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वाराणसी में नॉनवेज दुकानों पर कार्रवाई और शराब की दुकानों पर चुप्पी न्यायसंगत नहीं : मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

 

 

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। वाराणसी में मांस एवं मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध शिया इस्लामिक स्कॉलर एवं वक्ता मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक नीति का आधार समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर होना चाहिए। यदि धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए नॉनवेज की दुकानों के संबंध में निर्णय लिया जा रहा है, तो यही सिद्धांत शराब की दुकानों पर भी लागू होना चाहिए।

मौलाना ज़ैदी ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और बहुलतावादी देश है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग अपनी-अपनी परंपराओं और खान-पान की संस्कृति के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। नॉनवेज भोजन को किसी विशेष धर्म या समुदाय से जोड़कर देखना न तो उचित है और न ही संवैधानिक भावना के अनुरूप है।

उन्होंने कहा, “यदि प्रशासन यह मानता है कि शहर की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने के लिए कुछ व्यवस्थागत कदम आवश्यक हैं, तो उन कदमों में निष्पक्षता दिखाई देनी चाहिए। केवल मांस और मछली की दुकानों को निशाना बनाना तथा शराब की दुकानों को उसी दायरे से बाहर रखना एकतरफा दृष्टिकोण प्रतीत होता है।”

मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि शराब का दुष्प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर परिवार, समाज और सार्वजनिक व्यवस्था पर भी पड़ता है। घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अनेक सामाजिक समस्याओं में शराब की भूमिका पर समय-समय पर चिंता व्यक्त की जाती रही है। ऐसे में यदि सार्वजनिक नैतिकता और सामाजिक वातावरण को आधार बनाया जा रहा है, तो शराब की दुकानों के संबंध में भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग या समुदाय के विरुद्ध बोलना नहीं, बल्कि नीति निर्माण में समानता और न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करना है। प्रशासनिक निर्णय ऐसे होने चाहिए जो सभी नागरिकों के अधिकारों, रोजगार और सम्मान की रक्षा करते हुए सामाजिक सौहार्द को मजबूत करें।

मौलाना ज़ैदी ने अंत में कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, सहिष्णुता और आपसी सम्मान में निहित है। इसलिए किसी भी निर्णय को लागू करते समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि समाज में भेदभाव की भावना न पैदा हो और सभी वर्गों का विश्वास बना रहे।

 

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