शन और साथ सदैव मिलता रहे अचानक कोरोना बीमारी की वजह से गम्भीर होने से हम सब को अलविदा कर चले गए। आज शाम को टाटीबंध चौक से हीरापुर की ओर जाने वाले मार्ग के तालाब से लगे शमशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। एक अप्रेल 1965 को बलौदाबाजार जिले के बिलाईगढ से लगे एक छोटे से ग्राम कोसमकुंडा में एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ था। वे बचपन से प्रतिभावन थे। रायपुर में पेंशनबाड़ा छात्रावास में पढाई के दौरान वे बहुजन मिशन से जुड़े फिर इस मिशन के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहें।

बहुजन समाज को प्रेरणा देने वाले जुझारु क्रांतिवीर जो बचपन से बहुजन आंदोलन में समर्पित रहें। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान वर्ष 1986 से 1996 तक भोपाल कार्यालय के प्रभारी रहें। दसवी कक्षा की पढाई के बाद मिशन के लिए अपना सब कुछ छोड़ घर से निकल गए। बसपा के फांउडर मेंबर रहे इंजीनियर टीआर खुंटे ने सोशल मिडिया में शोक व्यक्त करते हुए लिखा ….रामकृष्ण जांगड़े मेरा अत्यंत करीबी और न केवल अनुशासित प्रशिक्षित कैडर अपितु छत्तीसगढ़ में एक महान सामाजिक बुद्धिजीवी चिंतक कार्यकर्ता रहे हैं। आज जितना भी बातें कही जाए व इनके बारे में लिखा जाय वो कम होगा  … बस हमने अपना एक अंग खो दिया है… उन्होंने समाज को जगाने का जो बीड़ा उठाया था… उस अधूरे सपने को नयी पीढ़ी याद कर आगे बढ़ाएगा… इस दुखद घड़ी पर इनके परिवार के सभी सदस्यों को इस अपार क्षति से उत्पन्न अपार पीड़ा सहने की कामना करता हूँ … विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित है…।

विनम्र आदरांजलि के साथ बसपा के पूर्व अध्यक्ष रहे सीनियर लीडर दाऊराम रत्नाकर ने कहा कि इस असमय दुखद समाचार से हमारे मिशन के सभी साथी भी हतप्रभ हैं। हमारे बीच योद्धा नायक, शोषित, पीड़ित, उपेक्षित और पिछड़ों के हक के लिए संघर्षशील अग्रणी साथी रामकृष्ण जांगड़े जी
आज हमारे बीच नहीं रहे। इस दुख की घड़ी में हम सभी माननीय जांगड़े जी के परिवार के साथ हैं ।
श्री रत्नाकर ने अपनी अश्रुपूरित आदरांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रामकृष्ण के साथ उनका पारिवारिक संबंध रहा हैं । इस तरह से असामयिक चले जाना बहुजन मिशन के लिए अपूरणीय क्षति है। बहुजन समाज को जगाने में उनका योगदान सराहनीय रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता रघुनंदन साहू ने कहा कि रामकृष्ण जांगड़े एक सच्चे बहुजन के सिपाही थे। वे दिन रात समाज की चिंता में लगे रहते थे। उनकी पहचान देशभर में बड़े आंदोलनकारी व प्लानर भी थे। उन्होंने बहुजन समाज को एकजुट करने के लिए एससी,एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के संयोजक के रुप में डेढ दशक से सक्रिय रहे हैं।

आदिवासी सत्ता के संपादक के.आर.शाह लिखते हैं.. छत्तीसगढ़ महतारी के सामाजिक य़ोद्धा,जाबांज सपूत, सुलझे हुए विचारक व चिँतनशील व्यक्तित्व के धनी हमारे सुख दुख के साथी मान. श्री रामकृष्ण जाँगडे जी का आकस्मिक निधन एम्स रायपुर में हो गया है। उनका असमय हमारे बीच से जाना छत्तीसगढ़ सामाजिक क्रांति की गँभीर क्षति है। आदिवासी सत्ता में विशेष सँपादकीय के द्वारा उन्हें याद रखा जायेगा।
मैं व्यक्तिगत व आदिवासी सत्ता परिवार की ओर से श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।…

उनके निधन पर सर्व समाज सहित कई सामाजिक संगठनों के द्वारा  श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया गया।
सतलोक वासी रामकृष्ण जांगड़े जी को श्रद्धांजलि।*
कवि *”सचेत”दुर्ग से लिखते हैं

नहीं कहीं तुम गये मान्यवर,
जा भी कैसे सकते हो।
हमें मुक्त किए बिन मुक्ति,
पा भी कैसे सकते हो।।

मान नहीं सकता मैं हरगिज़,
कि दुनिया में रहे नहीं तुम,
केवल भौतिक तन छोंड़े हो,
मगर चेतना में हो यहीं तुम।।

लाखों लौह कणों को छूकर,
स्वर्ण बनाने वाले पारस,
कालजयी तुम अमर रहोगे,
रहित ना होगा तुमसे अंतस।।

व्यक्ति नहीं थे,तुम विचार थे,
संघ शक्ति के ठोस प्रतीक।
तुम पीपल की सघन छाॅव थे,
सबको रखते अपने नज़दीक।।

सतनाम के गुरु मंत्र को,
जपा नहीं,जीया है तुमने।
जइत खाम के श्रेष्ठ ज्ञान का,
अमृत रस पीया है तुमने।।

देख रहा हूं पास हमारे,
अब भी तुम मुस्कुरा रहे हो।
बांह पकड़कर उठा रहे तुम
उंगली पकड़ कर चला रहे हो।।

लक्ष अधूरा हम सबका है,
यह तो तुम भी जान रहे हो।
सूक्ष्म रुप में होगा पूरा
शायद ऐसा मान रहे हो।।

तभी आज तुम नई भूमिका
नया डगर स्वीकारा है।
अब होगा उद्धार मनुज का,
उदित हुआ नभ तारा है।।

नमन तुम्हे शत बार करुं मैं,
भाव सुमन स्वीकार करो।
वरद हस्त हमें मिले आपका,
डगमग नैय्या पार करो।।
……..///—–

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