Tuesday, March 5

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी… मोदीजी दें ध्यान, धंधे में ‘रेल्वे’ बेईमान

एक सज्जन ने एक सवाल किया कि जब बाईक पर तीन सवारी चलते हैं तो सरकार चालान बना देती है। जुर्माना भरना पड़ता है। दो की ही व्यवस्था है तीन नहीं चल सकते। ऐसे में जब रेल्वे एक जनरल डिब्बे में तय संख्या से अधिक यात्रियों को भर लेती है तो उसका जुर्माना क्यांे नहीं होना चाहिये ?

72 के या 80 के जनरल डब्बे मे सौ से अधिक यात्री भरे होते हैं। लेकिन इतिहास में कभी उसे कानून के उल्लंघन की तरह नहीं देखा गया। ये एक सामान्य बात है।
जबकि जो नियम एक दोपहिया पर और बसों पर लागू होता है वही रेल्वे पर भी क्यों नहीं होना चाहिये। बस में भी संख्या निर्धारित है। अधिक सवारी भरने पर जुर्माना लगता है। रेल्वे को छूट क्यों ? क्या सिर्फ इसलिये कि वो सरकारी है।

रेल्वे को ईमानदार व्यवसाय करे
लालचभरी दुकानदारी नहीं

ईधर रेल्वे का रवैया एक प्रोफेशनल की तरह हो गया है। इसे काॅमर्शियल तो माना ही जाता है लेकिन काॅमर्शियल में भी नियम तोड़ने की छूट नहीं होती और इसमें भी एक ईमानदारी की उम्मीद की जा सकती है।

सरकार तो एक खराब दुकानदार की तरह लालची प्रवृति का प्रदर्शन करती रही है। पूरा ध्यान कमाई पर है। बच्चों को भी नहीं बक्शा और बुजुर्गों का भी मान नहीं किया। बच्चों की हाफ टिकट पर रोक लगा दी और कमाई की। पहले 5 से 12 साल के बच्चों से आधा किराया लिया जाता था जिस पर रोक लगाई और एक जानकारी के अनुसार पिछले सात सालों में 2800 करोड़ रूप्ये अतिरिक्त कमाई की।

इसी तरह 60 साल से बड़े बुजुर्गों को किराये में आधी छूट मिला करती थी जिसे सरकार ने समाप्त कर दिया। अब उन्हे पूरा किराया देना होता है।

बुजुर्गों के प्रति रवैया

यू ंतो हमारे संस्कार बुजुर्गों को हर जगह अतिरिक्त सम्मान देने की बात की जाती है और कुछ विशेष सहूलियतें दी जाती हैं। लेकिन यहां आकर रेल्वे को संस्कारों से कोई वास्ता नहीं दिखता यहां दिखती है बस कमाई।

जिस तरह दोपहिया पर तीन सवारी बिठाने पर बैन है उसी तरह रेल्वे को 80 के डब्बे में अधिक यात्री नहीं भरने चाहियें। सरकार को क्षमता के हिसाब से टिकटें बेचनी चाहियेें। और अधिक डब्बों की व्यवस्था करनी चाहिये।

बड़ा नाम है मोदीजी का। हर बात मंे ईमानदारी के लिये वे जाने जाते हैं। फिर इस विभाग को बेईमानी की छूट क्यों दे रखी है ?
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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