वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र शेखर शर्मा की बात बेबाक, ” इन्ही लोगो ने ले लिनी कुर्सी मेरी , चलो दिलदार चलो दिल्ली दरबार चलो “

चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015
कवर्धा – छत्तीसगढ़ में ढाई साला सीएम के शिगूफे के बीच चल रही कुर्सीदौड़ देख अनायास ही फ़िल्म पाकीजा का मशहूर गाना ” इन्ही लोगो ने ले लीना दुपट्टा मेरा ” बाबा की हालात देख याद आ गया । सीएम की दौड़ में शामिल रहे कका के सपने तो पूरे हो गए किंतु सरगुजिहा राजा उर्फ बाबा के साथ साथ चरणदास व ताम्रध्वज के सपने चूर चूर हो गए थे । ढाई साल के शिगूफे के बीच अति बहुमत से बनी सरकार की गाड़ी शांति से भाग रही थी किंतु ढाई साल गुजरते ही कका की गाड़ी हिचकोले खाने लगी । सीएम की कुर्सी को ले राजनीति में पावर गेम का खेल चलने लगा है ।
कुर्सी दौड़ को नकारते नकारते खद्दरधारी ” चलो दिलदार चलो दिल्ली दरबार चलो ” गाते बजाते दिल्ली तक हांफते हफाते दौड़ लगा रहे है । जिधर बम उधर हम की राजनीति के चलते कुछ चतुर चालाक की पौ बारह होने लगी है , मतलब परस्त सेटिंगबाज़ इस्तीफा इस्तीफा का शिगूफा छेड़े पड़े है । सोशल मीडिया में बाबा तो बाबा लोग लखमा तक को सीएम बनाये बैठे है ।
ढाई ढाई साल की खबरों को मीडिया की उपज बता धमकाने वाले खद्दरधारी इन दिनों मंत्री , विधायक , महापौर और निगम मंडल कमंडल के अध्यक्षो के साथ आलाकमान की चौखट में नाक रगड़ रहे । आकाओं को खुश करने कुर्सी दौड़ में मुंडी गिनाने की परंपरा का निर्वहन बड़े ही ईमानदारी से कर आये भले ही पुनिया की फटकार की हवा उड़ती रही । भाई जब ढाई साल की बात केवल शिगूफा है आलाकमान ने ऐसी कोई बात कही नही है तो फिर 4 दर्जन से ज्यादा विधायको की दिल्ली दरबार की चौखट तक मत्था टिकाने की आपाधापी क्यों ? वैसे राजनीति के जानकार कहते है कि राजनीति में जो कहा जाता है वो करा नही जाता है और जो करा जाता है वो कहा नही जाता । राजनीति में ना कोई स्थायी दोस्त होता है ना ही स्थाई दुश्मन है , समय और राजनीतिक लाभ हानि के हिसाब से गुना भाग चलता है । सुबह की दोस्ती दोपहर आते तक दुश्मनी में बदल जाती है और शाम ढलते ढलते तक मतलब के हिसाब से पुनः दोस्ती भी हो जाती है । ये राजनीति है भाई साहब यहां सब कुछ चलता रहता है । कांग्रेसी राजनीति में टांग खिंचाई और महत्वाकांक्षा का खेल कोई नया नही है । इससे मध्यप्रदेश , पंजाब और राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ भी नही बच पाया । छत्तीसगढ़ में 15 साल के वनवास के बाद अति बहुमत से सत्ता में आई कांग्रेस बाबा , कका और आलाकमान के आनिर्णय की स्थितियों में उलझी पड़ी है ।
जय और बीरू की जोड़ी और ढाई साला सीएम को ले कर चल रही दौड़भाग में फिलहाल तो हिचकोले खाती कका की गाड़ी खान साहब की ड्रायवरी और पंडित की कंडक्टरी के भरोसे दिल्ली दरबार तक मुंडी गिना भले ही आ गये हो किंतु सत्ता की मलाई वाली कुर्सी तक पहुंचने के बीच बस्तर का स्टॉपेज आया है । बस्तर स्टॉपेज आने पर प्रदेश में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त है । पार्टी नेतृत्व पंजाब , राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ में चल रही खीचतान को सम्हाल पाने में अक्षम साबित तो नही हो रहा आलाकमान की निर्णय लेने में देरी का प्रभाव आने वाले चुनावो मे भी देखने को मिल सकता है । नेतृत्व के असफल होने और मामले को सम्हाल नही पाने के कारण अब मामला दिल्ली दरबार से वापस बस्तर पहुंच गया है । इस घटना क्रम में कितनी सच्चाई है ये तो नेता और उनका नेतृत्व जाने । बहरहाल मुद्दाविहीन भाजपाई कांग्रेस की अंतर्कलह पर टकटकी लगाए है कि कब इनके भाग का छींका फुट जाय । इन सबके बीज रेणु जोगी का दिल्ली दौरा और कांग्रेस आलाकमान की रुचि जरूर छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए नए संकेत ला रही है । बहरहाल खान साहब और पंडित की जोड़ी कका की हिचकोले खाती गाड़ी को मंजिल तक पहुंचाने हनुमान की भूमिका में है।
और अंत में :-
बरसात आ गई तो दरकने लगी जमींन ,
सूखा मचा रही है ये बारिश तो देखिए ।
#जय_हो 30 अगस्त 2021 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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