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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर भोपाल में होगा भव्य ड्रोन शो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शोध के साथ-साथ गर्वनेंस में भी हो डाटा का उपयोग
प्रदेश में इसरो के समान शोध केंद्र स्थापित करने के लिए की जाए पहल
डिजिटल एटलस से मिलेगी प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी
भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है किमध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर एक नवम्बर को भोपाल में “विरासत से विकास” की थीम पर भव्य ड्रोन लाइट शो आयोजित किया जाए। प्रदेश में इसरो के समान शोध केंद्र बनाने की दिशा में भी विद्वानों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर पहल की जाए। इससे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे। नीमच में मध्यप्रदेश बायो-टेक्नॉलोजी पार्क की स्थापना कर इससे जुड़ा इन्क्यूवेशन सेंटर साइंस सिटी उज्जैन में बनाया जाए।यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विभिन्न स्रोतों और प्रक्रियाओं से प्राप्त डाटा का उपयोग शोध के साथ-साथ शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी हो।मुख्यमंत्री डॉ. यादवने यह निर्देश मंत्रालय में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की कार्यकारी समिति की बैठक में दिए। बैठक में राज्य में नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को गति देने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी उपस्थित थे।
बैठक में जानकारी दी गई कि परिषद द्वारा प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर केंद्रित डिजिटल एटलस विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के कारीगरों को देश के ख्याति प्राप्त विशेष विशेषज्ञों से संवाद और उनके द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों के माध्यम से कारीगरों के कौशल उन्नयन के लिए प्रदेश में कारीगर विज्ञान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उज्जैन और जबलपुर में 15 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से विज्ञान केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन के डोंगला में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अंतरिक्ष अनुसंधार केन्‍द्र की स्थापना, कालगणना केन्‍द्र के रूप में उज्जैन को प्रतिस्थापित करने तथा साइंटिस्ट मेमोरियल की स्थापना की भी योजना है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक विज्ञान को प्रायोगिक रूप से दिखाने के उद्देश्य से सांइस ऑन व्हील योजना संचालित की जाएगी। बैठक में परिषद द्वारा संचालित गतिविधियों की प्रगति की जानकारी भी दी गई। साथ ही परिषद के अधिकारियों/ कर्मचारियों को 35 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर चतुर्थ समयमान देने के लिए सैद्धांतिक अनुमति प्रदान की गई है।

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