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एक धड़कन, जिसने ज़िंदगी बदल दी

प्रोजेक्ट धड़कन” के तहत सही समय पर जांच और इलाज से मिली अरमान को हृदय रोग से मुक्ति

गांव में मितानिन ने एक दिन कहा था, “आपके बच्चे की धड़कन बाकी बच्चों से तेज है,” यह वाक्य आज भी   रजनी यादव के कानों में गूंजता है। वे बोलते-बोलते रो पड़ती हैं,
“हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया… अब लगता है, क्यों नहीं दिया!”गोगांव, रायपुर की रहने वाली  रजनी यादव का तीसरा बेटा अरमान, अपने दोनों बड़े भाइयों और दोस्तों के साथ हंसता-खेलता बड़ा हो रहा था। कभी पिट्टूल खेलता, कभी दौड़ लगाता, सब कुछ सामान्य लगता था। बस बार-बार होने वाला सर्दी-बुखार माता-पिता को थोड़ा परेशान जरूर करता था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि उस मासूम सी हंसी के पीछे एक गंभीर खतरा छिपा है।

फिर 13 दिसंबर 2025 का दिन आया। सरोरा स्थित शासकीय स्कूल में, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार पहुँची चिरायु टीम ने जब बच्चों की जांच शुरू की, तो अरमान की बारी पर डॉक्टर ठिठक गए। उसके हृदय की धड़कन सामान्य नहीं थी। यही वह पल था, जिसने एक परिवार की ज़िंदगी की दिशा बदल दी।

टीम अरमान को तत्काल श्री सत्य साईं नारायण अस्पताल, नया रायपुर लेकर गई। विस्तृत जांच हुई और रिपोर्ट ने माता-पिता के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। अरमान के दिल में 18 मिमी का छेद था। डॉक्टरों ने बिना देर किए कहा, “ऑपरेशन जरूरी है।”

ईंट-भट्ठे में काम करने वाले पिता   रंगनाथ यादव और मां रजनी के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा था — पैसे का इंतजाम कैसे होगा?
बच्चा का स्वास्थ्य, उसका भविष्य कैसा होगा?
लेकिन उस घड़ी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। चिरायु टीम की सलाह पर भरोसा किया और अपने बेटे को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

ज़िला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ के अंतर्गत 28 दिसंबर 2025 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में अरमान का जटिल हृदय ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क सफलतापूर्वक किया गया।
लगातार निगरानी और देखभाल के बाद कुछ ही दिनों में वह डिस्चार्ज होकर घर वापिस आ गया।

आज जब अरमान पिट्टूल खेलता है, दोस्तों के पीछे भागता है, तो यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि सिर्फ एक हफ्ते पहले वह अस्पताल में एक जटिल सर्जरी प्रक्रिया से गुजर रहा था।

चिरायु टीम द्वारा लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अरमान की सेहत में उल्लेखनीय सुधार है और वह पूरी तरह स्वस्थ है।
उसके चेहरे की मुस्कान आज सिर्फ उसके परिवार की नहीं, पूरे मोहल्ले की खुशी बन गई है।

भावुक होकर श्रीमती रजनी यादव कहती हैं, “अगर समय पर जांच और इलाज नहीं मिलता, तो शायद आज मेरा बच्चा मेरे सामने न होता।”
वहीं पिता श्री रंगनाथ यादव कहते हैं, “मेरे पास न पैसा था, न साधन… लेकिन प्रोजेक्ट धड़कन ने मेरे बेटे को नई ज़िंदगी दे दी।”

आज अरमान केवल अपने माता-पिता का सहारा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आशा, विश्वास और समय पर मिली मदद की ताकत का प्रतीक बन चुका है। रजनी और रंगनाथ, मुख्यमंत्री    विष्णुदेव साय और ज़िला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते नहीं थकते।

यह कहानी सिर्फ एक बच्चे के बचने की नहीं है – यह कहानी है संवेदनशील शासन, समय पर हस्तक्षेप और उस भरोसे की,
जो एक मासूम दिल को फिर से धड़कने का मौका दे सका।

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