आदर्श गोठान में फलोद्यान से स्व-सहायता समूहों को मिला रोजगार का अवसर

ऋतु दुल्हानी
जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना (नरवा,घुरवा,गरूवा, बाड़ी) से ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहो को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सुराजी योजना अंतग्र्रत बस्तर जिले के आदर्श गोठान ढोढरेपाल में तीन स्व-सहायता समूहो के द्वारा 8 एकड़ क्षेत्रफल में फल एवं सब्जी की खेती की जा रही है। फलोद्यान रोपण ढोढरेपाल गोठान के विजय लक्ष्मी स्व-सहायता समूह के द्वारा 2 एकड़ रकबा में बहुवर्षीय फलोद्यान का रोपण किया गया है। इसके अंतर्गत आम ग्राफ्टेड 68 पौधे, अमरूद 84 पौधों, सीताफल (मधुर) 51 पौधे तथा ड्रेगनफ्रूट (पिंक एवं व्हाईट) 68 पौधें कुल 271 पौधों का रोपण किया गया है। इसके अतिरिक्त अंतवर्तीय फसल के रूप में संकर पपीता किस्म अमीना के 25 सौ पौधे लगाये गए हैं।
इसके साथ ही 0.50 एकड़ खाली क्षेत्रफल में सब्जी उत्पादन लालभाजी, प्याज, मैथी, मूली, भिण्डी, लौकी तथा करेला आदि की फसले लगाई गई है। जिससे इस समूह को फलोद्यान के साथ-साथ सब्जी उत्पादन से 2-3 महीने के अंतराल में आय प्राप्त होना शुरू हो जाएगी। पपीता के रोपित 25 सौ पौधों से इस समूह को 8-10 महीने में औसतन 30 किलो प्रति पौधे मान से 75 हजार किलोग्राम उत्पादन प्राप्त होगा तथा 10 रूपए प्रति किलोग्राम के मान से 7.50 लाख समूह को प्राप्त होना संभावित है इसके साथ ही सब्जी उत्पादन से लगभग 35-50 हजार आय प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त बहुवर्षीय रोपित फलोद्यान से 2-3 वर्ष पश्चात फलो के विक्रय से अतिरिक्त लाभ प्राप्त होगा। उपरोक्त 2 एकड़ में रोपित फलोद्यान से समूह को औसतन रूपए 8-10 लाख की आय प्राप्त होना संभावित है। समूह में 11 सदस्य है, प्रति वर्ष रूपए 70 से 80 हजार प्रति सदस्य की आमदनी प्राप्त होना संभावित है।
गोठान के 3 एकड़ क्षेत्रफल में गुलाब स्व-सहायता समूह द्वारा सब्जी की खेती (टमाटर, पत्तागोभी, मिर्च, लौकी, करेला तथा गेंदा) की जा रही है। 3 एकड़ क्षेत्रफल से लगभग 350 से 400 क्विंटल सब्जियों का उत्पादन प्राप्त होना संभावित है एवं 8 रूपए प्रति किलो की दर से सब्जी विक्रय से 3 से 3.20 लाख की आय समूह को प्राप्त होना संभावित हैं, अतएव वर्ष में दोबारा सब्जी की फसल उत्पादित कर प्रतिवर्ष 6 से 7 लाख रूपए इस समूह को आय प्राप्त होगी। समूह में 10 सदस्य है इस प्रकार प्रति सदस्य 60 से 70 हजार रूपए की आय प्रतिवर्ष अर्जित करेगा।
ढोढरेपाल गोठान में 2 एकड़ क्षेत्रफल में केला तथा मुनगा पौधों का रोपण सोना स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। केला फसल में बीच में अंतवर्तीय फसल के रूप में धनिया, मूली, पालक आदि फसले भी लगाई गई है। इसके साथ ही 0.50 एकड़ खाली जमीन पर इसी समूह द्वारा सब्जी की खेती (लौकी, तोराई, करेला, भिण्डी) लगाई गई है। केला जी-9 के दो हजार रोपित पौधों से प्रति पौधा 25 किलोग्राम के मान से 50 हजार किलोग्राम केला का उत्पादन प्राप्त होगा। जिसे 10 रूपए प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय करने पर 5 लाख की आय इस समूह को प्राप्त होना संभावित है। इसके अतिरिक्त अंतरवर्तीय फसल एवं एक एकड़ सब्जियों के उत्पादन से प्रतिवर्ष 1.50 से 2 लाख आय की प्राप्त होगी एतएवं इस समूह को 6.50-7 लाख की आय प्राप्त होना संभावित है। सोना समूह के कुल 10 सदस्य है प्रति सदस्य को प्रतिवर्ष रूपए 60-70 हजार की आय संभावित है।
ढोढरेपाल गोठान में कार्यरत तीनों समूहों को इस वर्ष किए जा रहे उद्यानिकी के समन्वित खेती की तरह कार्य करने पर प्रतिवर्ष 18 से 20 लाख की आय संभावित है। तीनों समूहों के कुल 30 सदस्यों को प्रतिवर्ष प्रति सदस्य औसतन 70-80 की नियमित आय प्राप्त होगी।

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