संकट में भाजपा की ढाल शिव सेना ,अहसानो से दबी भाजपा और मोदी

  • इस जंगल के हम तीन शेर                                 बलबीर सिंह भारज (सम्पादक)
    शेरों को पता था बिकेंगे तो सर्कस (भा ज पा ) में होंगे। सभी जानते है की शेरों ने कभी गीदड़ों से समझौता नहीं किया ,बाला साहेब के शेरों ने पुरे देश को बता दिया की वे आज भी अपनी वंशावली के अनुरूप ही पूरी गर्जना के साथ आगे बढ़ रहे हैं । महाराष्ट्र के उत्थान की राह में सर्कस के तमाशबीन बनने की बजाय शेर ने हाथ में घड़ी बांधने का फैसला लिया और एलान किया की जनता के जनादेश का आदर होगा वक़्त हमारा है, इस जंगल के हम तीन हैं शेर ।विदित हो कि भाजपा के हर आड़े वक़्त में शिवसेना ने ढ़ाल बन हिंदुत्व की रक्षा में अपना सीना आगे किया फिर चाहे वो मामला विवादित बाबरी ढांचा गिराने का रहा हो गोधरा कांड के बाद मोदी को हटाने का रहा हो या फिर धारा 370 हटाने के समर्थन का रहा हो । बावजूद इसके भाजपा ने शिवसेना को उचित सम्मान नहीं दिया , महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी दोनों ने गठबंधन में लड़ा पर जीत के बाद अपने फायदे को सर्वोपरी रखते हुए भाजपा ने एक बार फिर शिवसेना को उनकी मर्जी के अनुरूप सम्मान न देने की मंशा दिखाई जिसके विरुद्ध बाला साहेब का खून उबल पड़ा और उद्धवजी ने पूरी गर्जना के साथ इसका विरोध कर कांग्रेस और राकपा से हाथ मिला जता दिया की शिवसेना में अभी भी वंशावली के अनरूप दम – ख़म जिन्दा है।

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