Thursday, February 2

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वर्ण और जाति मुक्त भारत का संघी अभियान : नौ सौ चूहे खाके बिल्ली का हज करने का ऐलान (आलेख : बादल सरोज)
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वर्ण और जाति मुक्त भारत का संघी अभियान : नौ सौ चूहे खाके बिल्ली का हज करने का ऐलान (आलेख : बादल सरोज)

यह समय जोरदार समय है। यह समय आजमाई और मुफीद समझी जाने वाली लोकोक्तियों, कहावतों और मुहावरों के पुराना पड़ जाने का समय है। वैसे विसंगतियों और एकदम उलट बर्ताब के लिए सामान्य रूप से प्रचलित कहावतों, मुहावरों में "शैतान के मुंह से कुरआन की आयतें" या "रावण का साधुवेश में आना" या "मुंह में राम बगल में छुरी" का उपयोग किया जाता रहा है। मगर इन दिनों लगातार ऐसी रोचक उलटबांसियां हो रही हैं कि उनके विरोधाभास को उजागर करने के लिए ये मुहावरे अपर्याप्त से लगने लगे हैं। नए रूपक गढ़ने की जरूरत आन पड़ी है। ऐसा ही एक घटनाविकास इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुयी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में लिया गया संकल्प है। इस बैठक में आरएसएस द्वारा अपने शताब्दी वर्ष में "सामाजिक समरसता और जाति-वर्ण मुक्त समाज की स्थापना का लक्ष्य हासिल करने के लिए कई तरह के अभियान शुरू करने" का निर्णय...