कोरोना की लड़ाई में सबकी सहभागिता जरूरी (विशेष तेजबहादुर सिंह भुवाल)

कोरोना की लड़ाई में सबकी सहभागिता जरूरी
यह कहना आसान होता है कि जो चला गया, उसे अपने दिलों में बसा कर यादों के सहारे अपनी जिन्दगी की गाड़ी आगे बढ़ाते चलो। लेकिन इससे बहुत कष्ट होता है, दुःख होता है। पर मौत तो एक दिन सब को आनी है आज अपनी तो कल तुम्हारी बारी है। मौत पर जोर किसी का चलता नहीं, चाहे वह राजा हो या रंक। जिन्दगीं और मौत सिर्फ ऊपर वाले के हाथ होती है। परन्तु समय पूर्व किसी की मृत्यु हो जाए तो घर, घर नहीं रहता, परिवार, परिवार नहीं रहता। परिवार के किसी सदस्य का मन नहीं लगता। कुछ दिन ऐसे की चलता रहता है, फिर सब सामान्य हो जाता है। यही जिन्दगी है दोस्तों। दुःख एवं सुख सभी के साथ आता-जाता है। किसी का पहले किसी का बाद में। इन कठिनाइओं से डगमगाना मत। यह तो अंगडाई है आगे और लड़ाई है। मनुष्य जीवन में हर समय समस्या, रूकावट, परेशानी, कष्ट लगे रहते है, इसी का सामना करके चलना ही जिन्दगी है। समय-समय पर खुशी भी मिलती है। ईश्वर ने मनुष्य जीवन इसीलिए दिया है कि वे अपने दिमाग, सुझबूझ, समझदारी और कर्म से हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
पिछले डेढ़ साल से कोराना संक्रमण के कारण पूरी दुनिया थम सी गई है। सभी जगह तबाही ही तबाही नजर आ रही है। यह पहली बार जब एक ही बीमारी कोविड-19 (कोरोना) महामारी पूरे देश में एक साथ फैली हुई है। इसका जितना जल्दी रोकथाम हो सके उतना ही अच्छा। सभी देश अपने-अपने स्तर पर इसे रोकने और मृत्युदर कम करने में लगी हुई है। इस समय हर व्यक्ति अपने घर, परिवार, दोस्त, पड़ोसी, जान पहचान आदि को कोरोना संक्रमण में खो दिए हैं और अभी भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई जारी है। यह एक ऐसी बीमारी हैं जो अदृश्य है, जिसे हम देख नहीं सकते यह कहीं भी हो सकती है, जो निर्जीव है परन्तु मानव के संपर्क में आते ही एक्टिव हो जाती है, जो कि नाक, आंख, मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती है और कुछ ही दिनों में यह फेफड़े में अपने संक्रमण को बढ़ा देती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, इसका समय रहते रोकथाम न करने पर यह जान पर बन आती है। देश में इसी बीच कहीं पर आक्सीजन की कमी, कहीं पर इंजेक्शन कमी, दवाईयों की कालाबाजारी जैसी घटनाएं घट रहीं है, जिससे मन और व्याकुल हो उठता है। इन सब से अपने मन को बचा कर रखना है।
प्रतिदिन शासन, प्रशासन द्वारा यह हिदायत दी जाती है कि घर के बाहर ना निकले, फिर भी लोग घूमते सड़कों पर नजर आते है। भीड़-भाड़ से संक्रमण बढ़ता है। इस कारण ना चाहते हुए भी शासन लाॅकडाउन लगाती है। इसके बावजूद लोग नहीं समझ रहे हैं। लाॅकडाउन से गरीब, मजदूर, छोटे दुकानदार, ठेले वाले, गुमटी वाले, दिहाड़ी में काम करने वाले लोग बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से प्रभावित होते हैं। पुलिस की टीम लोगों को समझाईश देने व उन पर नजर रखकर हर चैक, चैराहों, बाजार इत्यादि पर सख्ती दिखाती है। लाॅकडाउन में घर पर रहना आसान नहीं होता, परन्तु इसका दूसरा रास्ता भी नहीं है। लाॅकडाउन लगाने पर शासन, प्रशासन, निगम, एनजीओ, स्वयं सेवी संस्था एवं समाजिक संस्थाओं द्वारा गरीबों को आवश्यक भोजन सामग्री मुहैया कराते है। हम कितना भी प्रयास क्यों न कर ले लेकिन लाॅकडाउन से जो आर्थिक नुकसान होता है, उसे रोक नहीं सकते पर नुकसान को कम करने का प्रयास किया जा सकता है। किन्तु आर्थिक नुकसान से अधिक जान की कीमत होती है, जान है तो जहान है।
असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया में बहुत से ऐसे भ्रामक वीडियो, आॅडियो शेयर किये जाते है, जिससे आम जनता और अधिक परेशान हो चिंतित हो, इससे उन्हें और मजा आता है। हमें कोरोना से ड़रना नहीं है बल्कि जागरूक होना है, सचेत रहना है। इन बीते माहों में जो मंजर हम सभी ने देखे है, उससे यह प्रतीत होता है कि यह कोरोना बहुत जल्दी समाप्त होने वाला नहीं है, इससे बचने के लिए टीकाकरण अत्यंत ही आवश्यक है, जिससे बहुत हद तक संक्रमण को रोका जा सकता है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकांे में टीका लगाने को लेकर गलत प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जबकि ऐसा करना गलत है। कोरोना टीकाकरण बहुत ही सुरक्षित व लाभदायक है। इस टीकाकरण से कोरोना संक्रमण से अधिक नुकसान को रोका जा सकता है। टीकाकरण के पश्चात् भी कोरोना होने की संभावन बनी रहती है, परन्तु यह अधिक घातक नहीं हो सकता। वैक्सीन से कोरोना का प्रभाव कम हो जाता है और व्यक्ति बहुत जल्द स्वस्थ हो जाता है।
हम सभी जानते है कि वर्तमान में अस्पताल की स्थिति क्या है, कोरोना लक्षण वाले लोगों का प्रतिदिन टेस्टिंग भी हो रहा है। संक्रमण का बढ़ना, घटना चल रहा है। प्रतिदिन अधिक संक्रमित व्यक्तियों की गहन चिकित्सा उपरांत मृत्यु हो रही है, मृत्यु दर का रोकथाम करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।
भारत में कोवैक्सीन एवं कोविशील्ड टीका का उत्पादन एवं वितरण में कमी को देखते हुए सभी राज्यों में टीकाकरण करने में कमी आई है। लोग टीकाकरण के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। राज्यों के सभी जिलों में टीकाकरण केन्द्र तो बनाए गए है, किन्तु लोगों की संख्या अधिक होने एवं वैक्सीन की संख्या कम होने के कारण असुविधा हो रही है। वर्तमान में टीकाकरण केन्द्रों में लोग घंटो लाईन लगाकर वैक्सीन लगवाने खड़े रहते है और वैक्सीन की सीमा समाप्त हो जाने के बाद समय और मेहनत दोनों बेकार हो जाती है, जिससे उन्हें निराशा और बौखलाहट होने लगती है। पर हमे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आने वाले समय पर पर्याप्त वैक्सीन प्राप्त होगी।
राज्य शासन द्वारा टीकाकरण के लिए नये एप्स की शुरूआत की गई है, इस एप्स से हम घर बैठे पंजीयन कर टीकाकरण का नंबर लगा सकते है, जिससे निर्धारित तिथि और समय पर टीका लगवाया जा सकता है। लोगों को केन्द्र में भटकने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा देखने में आया है कि कोरोना संक्रमण भय या डर से अधिक बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए डरे नहीं अपने आप को सहनशील बनाकर रखे, सकारात्मक सोच रखे, मुस्कुराते रहे। मास्क नियमित रूप से लगाये, सेनेटाईजर का समय-समय पर उपयोग करें एवं आपसी दूरी बनाए रखे। खानपान का विशेष ध्यान रखे। अधिक से अधिक अपने परिवार के साथ बैठकर हंसी-मजाक, खेलकूद, टीवी व मनोरंजन का आनंद उठाये। लाकडाउन के समय घर पर रहना आसान नहीं होता। घर के सभी सदस्य घर पर रहे-रहे बोर हो रहे है, पर बाहर खतरा अधिक है। इस कोरोना महामारी से हम बहुत जल्द निजात पायेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयत्न करना होगा। स्थिति समान्य होने तक लाकडाउन खुलने के बाद भी आवश्यक न हो तो घर से ना ही निकले। अति आवश्यक सामग्रियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा के साथ बाहर निकले। क्योंकि आपकी सुरक्षा, आपके परिवार की सुरक्षा है पूरे देश की सुरक्षा है।

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