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सड़क पर नमाज रोक,इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने किया स्वागत ,मस्जिद और निर्धारित स्थान पर नमाज को किया समर्थन

 

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ अदा करने को लेकर दिए गए हालिया फैसले पर इस्लामी विद्वान Maulana Javed Haider Zaidi ने संतुलित और कानून-समर्थक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

मौलाना ज़ैदी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस्लाम में इबादत का अत्यधिक महत्व है, लेकिन इसके साथ-साथ कानून का पालन और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नमाज़ अदा करने के लिए मस्जिदें और निर्धारित स्थान मौजूद हैं, और सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति धार्मिक गतिविधियों से असुविधा तथा अव्यवस्था उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने कहा,
“धर्म हमें अनुशासन, शांति और सह-अस्तित्व की शिक्षा देता है। ऐसे किसी भी कार्य से बचना चाहिए जिससे समाज में तनाव या आम लोगों को परेशानी हो।”

गौरतलब है कि अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि के लिए प्रशासन की अनुमति आवश्यक है। न्यायालय के अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य नागरिकों के अधिकारों के अधीन है।

मौलाना ज़ैदी ने आगे कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते हुए देश के कानून और सामाजिक सौहार्द का भी सम्मान करें। उन्होंने सभी समुदायों से अपील की कि वे आपसी भाईचारे और शांति को प्राथमिकता दें।

कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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