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बिहार और केन्द्र सरकार ने बिहार के हितों की बलि चढ़़ा दी : जदयु

बिहार और केन्द्र सरकार ने बिहार के हितों की बलि चढ़़ा दी : जदयु

फरक्का जल संधि से बिहार में जल- संकट, राज्य की हो रही हकमारी : जदयु

“फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’

बिहार के 12 जिलों- भागलपुर, बक्सर,भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली,समस्तीपुर, बेगूसराय,
लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, और कटिहार में होगा संवाद

अतीश दीपंकर
ब्यूरो चीफ,बिहार 

बिहार के भोजपुर में जदयू का ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ।

इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों- बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार – में संवाद करेंगे, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं।

इस जन- जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा। क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है।

इस मौके पर आरा के धनपुरा स्थित ग्रैंड रिसाॅर्ट में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विधान परिषद् में सत्तारूढ़़़़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, विधायक राधाचरण साह, पार्टी की प्रदेश महासचिव और कार्यक्रम प्रभारी अंजुम आरा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष भीम पटेल सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्तागण मौजूद रहें।

कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डाॅक्यूमेट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री झा ने कहा कि, 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस जल संधि के कारण बिहार का जल- प्रबंधन बुरी तरह बिगड़़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं ।
श्री झा ने आगे कहा कि, फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़़ता है, इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है।

बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।

बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि, हमारे सर्वमान्य नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि, फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़़ रहा है। एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊँचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़़ का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़़ता है और हमारे कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73ः बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। यह हमारे साथ ज्यादती है, जिसे हम इस अभियान के माध्यम से बताना चाहते हैं।

श्री सिंह कुशवाहा ने कहा कि मैं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री झा को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने बड़ी मुखरता से इस विषय को उठाया, इस विषय पर अखबारों में लिखा और अभी हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से आज यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है।

बिहार विधान परिषद् में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा एवं विधायक राधाचरण साह ने कहा कि, जदयू की ये पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं है, बल्कि ये हमारी पार्टी का जनसरोकार है। ये बिहार के हक और बिहारवासियों के हित की बात है। हमें पता होना चाहिए कि, फरक्का (गंगा) जल संधि के कारण बिहार को कैसे और कितना नुकसान हो रहा है। हमलोग बिहार की आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं ताकि गंगा से जुड़़े सवाल देश के सामने आएं और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो।

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