आदिवासी युवती की संदिग्ध मौत,लीपापोती भड़के नंद कुमार साय,खुद से शुरू कर दी जांच पड़ताल,एसआईटी गठन करने मांग

जशपुर में एक आदिवासी युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ नंद कुमार साय ने संदिग्ध बताते हुए स्वयं से मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है जशपुर क्षेत्र में एक लंबे समय से जिन मामलों को पुलिस सुलझा नहीं पाती उन प्रकरणों में डॉ नंदकुमार साय जांच पड़ताल करते हैं ऐसी चर्चा गांव के लोगों में किस्से कहानी के रूप में बताए जाते हैं इस मामले में डॉ नंदकुमार सहाय का कहना है कि आदिवासी अंचल होने के कारण पुलिस कई मामले में लीपापोती करती है जिस में संदिग्ध परिस्थितियों की मौत और आत्महत्या है अंधे कत्ल शामिल हैं जनता को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसे कई मामलों की जांच पूर्व में कर चुके हैं जिसमें कब्र खोदकर बॉडी भी बाहर निकल आया गया है बहरहाल इस मामले में उन्होंने जांच पड़ताल करते हुए आरोप लगाया है कि जिस पेड़ से फांसी लगाई थी पेड़ भी काट दिया गया है जिससे स्पष्ट है कि सबूत मिटाने का पूरा प्रयास किया गया है बताया जाता है कि, अगस्त माह में सोनक्यारी चौकी निवासी विशेष संरक्षित जनजाति समाज की युवती का अल्पसंख्यक समुदाय के युवक से प्रेम संबंध था।इसी दौरान युवती 7 माह की गर्भवती हो गयी।जिसको लेकर गाँव में 27 अगस्त को बैठक रखी गयी।बैठक में गर्भवती युवती को आरोपी के साथ शादी करने की बात पर चर्चा हुई लेकिन युवक के पिता ने युवती को अपनी बहू बनाने से इंकार कर दिया।

जिसके बाद युवती और उसके परिजन मामले की शिकायत करने थाने जा रहे थे तभी मामले की जानकारी लगने पर आरोपी पक्ष के लोग युवती के घर पहुँचे और उसे बहु बनाकर अपने घर ले जाने को तैयार हो गए।जिसके बाद युवती को आरोपी पक्ष के लोग अपने घर भी ले गए।लेकिन अगली सुबह गाँव से एक किलोमीटर दूर एक पेड़ पर गर्भवती युवती का शव लटका हुआ मिला।जिसकी शिकायत परिजनों ने थाने में की थी।परिजनों का आरोप है की मृतिका ने खुदकुशी नहीं की उसकी हत्या की गई है लेकिन पुलिस इस मामले को आत्महत्या बता रही है।
अब इस मामले को लेकर जिले भर में प्रदर्शन शुरू हो गया है,इस मामले को लेकर भाजपा और जनजातीय सुरक्षा मंच जिले भर में प्रदर्शन कर रही है तो वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार साय पीड़िता के गाँव पहुँचे और गाँव से दूर जंगल में जिस जगह पर मृतिका का शव फाँसी पर मिला था वहाँ पहुँचे और घटनास्थल का जायजा लिया।नंदकुमार साय का आरोप है की मृतिका के हाथ पैर में सूजन थी जिसके वजह से वो पैदल चल फिर नहीं पा रही थी ऐसी स्थिति में गाँव से एक किलोमीटर दूर पहाड़ में 12 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़कर वो कैसे फाँसी लगा सकती है ? नंदकुमार साय ने इस मामले में एसआईटी का गठन कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वहीं मृतिका के परिजनों ने दोषियों को फाँसी की सजा की माँग की है।

बहरहाल , जिस तरीके से इस सम्भावित हत्याकांड को लेकर सियासत जारी है वह निःसन्देह जिले की शांत फ़िजा को खराब करने की ओर बढ़ रही है ।

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