Saturday, February 4

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आईएफएफआई-53 बचपन के सपनों और गतिशील शक्तियों को प्रदर्शित करेगा
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आईएफएफआई-53 बचपन के सपनों और गतिशील शक्तियों को प्रदर्शित करेगा

कैपरनॉम आईएफएफआई में यूनिसेफ के सहयोग से छह बाल फिल्में दिखाई जाएंगी नई दिल्ली (IMNB). अमेरिका के मशहूर लेखक जेस लैयर ने कहा है कि बच्चे कोई ऐसी चीज नहीं हैं, जिसे ढाला जा सके, बल्कि लोगों को खुद को उजागर करना है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का 53वां संस्करण बचपन और उसके सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को आकार देने वाले सपनों, गतिशील शक्तियों और बारीकियों को सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आईएफएफआई- 53 में यूनिसेफ के सहयोग से छह बाल फिल्मों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की है। इनमें बिखरे हुए बचपन की एक मार्मिक कहानी कैपरनॉम से लेकर बच्चों के लिए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की बच्ची म्होनबेनी एजुंग की कहानी नानी तेरी मोरनी भी शामिल है, जिसने अपनी दादी को डूबने से बचाया और अपने डर पर जीत प्राप्त की। इस श्रृंखला की एक और फिल्म सुमी है, जिसे ग्...