Ro no D15139/23

रेल नेटवर्क के विस्तार से बदल रही छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी

*औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति*

 

*प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी*

 

*नए रेल कॉरिडोर से माल ढुलाई, औद्योगिक कनेक्टिविटी और आदिवासी अंचलों के विकास को मिलेगी गति*

 

धनंजय राठौर

संयुक्त संचालक,

जनसंपर्क संचालनालय, रायुपर

रायपुर, 19 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में आधारभूत रेल अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंच रहा है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रेलवे स्टेशनों के विकसित होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

 

देश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क का विस्तार अब राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों से जुड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ मध्य भारत का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। रेलवे के विकास से उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

 

मुख्यमंत्री श्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से छत्तीसगढ़ में रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये कर दिया है जो वर्ष 2009-14 के दौरान औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना था। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है। इस निवेश का प्रमुख उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, खनिज और औद्योगिक माल की आवाजाही बढ़ाना तथा उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अब तक कनेक्टिविटी सीमित रही है।

 

*राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा वैकल्पिक रेल मार्ग*

 

छत्तीसगढ़ की रेल रणनीति में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूर दी थी। तब इस परियोजना की लागत 8,741 करोड़ रुपये अनुमानित थी। बाद में इसमें संशोधन किया गया और इसकी अनुमानित लागत 7,854 करोड़ रुपये कर दी गई। इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास कर माल और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल लाईन बिछाना है। इस कॉरिडोर से कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने की योजना है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।साथ ही, मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों तथा बंदरगाहों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिलेगी।

 

*बस्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत*

 

रेल नेटवर्क के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस्तर की कनेक्टिविटी है। रावघाट-जगदलपुर (140 किमी)की महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। जबकि किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किमी) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की 490 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना का सर्वे कार्य प्रगति पर। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से हजारों ग्रामीण पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। इस परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक संपर्क विकसित करने का काम चल रहा है। परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ जाएंगी, जिससे उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिलेगी। वहीं कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

*कटघोरा से डोंगरगढ़ तक नए संपर्क की योजना*

 

प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है। परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है। इस रेल लाइन का महत्व उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इससे यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

 

*उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी नई परियोजनाएं*

 

सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) रेल कॉरिडोर को भी रेल मंत्रालय द्वारा जल्दी ही मंजूर किए जाने की संभावना है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्दी निर्णय और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था। इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था मजबूती होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

 

*स्टेशनों का आधुनिकीकरण*

 

छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा नेटवर्क और स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों के लिए सुविधाएं बेहतर करना और स्टेशन परिसरों को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश के रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

———————————–

  • Related Posts

    यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने सड़क पर उतरे एनसीसी, स्काउट गाइड और एनएसएस कैडेट

    नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग के लिए कर रहे जागरूक   धमतरी, 19 अक्टूबर 2026। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने, यातायात नियमों के…

    Read more

    स्वामित्व योजना: धमतरी ने रचा इतिहास, 50 हजार से अधिक परिवारों को मिला अपनी ज़मीन का ‘स्वामित्व अधिकार’

    *प्रदेश में धमतरी जिला अव्वल; 501 राजस्व ग्रामों में ड्रोन सर्वे पूरा, 63 हजार से अधिक अधिकार अभिलेख तैयार*   *नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की तैयारी, पारदर्शी…

    Read more

    NATIONAL

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?

    रूस से तेल खरीदने पर भारत पर कोई टैरिफ नहीं, ट्रंप ने 100% टैरिफ लगाने वाले कानून पर लगाई रोक

    रूस से तेल खरीदने पर भारत पर कोई टैरिफ नहीं, ट्रंप ने 100% टैरिफ लगाने वाले कानून पर लगाई रोक

    भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया जाना क्या कानूनी था?

    भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया जाना क्या कानूनी था?