Thursday, February 9

Tag: एक नेता : बस मेरा नाम याद रखो

*एक देश, एक नेता : बस मेरा नाम याद रखो, मुझे वोट दो!* *(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*
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*एक देश, एक नेता : बस मेरा नाम याद रखो, मुझे वोट दो!* *(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*

‘‘और याद रखिए, हमारा भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार कौन है, आप को किसी को याद रखने की जरूरत नहीं है। सिर्फ कमल का फूल याद रखिए। मैं आप के पास कमल का फूल लेकर आया हूं...कमल का फूल पर आप का हरेक वोट सीधे मोदी के खाते में आशीर्वाद बनकर आएगा।’’ नरेंद्र मोदी का यह डॉयलाग, जो उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सोलन में भाजपा की एक चुनाव रैली को संबोधित करते हुए बोला, सूत्र रूप में उस विकृत केंद्रीयकरण को उजागर कर देता है, जो करीब साढ़े आठ साल के अपने राज में नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति के विकेंद्रीकृत, जनतांत्रिक स्वभाव की जगह पर थोप दिया है। इस एक डॉयलाग में प्रधानमंत्री मोदी कम से कम तीन पहलुओं से या तीन स्तरों पर, अपने राज में हुए इस अति-केंद्रीयकरण को स्वर देते हैं। बेशक, इस केंद्रीयकरण का पहला स्तर तो, जिसे शुरू से ही इंगित भी किया जाता रहा है, विकेंद्रीकृत प्रतिनिधित्व पर आधारित संसद...