
राजनांदगांव 31 अगस्त 2026। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को शून्य पर लाने के लिए पूरी गंभीरता से काम किया जा रहा है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव मार्गदर्शन में जिले में उच्च जोखिम वाली गर्भवती माताओं की विशेष मॉनिटरिंग और देखभाल के लिए एक वृहद अभियान चलाया जा रहा है। इस संवेदनशील पहल के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं और जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि गर्भस्थ शिशु और माता की सेहत का सटीक आंकलन करने के लिए जिले में व्यापक स्तर पर सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके तहत अब तक 1889 गर्भवती माताओं की एक बार सोनोग्राफी की जा चुकी है एवं 1287 अत्यधिक संवेदनशील व उच्च जोखिम वाली महिलाओं की दो बार सोनोग्राफी कराकर उनकी सेहत पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। टेली-कॉलिंग और निरंतर गृह भेंट माध्यम से ग्राउंड-लेवल मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एएनएम और मितानीनों के माध्यम से उच्च जोखिम वाली माताओं से लगातार दूरभाष के जरिए उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है। इसके साथ ही जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी (प्रसव) में केवल 15 दिन या उससे कम का समय बचा है, उनके घरों पर स्वास्थ्य टीमों द्वारा निरंतर गृह भ्रमण किया जा रहा है। इस गृह भ्रमण के दौरान महिलाओं का बीपी, हीमोग्लोबिन और अन्य आवश्यक जांच उनके घर पर ही की जा रही है। साथ ही उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार किया जा रहा है। आपातकालीन स्थिति के लिए महतारी एक्सप्रेस 102 और एम्बुलेंस की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। जिले के सुदूर अंचलों तक गर्भवती माता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाली माताओं की शीघ्र पहचान और लगातार फॉलो-अप से अनहोनी को टालने में सफल हो रहे हैं। सोनोग्राफी और अंतिम 15 दिनों में लगातार गृह भ्रमण करने से प्रसव के समय होने वाली क्रिटिकल समस्याओं को समय रहते पहचान लिया जाता है। टीम के इस समन्वित प्रयास से जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में बड़ी सफलता मिल रही है।









