
रायपुर, 16 अक्टूबर 2026/छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से एक बुजुर्ग के जीवन में छाई निराशा अब नई उम्मीद और उजाले में बदल गई है। तोकापाल विकासखंड की ग्राम पंचायत छापरभानपुरी के 68 वर्षीय सोमारू राम दोनों आंखों में मोतियाबिंद की वजह से पूरी तरह दृष्टिहीन हो चुके थे। हालत यह थी कि वे बिना लाठी के एक कदम भी नहीं चल पाते थे और दैनिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहने को विवश थे। जिससे वे अत्यंत मानसिक तनाव और सामाजिक उपेक्षा का सामना कर रहे थे।
उनकी इस लाचारी के बीच ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान’ एक जीवनदायी वरदान साबित हुआ। अभियान के अंतर्गत यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छापर भानपुरी में पदस्थ ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट ऑफिसर सुदीप प्रमाणिक ने सोमारू राम की आंखों की गहन जांच की, जिसमें दोनों आंखों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम ने न केवल उन्हें ऑपरेशन के लिए मानसिक रूप से तैयार किया, बल्कि आवश्यक परामर्श और रेफरल प्रक्रिया को सुगमता से पूरा कराते हुए उनका सफल ऑपरेशन भी सुनिश्चित किया।
ऑपरेशन के उपरांत सोमारू राम की आंखों की रोशनी पूरी तरह लौट आई है और उनका जीवन पूरी तरह बदल चुका है। अब उन्हें चलने के लिए किसी लाठी या सहारे की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे आत्मनिर्भर होकर अपने सारे काम स्वयं करने लगे हैं। जिस व्यक्ति को कभी लाचार समझकर उपेक्षित किया जाता था, आज वही सोमारू राम अपने हाथों से अपने और अपने परिवार के लिए घर का निर्माण कर रहे हैं तथा खेत के कार्यों में भी हाथ बंटा रहे हैं।
इस अविश्वसनीय बदलाव पर भावुक होते हुए सोमारू राम ने कहा कि पहले उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता था और वे दूसरों पर आश्रित थे, लेकिन इस सफल उपचार ने उन्हें नई जिंदगी बख्शी है, जिसके लिए वे स्वास्थ्य विभाग और शासन का हृदय से आभार प्रकट करते हैं। यह प्रेरक मामला सिद्ध करता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता और समय पर की गई स्क्रीनिंग ग्रामीण अंचलों में असहाय बुजुर्गों के जीवन में स्वाभिमान और नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।









