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धमतरी में वेटलैंड संरक्षण पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न

 

वेटलैंड पारिस्थितिकी की रीढ़, संरक्षण जरूरी — कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा

धमतरी। जिले में आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर बीते 30 अप्रैल को वनमण्डल कार्यालय के सभाकक्ष में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि वेटलैंड केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में पक्षियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं, क्योंकि पक्षी पर्यावरण संतुलन के अहम संकेतक होते हैं। “पहले की तुलना में आज पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है। यदि यह स्थिति बनी रही तो जैव विविधता पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ेगा।
कलेक्टर ने आगे बताया कि जिले में जल संरचनाओं के सिकुड़ने और वेटलैंड क्षेत्र में कमी के कारण जल पर्यावरण, पशु-पक्षियों और स्थानीय जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए वन विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
वेटलैंड का महत्व और प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञ डॉ फैज और श्री राजू वर्मा ने बताया कि वेटलैंड प्राकृतिक “स्पंज” की तरह कार्य करते हैं, जो बाढ़ नियंत्रण, भूजल रिचार्ज, जल शुद्धिकरण और जलवायु संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। ये क्षेत्र हजारों प्रजातियों के पक्षियों, मछलियों और अन्य जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराते हैं। वेटलैंड के नष्ट होने से न केवल जल संकट बढ़ता है, बल्कि खाद्य श्रृंखला भी प्रभावित होती है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि पक्षी बीज प्रसार, परागण, कीट नियंत्रण और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रवासी पक्षी वेटलैंड की सेहत का संकेत देते हैं—जहां पक्षी अधिक होते हैं, वहां पारिस्थितिकी तंत्र भी संतुलित माना जाता है। पक्षियों की संख्या में गिरावट जल स्रोतों के प्रदूषण, अवैध अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन का संकेत है।
कार्यशाला के दौरान Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 के प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही स्थलों के चयन के मानदंड, वेटलैंड के विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use), प्रतिबंधित गतिविधियां और जिला वेटलैंड संरक्षण समिति की भूमिका पर भी जानकारी दी गई। इसके अलावा वेटलैंड नोटिफिकेशन, एवियन और एक्वेटिक जैव विविधता संरक्षण, महत्वपूर्ण वेटलैंड्स की पहचान, तथा GIS आधारित वेटलैंड इन्वेंट्री तैयार करने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में डीएफओ श्री कृष्ण जाधव, नगर निगम आयुक्त श्रीमती प्रिया गोयल, उपसंचालक कृषि श्री मोनेश साहू, उप संचालक पशुपालन डॉ. मरकाम सहित वाइल्ड लाइफ फोटो ग्राफर श्री अमर मुलवानी, नेचुरलिस्ट एंड वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर श्री गोपी कृष्ण साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित सभी वेटलैंड समिति के सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।
कलेक्टर ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले में वेटलैंड संरक्षण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

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