Tag: बात बेबाक  चंद्र शेखर शर्मा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की बधाई ..

बात बेबाक (चंद्र शेखर शर्मा) हमला नई होयेकोरोना आँटी के जानलेवा ईश्क के बीच छत्तीसगढ़ में ये डायलाग अक्सर सुनने को मिलने लगा है
कवर्धा, छत्तीसगढ़ प्रदेश, लेख-आलेख

बात बेबाक (चंद्र शेखर शर्मा) हमला नई होयेकोरोना आँटी के जानलेवा ईश्क के बीच छत्तीसगढ़ में ये डायलाग अक्सर सुनने को मिलने लगा है

कोरोना आँटी के जानलेवा ईश्क के बीच छत्तीसगढ़ में ये डायलाग अक्सर सुनने को मिलने लगा है । देश की राजधानी दिल वालों की दिल्ली और रात को गुलजार रहने वाली मुम्बई मेरी जान के बदतर होते हालात की खबरों के बीच छतीसगढ़ में भी कोरोना पैर पसारने लगा है । बढ़ते कोरोना के प्रकोप के बीच लाकडाउन में मिली छूट से अनलॉक होते लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर पड़ा है ।खतरों के खिलाड़ी छत्तीगढ़िया मानुष के सामने कोरोना की औकात भारत में बीड़ी, सिगरेट, गुटके पर छपी कैंसर की फोटो सरीखी है ,पता सबको है खतरनाक है पर फ़र्क़ किसी को पड़ नही रहा उल्टा *हमला नई होये..…* का डायलाग अलग से सुनने को मिल जाएगा ये कटु सत्य हैं । तुलसीदास जी बरसों बरस पहले लिख गए थे कि भय बिन होए ना प्रीत आज भी सत्य है , जैसे लातों के भूत बातों से नहीं मानते, उसी तरह हम भी कोई भी नियम कायदा हो बिना डर भय के नहीं मानते । नियम कायदे से तो हमे डर नही कानून म...
बात बेबाक (चंद्र शेखर शर्मा) राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की बधाई ..
छत्तीसगढ़ प्रदेश, लेख-आलेख

बात बेबाक (चंद्र शेखर शर्मा) राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की बधाई ..

पंचायती राज गांधीजी बोले तो बापू का स्वप्न था हाँ भाई वही बापू जिसके चरखे से आजादी आई थी , अरे हाँ भाई हाँ वही गांधी जिनका चश्मा शासन की योजनाओं में लोगो के रूप में है तो झाड़ू मोदी के पास और टोपी आप के पास है । गांधी के पंचायती राज के सपने को साकार करने व ग्रामीण विकास में जनता की भागीदारी के मद्देनजर मेहता समिति द्वारा मध्यप्रदेश के समय पंचायती राज का गठन किया गया था । छत्तीसगढ़ गठन के बाद पंचायती राज में कुछ परिवर्तन भी देखने को मिले रहे है शराब बंदी की बाते करते करते सरकारें खुद शराब की व्यापारी बन शराब बेचने में जुट गई । गांधी के पंचायती राज के जरिये राम राज की परिकल्पना इन सात दशकों में चुनावो में दारू , मुर्गा , कंबल , साड़ी , खरीद फरोख्त और लाठी के बीच खो गई । दशको गुजरने के बाद भी पंचायतो की बदहाली के चलते गांधी का सपना आज भी सपना ही है । पंचायतों की बदहाली के लिये महज पंच, सरपंच,...