Ro no D15139/23

बंगाल के सिंहासन को लहू सिंचती भी है और प्लावन कर कुशासन को जड़ समेत निर्मूल भी।

जाने पश्चिम बंगाल की सियासत की तासीर ऐसी क्यों है। 1905 से शुरू कर 1946 के डाइरेक्ट एक्शन की बात हो या 1977 के बाद से 2021 तक। इस बंगाल की राजसत्ता ने खुद को टिकाये रखने के लिए। पल्ल्वीत-पुष्पित होते रहने के लिए सिर्फ लहू ही पीया है। बिलकुल ड्राकुला की तरह। उसे सिर्फ रक्त की पिपासा है। 1905 में लार्ड कर्जन का बंगाल विभाजन (हिन्दू -मुस्लिम आबादी के आधार पर ) का इतिहास हो या फिर 16 अगस्त 1946 के बुचड़ मुस्लिम लीगी मुख्यमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी का डायरेक्ट एक्शन।
स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल में 1947 में बनी कांग्रेस की सत्ता 1977 में धराशायी होने के बाद 1977 से 2011 तक 7 बार वाममोर्चा की सत्ता रही हो या फिर 2011 से 2021 तक की निवर्तमान ममता बनर्जी की तृणमूल सत्ता। बंगाल की ‘ ड्राकुला’ सत्ता ने ज्योति बासु से लेकर 2021 तक अपने ही लाखों निरीह नागरिकों का खून पीती खिलखिलाती सिंहासन को सींचती रही है।
बंगाल के रक्त रंजीत या ‘रक्त चरित्र ‘ राजनीति की शुरुआत होती है
30 अप्रेल 1982 में कोलकाता के बीजान सेतु पर आनंदमार्गी साधुओं का पीट -पीट कर मारे जाने की घटना से। जिसमें एक साध्वी सहित 16 साधुओं को टेक्सी से खींच कर हजारों लोगों के बीच वामपंथियों द्वारा पीट -पीट कर मार डाला जाता है। उसके बाद उन्हें वहीं जला दिया जाता है। उसके बाद से शुरू होती है नेहरू -इंदिरा कांग्रेस की तर्ज पर मुस्लिम तुष्टिकरण पोषित वोट बैंक वाली राजनीति की। बंगाल की वाममोर्चा सरकार ने 1982 के बाद अपनी सत्ता को बनाये रखने का मूलमंत्र बना लिया, मुस्लिम वोट बैंक और काडर का अराजक बल के जोर पर सत्ता दखल का रक्त चरित्र।
यही राजनीति आगे चल कर बंगाल के आम चुनावों के” पूर्व और बाद ” रक्त चरित्र की पटकथा बन गई। बंगाल में आम चुनाव से लेकर निगम -पंचायत चुनाव तक। हर चुनाव और वोटिंग में हत्या और आगजनी। बूथ दखल से लेकर बमबाजी और विरोधियों को रोकने बलात्कार से लेकर लोम्हार्षक मार -पिटाई तक। बंगाल की सत्ता को बनाये रखने का मूलमंत्र बन गया। लोकतान्त्रिक वोटिंग पर्व व्यवस्था को निरंकुश राक्षसी हवन कुंड में बदल दिया गया। इस हवन कुंड के लिए बंगाल के भद्र और सनातनी हिन्दू वोटर समीधा बना दिए गए। क्यों कि बंगाल के मूल निवासी सनातनी हिन्दू अपने संस्कार और जागृति के लिए आज भी अपनी पहचान को बनाये रखा है। क्रांति और विद्रोह इनका चरित्र रहा है। परिवर्तन ही इनकी शैली रही है।
इनकी इसी जागरूकता के डर से वाममोर्चा शासन काल से शुरू कर आज की तृणमूल सरकार तक में इन्हें ही टार्गेट किया गया। इनकी एक जुटता कभी भी सत्ता बदल सकती थी। नतीजा इन्हें मतदान से दूर रखने। डरा कर रखने की राजनीति को परवान चढ़ाए रखा गया। हिन्दू वोटरों की बाड़बंदी करने से लेकर सत्ता पक्ष में जबरिया वोटिंग के लिए मजबूर किया गया। सत्ता पिपासुओ को फिर भी भरोसा नहीं था। इसलिए मुस्लिम तुष्टिकरण की हर पराकाष्ठा की हद को पार किया जाता रहा। बांग्लादेश के बांग्लादेशियों से लेकर रोहंगियायों तक को प्रवेश करा कर उन्हें वोटिंग अधिकार, आधार, पैन कार्ड मुहैया कराए गए।

