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शीतलहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी आमजन से सावधानी बरतने की अपील

जिले में बढ़ती ठंड और शीतलहर के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों की सुरक्षा हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया और फॉस्टबाइट जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे जारी निर्देशों का गंभीरता से पालन कर स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
शीतलहर क्या है- शीतलहर वह स्थिति होती है जब वातावरण का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। इस दौरान ठंडी हवाएं तेज़ी से चलने लगती हैं और कई स्थानों पर पाला या बर्फ जमने की स्थिति बन जाती है जिससे जन-जीवन प्रभावित होता है।
शीतलहर के दौरान क्या करें- स्वास्थ्य विभाग ने ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है। दस्ताने, टोपी, मफलर और जूते का नियमित उपयोग करें। चुस्त कपड़ों से बचें, क्योंकि इससे रक्त संचार प्रभावित होता है। ढीले-ढाले सूती कपड़े बाहर की ओर और ऊनी कपड़े अंदर की ओर पहनना अधिक सुरक्षित रहता है।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि वे ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। अत्यधिक ठंड के समय डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, श्वास संबंधी रोगों से ग्रसित मरीज, 64 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन, 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे और गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता होती है। शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें। विटामिन-सी युक्त फल और सब्जियों को आहार में शामिल करें। शीतलहर के दौरान यथासंभव घर के अंदर ही रहें और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही बाहर यात्रा करें। यदि बाहर काम करना अनिवार्य हो तो बीच-बीच में विश्राम लेते रहें ताकि शरीर का तापमान सामान्य बना रहे।
आपात स्थिति के लिए खाद्य सामग्री, पीने का पानी, ईंधन, बैटरी चार्जर, इमरजेंसी लाइट तथा आवश्यक दवाइयां पहले से तैयार रखें। रूम हीटर का उपयोग केवल पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर ही करें। बंद कमरे में कोयले का उपयोग न करें, क्योंकि इसके जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है जो अत्यंत खतरनाक है और जानलेवा साबित हो सकती है।
अत्यधिक ठंड के लंबे संपर्क में रहने से त्वचा कठोर और सुन्न हो सकती है। हाथ-पैर की उंगलियों, नाक और कानों में लाल फफोले पड़ना फॉस्टबाइट का संकेत है जो गंभीर स्थिति हो सकती है।
शीतलहर के दौरान क्या न करें- बिना आवश्यक कार्य के ठंड में बाहर न जाएं। पतले या गीले कपड़े न पहनें। ठंड से राहत के लिए आग के बहुत पास न बैठें इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है।
शराब का सेवन न करें क्योंकि यह शरीर की तापमान नियंत्रण प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
यदि शरीर के किसी हिस्से में फॉस्टबाइट हो जाए तो उस हिस्से को रगड़ें नहीं बल्कि तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें सावधानियां अपनाएं और शीतलहर के दौरान स्वयं तथा अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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