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ईरान के दो परमाणु ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ेगी ट्रंप की चिंता, जहां अमेरिका ने बरसाए थे बम, वहां फिर से किलेबंदी

Iran Nuclear Sites Satellite Images: ईरान के ऊपर अमेरिकी का दबाव बढ़ता जा रहा है. सैन्य हमले की चेतावनी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार हमले की धमकी दे रहे हैं. वह ईरान को बातचीत की टेबल पर लाना चाह रहे हैं. ट्रंप का कहना है कि यह बातचीत न्यूक्लियर हथियारों के बिना होगी. इसी बीच अमेरिका की चिंता बढ़ाने वाली सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं. इनमें उन दो ईरानी परमाणु स्थलों पर नई गतिविधियां दिखाई गई हैं, जिन्हें पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका के हमलों में निशाना बनाया गया था.

प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा जारी तस्वीरों में नतांज और इस्फहान परमाणु स्थलों पर ध्वस्त इमारतों के ऊपर छतें बनाई गई दिखाई देती हैं. इस नई डेवलपमेंट के जरिए ऐसी कोशिश की जा रही है कि जमीन के सीन को सैटेलाइट की नजरों से छिपाया जा सके. ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को इन स्थलों का दौरा करने की अनुमति नहीं दी है, ऐसे में निगरानी का मुख्य साधन दूरस्थ (रिमोट) मॉनिटरिंग ही बचता है. इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि तेहरान इन क्षतिग्रस्त ठिकानों पर क्या कर रहा है.

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, जिन विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों की समीक्षा की, उनका कहना है कि यह काम पूरी तरह पुनर्निर्माण जैसा नहीं दिखता. इसके बजाय उनका मानना है कि ईरान संभवतः यह जांचने की कोशिश कर रहा है कि हमलों के बाद कोई सामग्री बची है या नहीं, वह भी बिना बाहरी निगरानी के. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की एंड्रिया स्ट्रिकर ने कहा कि ये ढांचे ईरान को सैटेलाइट निगरानी से दूर रहकर बचे हुए संसाधनों को निकालने में मदद कर सकते हैं.

तीन ठिकानों पर बरसाए थे बम

जून के युद्ध से पहले ईरान तीन प्रमुख परमाणु स्थलों का संचालन करता था. तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण में स्थित नतांज में एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज लगे थे, जो यूरेनियम को 60% तक संवर्धित करते थे. इस्फहान में संवर्धन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली यूरेनियम गैस तैयार की जाती थी. तीसरा स्थल, फोर्दो, एक पहाड़ के भीतर गहराई में बना है. इन्हीं तीनों जगहों को इजरायल और अमेरिका ने जून 2025 में निशाना बनाय था.

अब, ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम की सुरक्षा के लिए पूरे इलाके को एक तरह के किले में तब्दील कर रहा है. अमेरिका और इजरायल तेहरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते रहे हैं, जिसे ईरान लगातार खारिज करता आया है.    के डर में अब इस सुविधा की सुरक्षा कई लेवल पर मजबूत की जा रही है.

दो जगहों की हो रही किलेबंदी

इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अनुसार, ईरान ने इस्फहान में फिर से भूमिगत सुविधा के मेन गेट को मिट्टी से भर दिया है. दक्षिणी गेट पर भी ताजी मिट्टी डाली जा रही है, जिससे वहां का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. माना जा रहा है कि ईरान यह कदम संभावित अमेरिकी हमले से खुद को बचाने के लिए उठा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मकसद लगभग 408 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को स्टोर करने वाली सुविधाओं को अतिरिक्त सुरक्षा देना है. इससे पहले इस्फहान के इस न्यूक्लियर फैसेलिटी के गेट अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कार्य के लिए खोले गए थे. उस दौरान, सुरंगों को बेहद मजबूत कंक्रीट से मजबूत किया गया था ताकि किसी भी हमले के प्रभाव को कम किया जा सके.

नतांज में 13 जून को इजरायल ने जमीन के ऊपर स्थित मुख्य संवर्धन संयंत्र को नष्ट कर दिया. बाद में अमेरिकी बी-2 बॉम्बर वाले हमलों ने भूमिगत हॉल्स को निशाना बनाया. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा है कि ईरान ने दिसंबर में नष्ट संरचना के ऊपर छत बनाना शुरू किया और महीने के अंत तक इसे पूरा कर लिया.

तस्वीरों में नतांज के पास ‘पिकऐक्स माउंटेन’ नामक स्थान के आसपास खुदाई जारी रहने के संकेत भी मिले हैं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान यहां एक नई अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसेलिटी बना रहा होगा.

अमेरिका ने तैनात किए हैं एयरक्राफ्ट कैरियर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए बातचीत की मांग कर रहे हैं, यह कहते हुए कि ऐसा न होने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. उन्होंने देशव्यापी प्रदर्शनों पर तेहरान की कड़ी कार्रवाई का भी हवाला दिया है. अमेरिका ने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल विध्वंसकों को मध्य पूर्व में तैनात किया है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप अंततः बल प्रयोग का फैसला करेंगे या नहीं.

ईरान ने कहा; हमले का जवाब हमला होगा

वहीं, ईरान ने कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा और धमकी के माहौल में बातचीत से इनकार किया है. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नागरिक उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा.

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