
प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने का तीखा पलटवार, पूछा : बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच मिलने से बैज के पेट में मरोड़ क्यों?
*दो साल पहले भरी दुपहरी में बच्चों को आंदोलन की आग में झोंकने वाले बैज अब नैतिकता का ढोंग न रचें : ठोकने*
*रायपुर।* भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के सेवा संकल्प अभियान के तहत छात्र-छात्राओं के लिए प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर दिए गए बयान पर तीखा प्रहार करते हुए इसे कांग्रेस की कुण्ठित और नकारात्मक मानसिकता का परिचायक बताया है। श्री ठोकने ने कहा कि प्रदेश के बच्चों और नौनिहालों की रचनात्मक, सर्जनात्मक और वैचारिक प्रतिभा को निखारने के लिए दिए जा रहे अवसरों से आखिर दीपक बैज के पेट में मरोड़ क्यों उठ रहा है?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठोकने ने कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले बैज शायद अपना अतीत भूल गए हैं। दो साल पहले जून 2024 में ग्रीष्मकालीन अवकाश की समय-सीमा बढ़वाने के लिए खुद बैज मासूम बच्चों को लेकर भरी गर्मी में सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे। उस वक्त बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर बैज की संवेदनशीलता को कौन-सा काठ मार गया था? नौनिहालों का राजनीतिक ढाल के रूप में इस्तेमाल करना कांग्रेस के सबसे शर्मनाक चरित्र का यह जीता-जागता प्रमाण था और आज वही बैज मासूमों के नाम पर उपदेश दे रहे हैं! श्री ठोकने ने सवाल दागते हुए कहा कि क्या कांग्रेस के शासनकाल में छात्र-छात्राओं के बौद्धिक और वैचारिक विकास के लिए ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम नहीं होते थे? तब क्या वह राजनीति थी? सच्चाई यह है कि जब भी प्रदेश के युवा और बच्चे राष्ट्र निर्माण, विकास और सुशासन के सकारात्मक विमर्श से जुड़ते हैं, तो कांग्रेस का झूठे नैरेटिव सेट करने का टूलकिटिया एजेंडा बेनकाब हो जाता है। बैज भली-भाँति जानते हैं कि नौनिहालों की सकारात्मक भागीदारी और रचनात्मक ऊर्जा कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव की धज्जियाँ उड़ा देगी। यही वजह है कि दिल्ली बैठे अपने ‘आकाओं’ और ‘खानदान’ की नजरों में अपनी गिरती साख बचाने और अव्वल नंबर पाने के लिए बैज अनर्गल प्रलाप और बेबुनियाद बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा सरकार बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह संकल्पित है और कांग्रेस की इस नकारात्मक राजनीति को प्रदेश की जनता भली-भाँति समझ चुकी है।
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