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जशपुर में  MRMA   2.0 के तहत तसर किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला

जशपुरनगर 04 सितंबर 2026/ राष्ट्रीय अभियान मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 (MRMA 2.0) के अंतर्गत जशपुर जिले के विभिन्न तसर बहुल क्षेत्रों में 1 से 3 सितंबर 2026 के दौरान किसानों के लिए जागरूकता, प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक-किसान संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई।
MRMA 2.0 का उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर तसर उत्पादन, उत्पादकता तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।
इस क्रम में 1 सितंबर को कुनकुरी में तसर में अधिक उत्पादकता के लिए हितधारक आधारित चयन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। किसानों को गुणवत्तापूर्ण तसर रेशम कीट बीज के चयन, वैज्ञानिक प्रजनन एवं चयन पद्धतियों तथा बेहतर फसल प्रदर्शन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।
2 सितंबर को कटंगखार में वैज्ञानिक तसर पालन पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जबकि उसी दिन टांगरगांव में तसर रेशम कीट के रोग प्रबंधन पर वैज्ञानिक-किसान संवाद आयोजित हुआ। दोनों कार्यक्रमों में लगभग 50-50 किसानों ने भाग लिया। किसानों को वैज्ञानिक पालन पद्धतियों, रोगों की पहचान, रोकथाम एवं प्रबंधन तथा स्वस्थ फसल के लिए नियमित निगरानी और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को तसर रेशम पालन को लाभकारी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
3 सितंबर को भितघरा में तसर ग्रेनेज की मानक कार्यप्रणाली (SOPs) तथा बंधरचुवां में तसर रेशम पालन में विसंक्रमण एवं स्वच्छता प्रथाओं पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में भी लगभग 50-50 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। किसानों को गुणवत्तापूर्ण तसर बीज उत्पादन, ग्रेनेज में स्वच्छता, वैज्ञानिक विसंक्रमण तथा रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रमों के दौरान किसानों को तसर रेशम पालन की आर्थिक संभावनाओं से अवगत कराते हुए बताया गया कि कम लागत में भी वैज्ञानिक पालन से बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। किसानों को उदाहरण के रूप में समझाया गया कि लगभग ₹2 प्रति DFL के खर्च से उचित पालन एवं प्रबंधन के माध्यम से करीब ₹250 मूल्य के कोकून प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रकार किसानों को तसर पालन को अतिरिक्त आय एवं ग्रामीण आजीविका के एक संभावनाशील साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रमों का आयोजन डॉ. निधि सुखीजा, वैज्ञानिक-बी, सीएसबी-सीटीआरटीआई, रांची द्वारा जशपुर रेशम विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी कर्मियों के सहयोग से किया गया। कुनकुरी कार्यक्रम में श्री श्याम कुमार, सहायक निदेशक रेशम उद्योग, जशपुर; श्री जेवियर टोप्पो, फील्ड मैन; श्री धन साय एवं श्री संजय कुमार यादव का सहयोग रहा। कटंगखार, टांगरगांव, भितघरा एवं बंधरचुवां के श्री राम यादव, डेमोंस्ट्रेटर; श्री ओवैद वर्मा, ऑपरेटिव; एवं श्री निर्मल करकट्टा, फील्ड ऑफिसर का सहयोग रहा।
कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ तथा किसानों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों एवं समस्याओं के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस पहल से तसर किसानों में वैज्ञानिक पालन, गुणवत्तापूर्ण बीज, रोग प्रबंधन एवं स्वच्छता संबंधी तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ तसर रेशम पालन को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।

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