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विश्व पर्यावरण दिवस पर रायपुर में जशपुर वन मंडल के वनोपज एवं हस्तशिल्प उत्पादों ने बटोरी सराहना आरोग्य अमृत अवलेह और  जशक्राफ्ट ब्रांड की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

 जशपुरनगर 06 जून 2026/ जशपुर वन मंडल द्वारा स्थानीय वनोपज एवं पारंपरिक संसाधनों से तैयार किए जा रहे उत्पाद अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और उपयोगिता के कारण लगातार पहचान बना रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को रायपुर के राजीव स्मृति वन, वी.आई.पी. रोड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जशपुर वन मंडल द्वारा तैयार वनोपज आधारित उत्पादों एवं पारंपरिक हस्तशिल्प सामग्री की प्रदर्शनी ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में जशपुर वन मंडल अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित आरोग्य अमृत अवलेह तथा ष्जशक्राफ्टष् ब्रांड के उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी को जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, पर्यावरण प्रेमियों एवं आम नागरिकों से भरपूर सराहना मिली।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री श्री रामसेवक पैंकरा, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय, राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अन्जय शुक्ला, पद्मश्री सम्मानित श्री जगेश्वर यादव, श्री पांडी राम मंडावी तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

प्रदर्शनी में  जशक्राफ्ट के अंतर्गत छिंदघास एवं बाँस से निर्मित विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इनमें झुमके, मालाएं, सजावटी सामग्री एवं अन्य कलात्मक वस्तुएं शामिल थीं। स्थानीय संसाधनों से तैयार इन उत्पादों की आकर्षक बनावट, उत्कृष्ट शिल्पकला और पर्यावरण अनुकूल निर्माण प्रक्रिया ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। बड़ी संख्या में लोगों ने स्टॉल का अवलोकन कर महिला समूहों की सृजनात्मकता, कौशल और नवाचार की प्रशंसा की।वहीं जशपुर वनमण्डल द्वारा विकसित आयुर्वेदिक एवं वनोपज आधारित स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद ष्आरोग्य अमृत अवलेहष् भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। आगंतुकों ने इसके औषधीय गुणों, निर्माण प्रक्रिया तथा स्वास्थ्य लाभों के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उत्पाद के प्रति विशेष रुचि दिखाई।  जशपुर वनमण्डल की यह पहल वनाधारित आजीविका को सशक्त बनाने, स्थानीय संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे ये उत्पाद न केवल ग्रामीण एवं वनाश्रित परिवारों की आय में वृद्धि कर रहे हैं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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