
*झीरम की पीड़ा पर राजनीति बंद करें भूपेश, प्रदेश को बताएं पांच साल में क्या किया*
*फैसले से पहले न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करना बघेल की हताशा का प्रमाण*
रायपुर। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिव नारायण पाण्डेय ने झीरम घाटी मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि झीरम जैसी हृदयविदारक घटना को बार-बार राजनीतिक हथियार बनाना भूपेश बघेल की आदत बन चुकी है। जब वे विपक्ष में थे तब ‘सबूत’ होने का दावा करते थे, पांच साल मुख्यमंत्री रहे तब उन्हीं कथित सबूतों का क्या हुआ? अब सत्ता से बाहर होते ही फिर जांच और फैसले पर सवाल खड़े करने लगे हैं।
*पांच साल मुख्यमंत्री थे, तब कहां थे आपके कथित सबूत?*
पाण्डेय ने कहा कि भूपेश बघेल को प्रदेश की जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि जिन तथ्यों और सबूतों का वे वर्षों से दावा करते रहे, उन्हें पांच वर्षों के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सामने क्यों नहीं ला सके? मुख्यमंत्री रहते हुए नतीजा नहीं दे पाए और अब विपक्ष में बैठकर सवाल उठा रहे हैं। यह न्याय की चिंता नहीं, अपनी राजनीतिक विफलता से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा, “भूपेश बघेल बताएं—अगर आपके पास झीरम का सच था तो पांच साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर आपने उस सच को प्रदेश के सामने क्यों नहीं रखा? सत्ता में रहते चुप्पी और सत्ता जाते ही आरोप—यह कैसी राजनीति है?”
*फैसला आने से पहले अविश्वास पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण*
पाण्डेय ने कहा कि न्यायालय का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानून के आधार पर होता है। फैसला आने से पहले ही जांच और न्यायिक प्रक्रिया को संदेह के घेरे में खड़ा करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। क्या भूपेश बघेल अब अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार यह तय करेंगे कि कौन-सी जांच सही है और कौन-सा फैसला स्वीकार किया जाएगा?
*झीरम कांग्रेस की राजनीतिक ढाल नहीं, छत्तीसगढ़ की पीड़ा है*
पाण्डेय ने कहा कि झीरम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। यह घटना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गहरी पीड़ा का विषय है। इतनी गंभीर त्रासदी को बार-बार राजनीतिक ढाल बनाकर इस्तेमाल करना पीड़ित परिवारों की भावनाओं के साथ भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि भूपेश बघेल के पास वास्तव में कोई ऐसा तथ्य या प्रमाण है जो जांच में शामिल नहीं हुआ है, तो उन्हें केवल मीडिया में बयान देने के बजाय उसे सक्षम कानूनी मंच पर प्रस्तुत करना चाहिए। सवाल उछालना आसान है, लेकिन पांच साल सत्ता में रहने के बाद अपनी जवाबदेही से भागना उससे भी आसान है।
*झीरम पर राजनीति नहीं, सच और न्याय चाहिए*
शिव नारायण पाण्डेय ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि झीरम के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए और घटना में शामिल प्रत्येक दोषी कानून के कठघरे में आना चाहिए। लेकिन न्याय के नाम पर राजनीतिक भ्रम पैदा करना और अपनी सरकार की पांच वर्षों की विफलता को छिपाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, “भूपेश बघेल पहले अपने पांच साल का हिसाब दें। जिन सबूतों का दावा कर सत्ता तक पहुंचे, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन सबूतों का क्या हुआ? छत्तीसगढ़ अब आरोप नहीं, इस सवाल का सीधा जवाब चाहता है।”









