Friday, June 21

वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक,, चमत्कार को नमस्कार है –

आज कल बागेश्वर वाले बाबा चहुओर चर्चित हो चले है , जितना बाबा अपने कामो से चर्चित नही हो पाए थे उससे ज्यादा विरोधियों की उँगलीबाजी से चर्चित हो चले है , अनपढ़ गंवार से लेकर शंकराचार्य , सोशल मीडिया से राष्ट्रीय चैनलों , चमचे से नेता तक कि जुबान में बागेश्वर के धीरेंद्र शास्त्री की पर्ची और चमत्कार के ढोंग ओर आरोप प्रत्यारोप के साथ साथ ढोंग ,चमत्कार और अंध श्रद्धा पर बहस के बीच राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के हिलोरें मारते जोश ने नई बहस छेड़ दी है । हर धर्म मे समय के साथ साथ कोई न कोई अच्छाई आई है तो कोई न कोई कमी भी आई है । एक दूसरे के धर्म और संस्कृति को बेहतर बताने की होड़ ने धर्मांतरण जैसे मुद्दे को हवा दी है । हांलाकि लगभग सभी धर्मों में मूल लगभग समान है सिर्फ नाम जगह और रीति में अंतर हों सकते है । धर्मांतरण के विरोधियों पर हमले कोई नई बात नही है । इससे बागेश्वर के धीरेंद्र शास्त्री कैसे बच सकते है ।
हमारे पूर्वजों के ज्ञान को नमन करे या नास्तिकों की समझ का चमत्कार की कबीरधाम की धरती ने हमें प्रियादास जी जैसे सन्त दिए है तो राजस्थान हरियाण महाराष्ट्र गुजरात की धरती अनेको सन्तो और उनकी अकल्पनीय गाथाओं से भरी है । विदेशी हमारी सभ्यता और संस्कृति को अपना रहे है तो कथित भारतीय उंगली उठाते फिर रहे है । अंधविश्वास के नाम पर दिमाग मे कुलबुलाते कीड़े वालो की उंगली भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर उठाना आसान है किन्तु चंगाई सभा , मीरदातार , मजारों पर होने वाले धार्मिक क्रियाकलापो और झाड़फूंक पे उंगली नही उठती आखिर क्यों समझ से परे । अनुभव बताते है कि बजरंगियों और हिन्दू संगठनों के द्वारा धर्मांतरण को लेकर विरोध तो दिखता किन्तु अंद्ध श्रद्धा के नाम पर दुकानदारी चलाने वालों में चंगाई सभा का कभी इतना विरोध नहीं किया और धर्म सभाएं तो कभी कभार होती हैं मीरा दातार जैसी संस्थाओं में भी झाड़फूंक एवं प्रेतबाधा दूर करने का काम होता है। इनका कभी बड़े पैमाने पर विरोध नहीं होता। कथित मानवता व इंसानियत वादियों को असल भय सनातनियों से है । जब जब हिन्दुतत्व और सनातन की बात करने वाले धर्मांतरण को रोकने वाले सन्त सामने आए है उनके खिलाफ छद्मवेशी अंधश्रद्धा के नाम पर बिल से निकल बिलबिलाने लगते है । धीरेंद्र शास्त्री लोगों को सनातन से जोड़ने का काम कर रहे हैं इसलिए सनातनीयो को वैचारिक रूप से जबरन उंगलीबाजो की बातों को भूल ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्हें इस धार्मिक संक्रमण काल में‌ धर्मांतरण से बचाने और अपनी सभ्यता व संस्कृति से रूबरू कराने बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र को आपके बीच भेजा है।
वैसे हमारी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करना असंभव है , हम उस देश के वासी है जिसने मनु से यजुर्वेद ,
विश्वामित्र से वाल्मीकि ,
गार्गी वाचवक्नवी से उपनिषद ,
नैमिषारण्य से महावीर स्वामी ,
महात्मा बुद्ध से शंकराचार्य तक ,
गोरखनाथ से विजयनगर तक,
गुरूनानक से स्वामी विवेकानंद तक,
का स्वर्णिम सफर किया है । हमारे पूर्वजों ने लगभग 8000 साल पहले ही अपनी भाषा संस्कृत और साहित्य वेद, रच लिए थे ,
8000 साल पहले ही मनु जैसा चक्रवर्ती सम्राट दिया हो, हमारे सन्तो ने 7000 साल पहले गायत्री मंत्र पढ़ लिए थे , इस देश की माटी में हैहय-परशुराम के बीच 7000 साल पहले ही युद्ध देख चुकी है । कलयुग और द्वापर के पहले 6000 साल पहले राम – रावण युद्ध देखने वाली सभ्यता और संस्कृति भारतीय संस्कृति ही है । कुरुक्षेत्र के महत्व और इतिहास को मानो या न मानो किन्तु उत्खनन से मिलते प्रमाण बताते है 5000 साल पहले महाभारत युद्ध झेलने वाली भूमि और देश भारत ही है ।
गोबरहिंन कहती है महराज तहु कहा चोरहा मन के आरोप ल धर के बैठे हस हमर धरम अउ संस्कृति मा एक से एक महात्मा होय हे , वैसे आज कल हमर नेता मन घलो एक से एक चमत्कार देखाथे 99 नम्बर वाले बेरोजगार घुमथे अउ 10 नम्बर वाला नौकरी करथे , अउ दूसर चमत्कार देख जाति गत भेदभाव मिटाना है नारा भी लगाना हे अउ टिकट अउ वोट ल घलो जाति आधार पर मांगना है ।
और अंत में :-
खामोश हूँ बेज़ुबान नही,
शिकारी हूँ किसी का शिकार नहीं ।
#जय_हो 30 जनवरी 2023 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *