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सोच बदलकर ही मासिक धर्म की गरिमा बढ़ सकती है ( प्रियंका सौरभ क्रांतिकारी विचारक लेखिका)
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सोच बदलकर ही मासिक धर्म की गरिमा बढ़ सकती है ( प्रियंका सौरभ क्रांतिकारी विचारक लेखिका)

(मासिक धर्म के कलंक को तोड़ने और मासिक धर्म अपशिष्ट कार्यशालाओं और शौचालय डिजाइनों को बढ़ावा देने जैसी पहल के साथ शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से राष्ट्रीय नीति को बदलने की आवश्यकता है।) महिलाओं के लिए मासिक धर्म एक प्राकृतिक और स्वस्थ जैविक प्रक्रिया है, इसके बावजूद, यह अभी भी भारतीय समाज में एक निषेध एवं शर्मिंदगी माना जाता है। आज भी लोगों पर सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव किशोर लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में शिक्षित करने में बाधा है। बीते साल फरवरी 2020 में, गुजरात के भुज में एक घटना हुई जिसमें छात्राओं को यह साबित करने के लिए पैंट हटाने के लिए कहा गया था कि वे मासिक धर्म में नहीं हैं, इससे मासिक धर्म के बारे फिर से चर्चा शुरू हुई। भारतीय समाज में मासिक धर्म के दिनों में, महिलाओं को दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में भाग लेने की मनाही होती है। उदाहरण के लिए, महि...