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जहँ जहँ पाँव पड़े कारपोरेट के, तहँ तहँ खेती बँटाढार
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जहँ जहँ पाँव पड़े कारपोरेट के, तहँ तहँ खेती बँटाढार

(आलेख : बादल सरोज) 🔴 सार रूप में कहानी यह है कि आधी रात में अलाने की भैंस बीमार पड़ी। बीमारी समझ ही नहीं आ रही थी। उन्हें किसी ने बताया कि ठीक यही बीमारी गाँव के फलाने की भैंस को भी हुयी थी। वे दौड़े-दौड़े उनके पास गए और वो दवा पूछकर आये, जो उन्होंने अपनी बीमार भैंस को दी थी और घर लौटकर अपनी भैंस को खिला दी। सुबह होने से पहले भैंस चल बसी। गुस्से में तमतमाये हुए अलाने तड़ाक से फलाने के घर जा धमके और उनसे कहा कि ये कैसी दवा दे दी, जिसे खाकर भैंस मर गयी। फलाने बहुत तसल्ली के साथ बोले ; "भाई तूने पूछा था कि मैंने अपनी बीमार भैंस को कौन सी दवा दी थी। सो दवा मैंने बता दी। भैंस के बारे में पूछा ही कहाँ था? वो दवा देने के बाद भैंस तो मेरी भी मर गयी थी।" 🔴 मसला यह है कि ठीक उसी मरी भैंस की दवा अब जम्बूद्वीपे भारतखण्डे में आजमाई जा रही है। नवउदारीकरण की नीतियों के आख़िरी दाँव के रूप में दवा कहकर जो...