Thursday, January 26

आरएसएस का आरोप : नफरत के जरिये लोगों को जोड़ना चाहती है कांग्रेस

रायपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सोमवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह नफरत के जरिए लोगों को जोड़ना चाहती है. इसके साथ ही उसने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी की पिछली पीढ़ियों के मन में भी संघ के लिए प्रति घृणा थी.
आरएसएस के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जाहिरा तौर पर जिक्र करते हुए इसे ऐसी “राजनीतिक नौटंकी” बताया जो जनता को एकजुट करने के अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी.

वैद्य ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के समापन के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी को इस संगठन से नफरत है और उसने इसके विकास को रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद भी समाज के समर्थन से संगठन का विस्तार हुआ. कांग्रेस ने सोमवार को खाकी निक्कर में आग लगी होने की एक तस्वीर ट्वीट की. उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले तक खाकी निक्कर आरएसएस का ‘ड्रेसकोड’ हुआ करता था.

कांग्रेस ने खाकी निक्कर में आग लगी होने की तस्वीर साझा करने के साथ ही लिखा, ‘‘नफरत की बेड़ियों से देश को मुक्त कराना है और भाजपा-आरएसएस द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करना है. एक-एक कदम करके हम अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे.’’ कांग्रेस के ट्वीट के बारे में पूछे जाने पर वैद्य ने कहा, ‘‘अगर कोई भारत के लोगों को जोड़ने का काम करता है तो यह अच्छी बात है, लेकिन आप लोगों को कैसे जोड़ते हैं – नफरत से या प्यार से? भारत की आध्यात्मिक पहचान विश्व में हिंदुत्व कहलाती है. हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है… अगर कोई लोगों को सही मायने में जोड़ने वाले तत्व की पहचान कर देश को एक करने की कोशिश करता है तो उसका स्वागत है.”

उन्होंने कहा, “अगर आप नफरत के जरिए लोगों को एकजुट करने की कोशिश करेंगे तो यह एक राजनीतिक नौटंकी की तरह होगा और लोगों को जोड़ने का उद्देश्य पूरा नहीं करेगा.” उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के विचार से जुड़ने वाले लोगों की संख्या ‘बढ़ रही’ है. वैद्य ने कहा, ‘‘क्या आप (कांग्रेस) लोगों को नफरत से जोड़ना चाहते हैं? लंबे समय से उनके मन में हमारे लिए नफरत है. उनकी पिछली पीढ़ियों (बाप-दादा) ने भी संघ को अपमानित किया और संघ को रोकने की भरसक कोशिश की और दो बार प्रतिबंध लगाए. लेकिन संघ बढ़ता रहा क्योंकि हमारे सिद्धांत सच्चे हैं. सर्मिपत स्वयंसेवकों और समाज के समर्थन से संघ बढ़ता रहा.’’

उन्होंने कहा, “यह (खाकी निक्कर में आग लगी होने की तस्वीर संबंधी ट्वीट) भी उनकी नफरत को ही दर्शाता है. मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता.” वैद्य ने समन्वय बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय आर्थिक मॉडल के साथ आत्मनिर्भर भारत के लिए पहलों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के अमृत महोत्सव (75 वर्ष) के अवसर पर आरएसएस से प्रेरित सभी संगठनों ने चर्चा की कि आत्मनिर्भरता के मुद्दे को कैसे आगे बढ़ाया जाए.

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के कामकाज में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. संघ के विस्तार के संबंध में उन्होंने कहा कि बहुत सारे युवाओं ने उसकी वेबसाइट के जरिए संगठन में शामिल होने के प्रति रुचि दिखाई है. उन्होंने कहा कि 2017 से 2021 के बीच 1.25 लाख से अधिक आॅनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे, जबकि इस वर्ष (2022) के पहले आठ महीनों में लगभग 90,000 युवाओं ने आरएसएस से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की.

आरएसएस की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा सहित अन्य नेता शामिल हुए. कुल मिलाकर 36 संगठनों और आरएसएस से प्रेरित विभिन्न संगठनों के 240 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया.

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