Sunday, March 3

संकल्प यात्रा महामाया मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओ को मिला जय स्वर्वेद कथा ध्यान साधना और दिव्य वाणी का लाभ

*रायपुर। ईश्वर का महान प्रसाद हैं मानव जीवन_संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज*

ईश्वर का महान प्रसाद है मानव जीवन । हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है, अनन्त आनन्द का श्रोत है। आत्मा के अंदर अन्तरात्मा रूप से ईश्वर ही विराजमान है। आवश्यकता है आध्यामिक ज्ञान की , स्वर्वेद सद्ज्ञान की, विहंगम योग के ध्यान की, जिसके आलोक में एक साधक का जीवन सर्वोन्मुखी विकास होता है।

उक्त उद्गार स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने संकल्प यात्रा के क्रम में महामाया मंदिर, नयी बस्ती में आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के मध्य व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि जीवन जीने में ही जीवन बीत न जाय बल्कि जीवन है क्या इसका अनुभव हो जाय। मैं कौन हूँ ? कहाँ से आया? क्या कर रहा और जाना कहाँ हैं? इसका ज्ञान हो जाय।

महाराज जी ने दिव्यवाणी के दौरान बताया कि जीवन और सत्य कोई दो वस्तु नहीं, जीवन कहें या सत्य कहें। जीवन मे जो सबसे महत्वपूर्ण है वह कुछ अन्य नहीं, जीवन की वास्तविकता ही है। क्योंकि जीवन का आधार परमात्मा है ।

 

उन्होंने कहा कि भारत आध्यात्मिक देश रहा है, अध्यात्म से ही हमारी पहचान संपूर्ण विश्व में है, इसी आध्यात्मिक ज्ञान की धारा को विहंगम योग के प्रणेता अनन्त श्री सदगुरु सदाफल देव जी भगवान ने अपनी आत्मा में धारण किया और संपूर्ण विश्व की मानवता के कल्याण के लिए उसे स्वर्वेद में अभिव्यक्त कर दिया। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। विहंगम योग विशुद्ध आध्यात्मिक मार्ग है। विहंगम योग से हम संसार के समस्त कर्तव्यों का पालन करते हुए सांसारिक कष्टों से ऊपर उठ जाते हैं। जीवन में स्वास्थ्य, सुख और शान्ति की त्रिवेणी को प्राप्त कर लेते हैं।

संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक योग साधना को सिखाया। कहा कि *यह साधना खुद से खुद की दूरी मिटाने के लिए है।*

संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की दिव्यवाणी जय स्वर्वेद कथा के रूप में लगभग 2 घंटे तक प्रवाहित हुई । स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे।

दिव्यवाणी के पश्चात मुख्य आगंतुकों को संत प्रवर जी के हाथों विहंगम योग का प्रधान सद्ग्रन्थ स्वर्वेद भेंट किया गया।

आयोजकों ने बताया कि विहंगम योग सन्त समाज के शताब्दी समारम्भ महोत्सव एवं 25000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज 17 जुलाई को संकल्प यात्रा का शुभारंभ कश्मीर की धरती से हो चुका है। संकल्प यात्रा के प्रथम चरण में कश्मीर , जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड , उड़ीसा के पश्चात छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज, अम्बिकापुर, बिलासपुर, नवापारा, सरायपाली, बालोद , धमतरीहोते हुए आज रायपुर में पहुँच चुकी है।

17 एवं 18दिसंबर 2023 को विशालतम ध्यान – साधना केंद्र (मेडिटेशन सेंटर) स्वर्वेद महामंदिर, वाराणसी के पावन परिसर में 25000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होना है। उसी क्रम में यह संकल्प यात्रा हो रही है जिससे अधिक से अधिक लोगों को पूरे भारत वर्ष में लाभ मिले।

इस शताब्दी समारम्भ महोत्सव में विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सदगुरू सदाफल देव जी महाराज की 135 फिट से भी ऊंची प्रतिमा (Statue of Spirituality) का भी शिलान्यास होगा।

इस अवसर पर भक्तों ने भव्य विहंगम शोभायात्रा निकाली। अनुयायियों ने संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज का स्वागत अभिनंदन किया। हजारों लोगों ने हाथ मे अ अंकित श्वेत ध्वजा लिए सदगुरुदेव का जयघोष करते हुए, हम सबका संकल्प महान ! स्वर्वेद महामन्दिर निर्माण !! का संकल्प दोहराते हुए कार्यक्रम स्थल पहुँचे।

इस अवसर पर बबन सिंह ( निदेशक), कोटेश्वर चापड़ी उपाध्यक्ष, सुश्री श्याम कुमारी उसेंडी , दिनेश सिंह, आर एन साहू, पुरुषोत्तम सपहा, सत्येंद्र स्वर्वेदी आदि लोग उपस्थित रहे।

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