सीमांचल इलाके की भूमि, गांव, शहर की जमीनों पर कब्जा करने की छूट दे दी गई। यहां तक की पश्चिम बंगाल के करीब 100 विधानसभा सीटें इनके कब्जे में है। मूल सनातनी हिन्दू बंगाली अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा, रामनवमी, होली से लेकर शोभा यात्रा, मूर्ति विसर्जन, मुस्लिम वोटर बहुल इलाके के मंदिर तक दहशत में है। हद तो यह कि 2026 के चुनावी माहौल में यहां की मुख्यमंत्री यह तक धमकी देने की जुर्रत करती है – यदि तृणमूल को फिर से सत्ता पर बरकरार नहीं रखा तो एक विशेष वर्ग मात्र एक मिनट में तुम्हारा कत्लेआम कर देगा। अकबरूदिन ने तो 15 मिनट मांगा था। हिमाकत देखिये कोलकाता का मेयर फिरहाद हकीम हिन्दुओं को खुलेआम दावते दिन देते हुए इस्लाम में जन्म लेने को नेमत बताता है। ग्रेटर कोलकाता के एक मंच से एक मौलाना रोहगिंयाओं को अपना भाई बताते हुए NRC, CAA पर देश की सत्ता को चुनौती देने की हिम्मत रखता है। टीपू सुल्तान मस्जिद का ईमाम बरकती मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़ा गोश्त खिलाने की बाते कहता है। हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद की आधारशीला रख कर 1000 करोड़ की पेशकश का दम भरता दिखता है.
इसके बावजूद बंगाल के भद्र लोगों ने। यहां के सनातनी हिन्दू वोटरों ने जब भी सत्ता की धमक में मौजूदा सरकारों की नादिरशाही की पानी को सर से ऊपर जाते देखा है। चाहें सिद्धार्थ शंकर राय की कांग्रेस की सत्ता रही हो या फिर ज्योति बासु / बुद्धदेव भट्टाचार्य की 34 साल की वाममोर्चा सरकार। उसे ऐसे उतार फेंका कि आज कांग्रेस और वाममोर्चा अपने अस्तित्व की अंतिम संघर्ष कर रहे हैं। जहां तक 2026 को लेकर जिस तरह के रुझान मिल रहे हैं। लगता है बंगाल की आम जन मानस एक बार फिर अपनी लोकतान्त्रिक परिपक्वता को साबित कर देश को कायल कर सकती है। इति शुभम।

वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक साहित्यकार, राष्ट्रीय कवि कुमार जगदली ‘ सुनील वर्तमान में  रायपुर, छत्तीसगढ़  में निवासरत है  अपने जीवन का बहुमूल्य समय कलकत्ता में बिताया है (कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन ). 2000 से 2005 टक असम, उड़ीसा,झारखंड, यू पी में भी पत्रकारिता में सक्रिय रहे है। 20008 से छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में सक्रिय है

 मोब :-7999515385

  • Related Posts

    सीधे फर्श पर बैठकर खाना सही है या नहीं? जानें वास्तु के अनुसार क्या है सही तरीका

    Vastu Tips for Eating Food: आजकल ज्यादातर घरों में खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल का इस्तेमाल होता है. वहीं कुछ लोग आज भी जमीन पर बैठकर खाना पसंद करते हैं.…

    Read more

    जन्माष्टमी पर त्रिगुणी महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भाग्यशाली राशियां

    Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष बेहद खास माना जा रहा है. 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देशभर…

    Read more

    NATIONAL

    सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

    सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

    नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी

    नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी

    Video news आरक्षण पर तेजसवी का एनडीए पर बड़ा हमला… गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज! : तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष बिहार

    Video news आरक्षण पर तेजसवी का एनडीए पर बड़ा हमला…  गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज! : तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष बिहार

    लद्दाख से थार तक चीन-पाक की खैर नहीं, इंडियन आर्मी को मिलने जा रहा है सटीक हथियार

    लद्दाख से थार तक चीन-पाक की खैर नहीं, इंडियन आर्मी को मिलने जा रहा है सटीक हथियार

    तिब्बत में ग्लेशियर झील फटी, उत्तर बिहार कैसे हो सकता है तबाह? समझिए 30 लाख क्यूसेक पानी से गंडक-कोसी तक का पूरा कनेक्शन

    तिब्बत में ग्लेशियर झील फटी, उत्तर बिहार कैसे हो सकता है तबाह? समझिए 30 लाख क्यूसेक पानी से गंडक-कोसी तक का पूरा कनेक्शन

    PM Kisan 24th Installment : 24वीं किस्त कहीं अटक न जाए, जानें पीएम किसान से जुड़ी ये खास बात

    PM Kisan 24th Installment : 24वीं किस्त कहीं अटक न जाए, जानें पीएम किसान से जुड़ी ये खास बात