वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर शर्मा की बात बेबाक,    कवर्धा भगवा के अपमान मामले में पुलिसिया लापरवाही का कांड देख प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ‘शतरंज के खिलाड़ी’ की कथा याद आ गई जिसमें अवध के नवाब शतरंज में और

       बात बेबाक चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015

कवर्धा भगवा के अपमान मामले में पुलिसिया लापरवाही का कांड देख प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ‘शतरंज के खिलाड़ी’ की कथा याद आ गई जिसमें अवध के नवाब शतरंज में और जनता मुर्गे लड़ाने में व्यस्त रही और इस बीच अंग्रेजों ने सारे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

ऐसा ही कुछ चाल चरित्र और चेहरा इन दिनों कवर्धा में देखने को मिल रहा है । राजनीति के माहिर खिलाड़ी अकबर का निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण भाजपा कांग्रेस में खींच तान चल रही है । मिशन 2024 को लेकर राजनीति की बिसात पर मोहरे फिट किये जा रहे है । जनता मुर्गा लड़ाई के दर्शक के भांति भाजपा , बीएचपी और कांग्रेस की कुकुर बिलाई वाली लड़ाई देख चुनाव में दारू मुर्गा के सपने देखने में मस्त है । इस बीच भगवा के अपमान को लेकर अचानक 108 फिट झंडा फहराने की मांग को लेकर एक धार्मिक न्यास का मैदान में कूदना चर्चा का विषय बन गया है। दुर्गेश की पिटाई और पुलिसिया लापरवाही के कोख से जन्मे भगवाकाण्ड में जेल गए भाजपाई और विभिन्न हिन्दू संगठनों के साथ साथ ग्रामीण और 108 फीट के भगवा ध्वज फहराने का श्रेय ले बैठी न्यास एंड कंपनी ।

अकबर के राज में भगवा के अपमान को मुद्दा बना कर भुनाने में भिड़ी पार्टियों के पैरों तले जमीन न्यास ने खिसका दी । मामले को शांत करने शासन प्रशासन ने भी आनन फानन में ध्वज के लिए भूमि आबंटन भी कर दी इन सबके बीच सवाल उठता है कि भगवा अपमान में घुसी राजनीतिक मामले में धर्मिक संगठनों का कूदना कहा तक उचित है ? यदि भगवा का अपमान धार्मिक मामला है ,भगवे के सम्मान में न्यास एंड कंपनी मैंदान में है , फिर सालों पहले वर्ष 1946 में वर्तमान गांधी मैदान में पधारे शंकराचार्य स्वामी ब्रह्ममानंद सरस्वती महराज जी के प्रवचन स्थल जिस पर  तत्कालीन राजा धर्मराज सिंह जी ने चबूतरे का निर्माण कराया था जो अब शराब खोरी और गुटखा पाउच थूकने का अड्डा बन चुका है । पवित्र चबूतरे के अपमान पर अब तक धर्म प्रेमी , धर्म रक्षक संगठनो के साथ साथ न्यास एंड कम्पनी  कैसे और क्यो शांत बैठे है जबकि इस स्थल पर कीर्ति स्तम्भ निर्माण की घोषणा सालों पहले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी की भागवत कथा के समय बड़े जोश खरोश के साथ की गई थी सालों गुजर जाने के बाद भी कीर्ति स्तम्भ के लिए भूमि की मांग आज पर्यंत तक नही हो पाई जो समझ से परे है ।

और अंत में :-

रात के लम्हात, ख़ूनी दास्ताँ लिखते रहे ।

सुबह के अख़बार में ,हालात बेहतर हो गए ।।     

#जय_हो 1 दिसम्बर 2021 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *