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और अब संसदीय प्रणाली का पिण्डदान : न जवाब, न जानकारी, न राय रखने की मोहलत
खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश, रायपुर

और अब संसदीय प्रणाली का पिण्डदान : न जवाब, न जानकारी, न राय रखने की मोहलत

*(आलेख : बादल सरोज)* 🔹 संसद ने पूछा : घर लौटते में कितने मजदूर रास्ते में मरे? 🔸 सरकार बोली : नहीं पता। 🔹 संसद ने पूछा : इन मृतकों के परिवार को कोई मुआवजा दिया गया? 🔹 सरकार बोली : जब मरने वालो का ही रिकॉर्ड नहीं, तो मुआवजे का सवाल ही नहीं उठता। 🔹 संसद ने पूछा : कितने लोगों की नौकरियाँ खत्म हो गयीं? 🔸 सरकार बोली : नहीं पता। 🔹 संसद ने पूछा : कोरोना में कितने डॉक्टर्स और चिकित्सीय स्टाफ की मौत हुयी? 🔸सरकार बोली : पता नहीं। 🔴 प्रश्नोत्तर काल को खत्म किये जाने का एलान तो संसद सत्र शुरू होने के पहले ही किया जा चुका था। ये वे सवाल थे, जिन्हें अतारांकित - बिना स्टार वाला - सवाल कहा जाता है। मतलब इन्हें लिखकर पूछा जाता है और इनका जवाब भी लिखित में ही दिया जाता है। कोई चर्चा, प्रतिप्रश्न, पूरक प्रश्न वगैरा नहीं होते। यह संसदीय प्रणाली पर एक बड़ा आघात था - जानबूझकर कान बंद किये बैठी, ता...