Ro no D15139/23

तहसील नहीं, अब डूबान क्षेत्र के गांवों में लग रही न्याय की चौपाल

 

 

*धमतरी जिला प्रशासन की लिंक कोर्ट के पहल से बदली दुर्गम अंचलों की तस्वीर*

*गांव में ही सुलझ रहे बरसों पुराने राजस्व मामले, बच रहा ग्रामीणों का समय और धन*

​रायपुर, 05 जून 2026/ लोकतंत्र और सुशासन की असली परिभाषा तब चरितार्थ होती है, जब जनता को अपनी बुनियादी जरूरतों और न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन खुद चलकर जनता के द्वार तक पहुंचे। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों सुशासन का एक ऐसा ही जीवंत और प्रेरणादायी अध्याय लिखा जा रहा है। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप, धमतरी कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू की गई ‘लिंक कोर्ट’ की अभिनव पहल ने दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया है।

​ कभी छोटे-छोटे राजस्व मामलों के लिए कई किलोमीटर की दुर्गम यात्रा तय कर तहसील या जिला मुख्यालय पहुंचने को मजबूर ग्रामीण, अब अपने ही गांव में चौपाल पर त्वरित सुनवाई और समाधान पा रहे हैं। यह पहल उन ग्रामीणों के लिए एक बड़ी संजीवनी बनकर उभरी है, जिनके लिए जिला मुख्यालय पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। ​इस मुहिम की सफलता को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि ग्रामीणों के चेहरों पर आई मुस्कान और उनके बरसों पुराने विवादों के खात्मे से समझा जा सकता है। अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट में ऐसी ही दो मिसालें देखने को मिलीं।

*हेमनारायण का जटिल नामांतरण मामला गांव में ही सुलझा*

​ ग्राम तांसी निवासी हेमनारायण बजरंग के भूमि नामांतरण का मामला बेहद जटिल था। इस प्रकरण में कई हितबद्ध पक्षकार शामिल थे, जिनके बयान और दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी करना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। पूर्व में ऐसे मामलों के लिए पक्षकारों को बार-बार तहसील कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन लिंक कोर्ट के माध्यम से सभी हितबद्ध पक्षकारों को गांव में ही एक मंच पर लाया गया। स्थानीय स्तर पर ही सबके बयान दर्ज किए गए और पूरी पारदर्शिता के साथ ग्रामीणों की सुविधा के अनुरूप इस जटिल मामले का पटाक्षेप कर दिया गया।

*ओंकार साहू को 15 साल बाद मिला सुधार पत्रक*

इसी तरह की एक राहत भरी कहानी ग्राम अकलाडोंगरी के ओंकार साहू की है। ओंकार ने वर्ष 2011 में एक भूमि खरीदी थी, लेकिन तकनीकी और विभिन्न राजस्व कारणों से उनका नामांतरण पिछले डेढ़ दशक से लंबित था। बरसों पुराना यह भूमि अभिलेख सुधार का मामला लिंक कोर्ट की मेज पर आया। कोर्ट ने तत्परता दिखाते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और मौके पर ही राजस्व अभिलेख में आवश्यक सुधार किया। ओंकार साहू के लिए वह पल भावुक करने वाला था जब स्वयं कलेक्टर ने उन्हें उनके भूमि सुधार का पत्रक अपने हाथों से सौंपा।

*12 पक्षकारों वाले विवादित मामले का मौके पर निपटारा*

लिंक कोर्ट की एक और बड़ी उपलब्धि तब सामने आई जब 12 हितबद्ध पक्षकारों वाले एक अत्यंत जटिल और विवादित नामांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान किया गया। सभी के बयान मौके पर ही दर्ज होने से वर्षों से धूल खा रही फाइल को न सिर्फ गति मिली, बल्कि तत्काल न्याय का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। ​ग्रामीणों को नियमित रूप से प्रशासनिक सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन ने दिन और स्थान तय कर दिए हैं, जो अब ग्रामीणों के लिए न्याय के नए केंद्र बन चुके हैं। नगरी बोरई में प्रत्येक शुक्रवार को तथा दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्र अकलाडोंगरी में प्रत्येक गुरुवार को लिंक कोर्ट का लगाया जा रहा है।

*समय, श्रम और धन की बचतरू ग्रामीणों ने जताया आभार*

अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट के निरीक्षण के दौरान स्वयं कलेक्टर ने ग्रामीणों के बीच बैठकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि​ दूरस्थ एवं डूबान प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को राजस्व सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। लिंक कोर्ट के माध्यम से नामांतरण, सीमांकन, खाता विभाजन और अभिलेख सुधार जैसे मामलों का समयबद्ध निराकरण हो रहा है, जिससे लोगों को अनावश्यक भागदौड़ और आर्थिक मानसिक शोषण से मुक्ति मिली है। ​गांव में ही त्वरित सुनवाई और बेहद सरल प्रक्रिया से संतुष्ट होकर तांसी, अकलाडोंगरी और आसपास के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की इस जनोन्मुखी पहल की मुक्त कंठ से सराहना की है।

​ ​धमतरी जिला प्रशासन की लिंक कोर्ट महज राजस्व विवादों को सुलझाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था के प्रति आम आदमी के विश्वास को बहाल करने का एक सशक्त माध्यम है। धमतरी का यह लिंक कोर्ट मॉडल आज पूरे प्रदेश के लिए सुशासन की एक नई नजीर पेश कर रहा है। जब शासन और प्रशासन जनसरोकारों को केंद्र में रखकर काम करते हैं, तो न्याय की गंगा दफ्तरों की बंद फाइलों से निकलकर ग्रामीणों के घर-आंगन तक पहुंचती है।

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