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तिब्बत जन विद्रोह दिवस (10 मार्च ) पर विशेष तिब्बतियों में अभी भी धधक रही है स्वतंत्रता की आग
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तिब्बत जन विद्रोह दिवस (10 मार्च ) पर विशेष तिब्बतियों में अभी भी धधक रही है स्वतंत्रता की आग

डा समन्वय नंद 10 मार्च, 1959 को तिब्बत में माओ की चीनी सेना  के खिलाफ जन विद्रोह शुरु हुआ था। इस दिन तिब्बत के हजारों के संख्या में लोग व बौद्ध भिक्षु सडक पर उतर कर चीन की लाल सेना का विरोध किया था । इसके बाद माओ की सेना ने हजारों की संख्या में नीरिह तिब्बतियों को मौत के घाट उतार दिया था । इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी कि परम पावन दलाई लामा को तिब्बत छोड कर भारत में शरण लेना पडा था । वैसे देखा जाए तो चीन की कम्युनिस्ट सेना ने 1949 से ही  तिब्बत पर हमला करना प्रारंभ कर दिया था ।। पहले माओ की सेना ने चीन से सटे तिब्बत के हिस्से आमदो व खम प्रदेश में प्रवेश कर उन इलाकों को नियंत्रण में लेना प्रारंभ कर दिया था । चीन अपने बर्बर सैन्य बल के माध्यम से दलाई लामा को झूकाने का प्रयास कर रहा था । इस कारण तिब्बत को चीन के साथ 17 सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर करना पडा था । बंदूक के नौक पर चीन ने ...