वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र शेखर शर्मा की बात बेबाक,कानून के हाथ लंबे होते है ये डायलाग फिल्मों में ही अच्छे लगते है हकीकत में तो कानून के हाथ हैसियत और ओहदा देख कर छोटे बड़े होते है

 

कानून के हाथ लंबे होते है ये डायलाग फिल्मों में ही अच्छे लगते है हकीकत में तो कानून के हाथ हैसियत और ओहदा देख कर छोटे बड़े होते है या राजनैतिक हस्तक्षेप से , वरना पाताल से भी आरोपी को पकड़ के ले आने का दम्भ भरने वाली खाकी के लंबे हाथ बलात्कर की घटना के 2 साल 8 महीने बाद भी आरोपी के गिरेबान तक क्यों नही पहुंच पा रहे , जबकि इस दौरान जिले में 3 एसपी , 3 एडिशनल एसपी , 1महिला डिप्टी एसपी 1, एसडीओपी , 2 टीआई (जिसमे से एक टीआई स्वयं महिला है ) जिले में आये और चले गए।
कबीरधाम जिले के पांडातराई थाना क्षेत्रान्तर्गत वर्ष 2018 में बलात्कार की घटना घटित हुई थी । बलात्कर पीड़िता द्वारा 7 मार्च 2018 को पांडातराई थाना में आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 36/18 के तहत मामला दर्ज करा कराया था । जिस पर पुलिस ने आरोपी आशीष गुप्ता के खिलाफ धारा 376, 506 भादवि के तहत कार्यवाही फाइलों में कर तो दी परन्तु कुछ पुलिस कर्मियों के कथित मिलीभगत से आरोपी भागने में सफल हुआ और आज तक आरोपी कबीरधाम पुलिस को मुंह चिढ़ाते फरारी काट रहा है हांलाकि पुलिस विभाग ने अपने नियमानुसार इश्तिहार जारी कर कर्तव्यों से इतिश्री पा ली अब हाथरस प्रकरण में फैले उन्माद के चलते आरोपी पर इनाम घोषित करने की तैयारी भी है ।
बहरहाल हाथरस , बलरामपुर मामले को राजनीतिक चश्मे से देख धरना देने , पुतला दहन करने , मोमबत्ती जलाने वालों की कोई कमी इस जिले में नही है । समाज के ऐसे ढोंगी खद्दरधारियो और समाज सेवियों को जिले की बालात्कार पीड़िता की पीड़ा दिखाई नही पड़ना घटिया राजनीति और समाजसेवा की ओर इशारा करता है । पूछता है कबीरधाम हाथरस , बलरामपुर की बेटी के लिए न्याय मांगने वाले कब पांडातराई क्षेत्र की बेटी के लिए न्याय मांगेंगे ।
कबीरधाम जिले के दमदार मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्वाचन जिला , पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का गृह जिला , महिला विधायक ममता चंद्राकर का निर्वाचन क्षेत्र होने के बावजूद जिले की बेटी के गुनहगार आरोपी आशीष गुप्ता को 2 साल 8 महीने बाद भी खाकी गिरफ्तार नही कर पाई जो अनुसन्धान का विषय है ।
इन दिनों कबीरधाम के साथ साथ सारा देश हाथरस और बलरामपुर में बलात्कर की घटनाओं से आक्रोशित है । नेता राजनीति की दुकान सजाए बैठे है । टीवी चैनल टीआरपी की दौड़ में भाग रहे है । पीड़िता को न्याय दिलाने नेताओ की भीड़ और चैनलों का डेरा भी जात और हालात देख कर डलता है । चमचे और भक्त भी अपने अपने आकाओं की बुद्धिनुसार पुतलादहन , श्रद्धांजलि देने जुट आकाओं को खुश करने भिड़े रहते है भले ही खुद के गाँव , कस्बे या जिले की बेटी इंसाफ के लिए भटक रही हो , गांव घर की बेटी बहु को इंसाफ दिलाने किसी के पास वक्त नही । भाई हाथरस और बलरामपुर के लिए बहाए जा रहे घड़ियाली आंसू से फुरसत मिल गई हो तो कबीरधाम की बिटिया को भी न्याय दिलाने पुतला वुतला जला लेते , भूख हड़ताल कर लेते , धरना प्रदर्शन कर लेते , बलात्कारी को फांसी पर चढ़ाने की मांग ही कर लेते । मेरी बकबक और बड़बड़ सुन गोबरहीन टुरी कहती है महाराज नेता काबर अइसन करही पीड़िता कोनो दलित थोड़ी हावय , कोनो हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई वाले चश्मा घलो नही मिलत होही अभी हमर यंहा कोनो चुनाव घलो नही हावय अउ नेता मन बिन लाभ हानि के कोनो काम नही करय इंहा लाभ नही दिखत होही त न मोमबत्ती हे , न धरना हे , न पुतला जलय , न फांसी के मांग।
और अंत मे :-
मुफ्त में ठलहा मिल जाया करूँ वो राय थोड़ी हूँ ,
हर शख्स को पसन्द आ जाऊं वो चाय थोड़ी हूँ ।
#जय_हो 17 अक्टूबर 2020 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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