Friday, July 19

RTI मांगी जा सकती है सरकारी आदमी की सर्विस,संपत्ति की जानकारी 0 वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव

 

किसी सरकारी कार्यालय में आप जाते हैं तो आमतौर पर आपके काम के लिये उस कार्यालय के कर्मचारी आपको बिना वजह घुमाते रहते हैं।

पर्याप्त रिश्वत ले लेने के बावजूद वे आपके साथ प्रताड़ना का व्यवहार करते हैं। पर्याप्त घूस, अपमान और समय ले लेने के बाद आपका काम होता है।

इसके अलावा यदि आपका किसी से किसी बात को लेकर विवाद है और आप न्याय की लड़ाई लड़ रहे हो तो भी आपको इसी तरह प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा आपका विरोधी यदि प्रभावशाली रहा तो पूरा कार्यालय उसकी चिरौरी करने मंे संलग्न रहता है।

आपको तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है। आपको ठोकरें खाने के लिये मजबूर किया जाता है।
कार्यालय में आपका माखौल उड़ाया जाता है। आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा दिया जाता है और बहुत ही बेशर्मी से आपके साथ अन्याय किया जाता है। सिर्फ इसलिये कि सामने वाले से पैसे मिल रहे हैं।

आहत बुजुर्ग ने की गोली मार देने की इच्छा

तहसील आॅफिस में एक बुजुर्ग के चेहरे पर झुंझुलाहट देखी। उसने अपने साथ आए युवक से झल्लाकर कहा साले को गोली मार देनी चाहिये।

पता चला कि किसी छोटे से काम के लिये पैसे ले लेने के बावजूद उसका काम एक साईन के लिये तीन माह से अटका हुआ था जिसके लिये वो चार बार आ चुका था। अभी भी इंतजार कर रहा था। जिस बाबू ने पैसे लिये थे उसने बैठने कोे कहा था।

ऐसी स्थिति मे आमतौर पर ऐसा लग सकता है कि साले को गोली मार दूं। पर अपने यहां का माहौल ऐसा नहीं है और अपनी मानसिकता वैसी नहीं है अन्यथा सरकारी लोग रोज़ ठुकें।
लेकिन आप अपने न्याय की लड़ाई कुछ इस तरह जीत सकते हैं कि अंधेर मचाने वाले अधिकारियों की बैण्ड बजा सकते हैं।

अधिकारी को न्याय करने को मजबूर कर सकते हैं।

अधिकारी की पूरी जानकारी मांगें
आप ऐसा करें कि अधिकारी का पुराना रिकाॅर्ड निकलवाएं। सरकारी आदमी ने कब सर्विस ज्वाईन की। पूरा नाम, पदनाम, पदस्थापना की तिथि, जब-जब जहां पर रहे उस तबादले की पूरी जानकारी, संपत्ति की पूरी जानकारी आदि सूचना के अधिकार के अंतर्गत संबंधित विभाग के जनसूचना अधिकारी से मांग दस रूप्ये की रसीद लगाकर मांग सकते हैं। ये आपका अधिकार है।

अधिकारी देने से मना नहीं कर सकता
मोदीजी भी सफाई चाहते हैं

ध्यान दें कि जब आप ये सब जानकारी मांगेंगे तो सामने वाला अधिकारी यह कहकर जानकारी देने से मना कर देता है कि व्यक्तिगत जानकारी देने से अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के अंतर्गत छूट दी गयी है।

यहां ये समझ लें कि ऐसा तर्क देने पर राज्य सूचना आयोग ने इसे अमान्य कर दिया और अपने फैसले में उच्चतम् न्यायालय के एक आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसूचना अधिकारी से चाही गयी जानकारी इस धारा के अंतर्गत व्यक्तिगत की परिभाषा में नहीं आती। अतः जानकारी दी जानी चाहिये।

आम आदमी को चाहिये कि कमर कस ले और अपने उपर अन्याय करने वाले हर सरकारी आदमी की जानकारी एकत्र करे और उसकी पाप की कमाई को उजागर करे। मजेदार बात यह है कि जानकारी न देने के लिये जनसूचना अधिकारी पर आयोग ने 25 हजार रूप्ये यानि अधिकतम् जुर्माना भी आरोपित किया।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक (लेखक प्रदेश के वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता है)
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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