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सुगम धान खरीदी से मजबूत हो रहा ग्रामीण अर्थतंत्र-किसानों ने जताया आभार”

प्रदेश में किसानों की समृद्धि और कृषि को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संचालित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था निरंतर अधिक पारदर्शी, सरल और किसान-केंद्रित बनती जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी 15 नवंबर से पूरे छत्तीसगढ़ में प्रारंभ हुई है।
धमतरी जिले में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। धमतरी जिले में 100 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 19 नवंबर तक कुल 156761 क्विंटल धान 3431 किसानों से खरीदा जा चुका है, जो किसानों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।
इसी विश्वास को शब्द देते हुए ग्राम संबलपुर केंद्र पर धान बेचने आए किसान दीपेश कुमार देवांगन ने पहले ही दिन धान बेचते समय अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस साल समर्थन मूल्य पर धान बेचने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सुगम और पारदर्शी है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली ने उनकी सबसे बड़ी समस्याकृलंबे इंतजारकृको समाप्त कर दिया है। निर्धारित समय पर टोकन मिलने से उन्हें केंद्र पर अव्यवस्था या भीड़ का सामना नहीं करना पड़ा।
दीपेश ने बताया कि उन्होंने 76 क्विंटल धान बेचा है, पिछले वर्ष भी लगभग इतनी ही मात्रा बेची थी। उनका कहना है कि खरीदी के बाद भुगतान की प्रक्रिया भी अब अत्यंत तेज हो गई है। पिछले वर्ष समय पर भुगतान से उन्हें खेती के कार्यों में बड़ी सहूलियत मिली थी और इस बार भी उन्हें समय पर राशि मिलने की पूरी उम्मीद है। वे बताते हैं कि धान बेचकर प्राप्त धनराशि का उपयोग वे कृषि सुधार, बीज-खाद खरीदने और कुछ पारिवारिक आवश्यकताओं में करते हैं।
उन्होंने केंद्र की व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहाकृ
“अब हमें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। केंद्र पर व्यवस्था उत्तम है और कर्मचारियों द्वारा दिया जा रहा सहयोग सचमुच प्रशंसनीय है। हमारी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है।”
केंद्र पर  धान बेचने  आए हंसराज , शत्रुघन व अन्य किसानों ने भी अपनी सकारात्मक राय साझा की। किसानों का कहना है कि इस वर्ष प्रशासन द्वारा किए गए सुधारों से खरीदी व्यवस्था अत्यंत सहज हो गई है। बेहतर व्यवस्थापन, त्वरित मापतौल, ऑनलाइन पारदर्शिता और अधिकारियों का सतत निरीक्षण किसानों में भरोसा बढ़ा रहा है।
सरकार और जिला प्रशासन द्वारा किए गए इन प्रयासों ने न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायता की है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुए हैं। किसानों ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसी पारदर्शी, विश्वसनीय और किसान-केंद्रित सुविधाएं जारी रहेंगी।
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